प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। वह 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को वहां से प्रस्थान करेंगे। यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के लगभग दो महीने बाद हो रहा है।
नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) के बाद द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह दौरा पिछले चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगा, जिससे इसे कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को अपनी यात्रा समाप्त करेंगे। यह दौरा जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की भारत यात्रा के तुरंत बाद हो रहा है, जिससे भारत की सक्रिय इंडो-पैसिफिक कूटनीति और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
40 साल बाद भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में ऐतिहासिक मोड़
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और न्यूजीलैंड संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है। लगभग चार दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस यात्रा का स्वागत करते हुए भारत को अपने देश की आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
FTA के बाद तेज हुई आर्थिक साझेदारी
भारत और न्यूजीलैंड के बीच अप्रैल 2025 में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता केवल नौ महीनों की रिकॉर्ड समयसीमा में पूरा किया गया, जिसे अब तक का सबसे तेज़ एफटीए समझौता माना जा रहा है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं।
न्यूजीलैंड ने भारतीय निर्यात पर लगाए गए लगभग सभी टैरिफ समाप्त कर दिए हैं, जिससे भारतीय उत्पादों को वहां के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। इस एफटीए से न केवल द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, बल्कि ओशिनिया और प्रशांत क्षेत्र के अन्य बाजारों में भी भारत की पहुंच मजबूत होगी।
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निवेश और रोजगार के नए अवसर
समझौते के अनुसार, न्यूजीलैंड भारत में लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की योजना बना रहा है। इससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा। न्यूजीलैंड सरकार का मानना है कि इस समझौते से उसके देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निर्यात में वृद्धि होगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। वहीं, भारत में भी कृषि, टेक्नोलॉजी, सेवा क्षेत्र और बुनियादी ढांचे में नए निवेश के रास्ते खुलेंगे।
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। न्यूजीलैंड ने भारत में कीवी, सेब और मनुका शहद जैसे उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को आसान बनाने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों देशों ने कृषि उत्पादकता, बागवानी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, वानिकी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। भारत की विशाल जनसंख्या और न्यूजीलैंड की कृषि विशेषज्ञता मिलकर इस क्षेत्र में एक मजबूत साझेदारी विकसित कर सकती है।
भारत का बढ़ता वैश्विक व्यापारिक प्रभाव
भारत और न्यूजीलैंड की साझेदारी को वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, न्यूजीलैंड का आयात और निर्यात दोनों ही मजबूत स्तर पर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन और सहयोग की संभावनाएं और बढ़ी हैं।
न्यूजीलैंड अपनी जीडीपी का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा हर वर्ष विदेशी निवेश के रूप में वैश्विक बाजारों में लगाता है, जो भारत के लिए बड़े निवेश अवसर पैदा करता है।








