हरमू हाउसिंग कॉलोनी में कचरा डंपिंग पर विवाद, दुर्गंध से स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी

रांची के हरमू हाउसिंग कॉलोनी में प्रोसेस कचरा डंपिंग का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे को लेकर नगर निगम पर सवाल उठे

रांची के हरमू हाउसिंग कॉलोनी में झिरी डंपिंग यार्ड से लाए गए प्रोसेस कचरे की डंपिंग को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया है। दुर्गंध और संभावित संक्रमण के खतरे के बीच नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

रांची: रांची की हरमू हाउसिंग कॉलोनी में झिरी डंपिंग यार्ड से लाए गए प्रोसेस कचरे को भराव कार्य में इस्तेमाल किए जाने के बाद स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि कचरे से उठ रही दुर्गंध और बारिश के कारण उत्पन्न हालात से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं। वहीं नगर निगम का कहना है कि यह कचरा वैज्ञानिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद उपयोग में लाया जा रहा है।

भराव कार्य के लिए डाला जा रहा प्रोसेस कचरा

रांची के हरमू चौक स्थित झारखंड राज्य आवास बोर्ड की भूमि पर चल रहे विकास कार्य के दौरान बने बड़े गड्ढे को भरने के लिए रांची नगर निगम पिछले करीब एक सप्ताह से झिरी डंपिंग यार्ड से लाया गया प्रोसेस कचरा डाल रहा है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में रहने वाले लोगों ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि कचरे से उठ रही तेज दुर्गंध के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।

हरमू हाउसिंग कॉलोनी में कचरा डंपिंग पर विवाद, दुर्गंध से स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी

स्थानीय निवासियों के अनुसार, बारिश के मौसम में कचरे से निकलने वाली बदबू और रिसाव के कारण आसपास का वातावरण असहज हो गया है। लोगों का कहना है कि घरों की खिड़कियां खोलना मुश्किल हो गया है और सुबह-शाम टहलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी चिंता

इलाके के लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह कचरे की डंपिंग जारी रही तो मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाएगा। उनका आरोप है कि आवासीय क्षेत्र में इस तरह प्रोसेस कचरे का उपयोग उचित नहीं है और इससे बच्चों, बुजुर्गों तथा अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

हरमू वार्ड-26 के पूर्व पार्षद अरुण कुमार झा ने भी नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि गड्ढे को भरना ही है तो वहां अच्छी गुणवत्ता की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यदि प्रोसेस कचरे का उपयोग किया जा रहा है तो दुर्गंध और संक्रमण रोकने के लिए नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जाना चाहिए।

क्या है झिरी डंपिंग यार्ड का प्रोसेस कचरा?

झिरी डंपिंग यार्ड रांची शहर के ठोस कचरे के निस्तारण का प्रमुख केंद्र है। यहां वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पुराने कचरे की छंटाई कर बायो-मिट्टी, आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) और अन्य अवशेष अलग किए जाते हैं, ताकि डंपिंग यार्ड का बोझ कम हो और पर्यावरणीय प्रभाव घटाया जा सके।

नगर निगम के अनुसार, इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया से निकलने वाले प्रोसेस कचरे का उपयोग कुछ स्थानों पर भराव कार्य के लिए किया जाता है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वैज्ञानिक प्रक्रिया के बावजूद यदि इससे दुर्गंध फैल रही है तो इसके उपयोग के तरीके और स्थान पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

हरमू हाउसिंग कॉलोनी में कचरा डंपिंग को लेकर अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया जाए और यदि आवश्यक हो तो वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन उन्हें इस तरह नहीं किया जाना चाहिए कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

वहीं, झिरी डंपिंग यार्ड में लीगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निष्पादन का कार्य नगर निगम की निगरानी में अधिकृत एजेंसी द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा वहां स्थापित कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र में गीले कचरे से बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जाती है। फिलहाल हरमू में प्रोसेस कचरे की डंपिंग को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच समाधान की उम्मीद बनी हुई है।

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