ईरान पर हमलों और खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान तथा पीओके में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। कराची और गिलगित-बाल्टिस्तान में सुरक्षा बलों से झड़प में 22 लोगों की मौत हुई, 100 से अधिक घायल बताए गए हैं। कई इलाकों में कड़ी सुरक्षा तैनात है।
Israel-US-Iran War: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के लगातार हमलों के बीच अब इसका असर पड़ोसी देशों में भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद कई देशों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी Gilgit-Baltistan में भी हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 22 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी झड़पें हुईं। खासकर Karachi और गिलगित-बाल्टिस्तान में हालात बेकाबू हो गए।
कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर धावा
जानकारी के मुताबिक रविवार को कराची में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी ईरानी सरकार के समर्थन में नारे लगा रहे थे और अमेरिका के खिलाफ गुस्सा जता रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने कराची स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर बढ़ने की कोशिश की।

स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा बलों ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को रोकने का प्रयास किया। लेकिन भीड़ के उग्र होने के कारण झड़प शुरू हो गई। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान भगदड़ और टकराव में कई लोग घायल हो गए।
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार कराची में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई और करीब 50 लोग घायल हुए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में हिंसक टकराव
पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्तान में भी हालात तनावपूर्ण हो गए। यहां प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और कुछ सरकारी दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया। विरोध के दौरान भीड़ ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
सुरक्षा बलों के साथ झड़प में 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और करीब 80 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है और इंटरनेट सेवाओं पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
प्रदर्शन क्यों हुए हिंसक

ईरान पर हुए हमलों और खामेनेई की मौत को लेकर पाकिस्तान के कई हिस्सों में गहरा आक्रोश देखा गया। कुछ धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध मार्च का आह्वान किया था।
शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताए गए, लेकिन बाद में भीड़ उग्र हो गई। कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधा टकराव हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैली भावनात्मक अपील और भड़काऊ संदेशों ने भीड़ को और भड़काने का काम किया।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास ने जारी बयान में कहा कि वे कराची और लाहौर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों के सामने जारी प्रदर्शनों की खबरों पर नजर रख रहे हैं। साथ ही इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास और पेशावर के वाणिज्य दूतावास के बाहर संभावित प्रदर्शनों को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है।
अमेरिका ने पाकिस्तान में रह रहे अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे लोकल न्यूज पर नजर रखें और सुरक्षा उपायों का पालन करें। भीड़-भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने और अपने STEP रजिस्ट्रेशन को अपडेट रखने की सलाह दी गई है।












