केएम त्रिपाठी आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी, 2009 में 70 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे

पूर्व रेलवे अधिकारी केएम त्रिपाठी आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी पाए गए। 2009 में 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे और 2014 में सजा हुई थी।

पूर्व रेलवे अधिकारी केएम त्रिपाठी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया गया है। इससे पहले 2009 में उन्हें 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था, जिसके मामले में 2014 में पांच साल की सजा हुई थी।

लखनऊ: पूर्व रेलवे अधिकारी कृष्ण मोहन त्रिपाठी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सीबीआई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें दोषी पाया है। इससे पहले वर्ष 2009 में कैटरिंग ठेके के नवीनीकरण के लिए 70 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। रिश्वत मामले में 2014 में उन्हें पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी।

70 हजार रुपये की रिश्वत ने बदल दी केएम त्रिपाठी की जिंदगी

कृष्ण मोहन त्रिपाठी भारतीय रेल यातायात सेवा यानी IRTS के अधिकारी रहे हैं। उनके सेवाकाल का बड़ा हिस्सा उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में बीता। कभी रेलवे में प्रभावशाली अधिकारियों में गिने जाने वाले केएम त्रिपाठी का नाम वर्ष 2009 में रिश्वत मामले में सामने आया।

कैटरिंग ठेके के नवीनीकरण के लिए 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते समय उन्हें पकड़ा गया था। गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की जांच शुरू हुई और उनका प्रभाव धीरे-धीरे खत्म होता चला गया।

महंगे शौक और प्रभावशाली जीवनशैली थी चर्चा में

केएम त्रिपाठी अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर प्रभावशाली संपर्कों और महंगी जीवनशैली के लिए चर्चा में रहे। रिपोर्ट के मुताबिक उनका रेलवे में इतना प्रभाव था कि कई अधिकारी अपनी पसंद की पोस्टिंग के लिए उनसे संपर्क करते थे।

उनके महंगे शौक भी चर्चा का विषय रहे। वीआईपी मोबाइल नंबर और खास वाहन नंबर रखने के अलावा उनके पास महंगे सामान होने की बात सामने आई थी। उनके बारे में यह भी कहा जाता था कि उन्हें रेल मंत्री के सैलून तक सीधी पहुंच हासिल थी।

CBI की कार्रवाई में घर से मिली थी बड़ी मात्रा में संपत्ति

रिश्वत मामले में कार्रवाई के दौरान CBI ने केएम त्रिपाठी से जुड़े परिसरों की तलाशी ली थी। रिपोर्ट के अनुसार तलाशी में करीब ढाई किलोग्राम सोने के बिस्कुट, चांदी की सिल्लियां, आभूषण और बड़ी मात्रा में नकदी मिली थी।

इसके अलावा विदेशी पिस्टल, लाइसेंसी हथियार, कारतूस, विदेशी इलेक्ट्रॉनिक सामान, महंगी पेंटिंग और एंटीक मूर्तियां भी बरामद होने का उल्लेख है। तलाशी के दौरान सोने की खड़ाऊ और विदेशी शराब की बोतलों के साथ लखनऊ के माल एवेन्यू और महानगर इलाके में फ्लैट से जुड़े दस्तावेज भी मिले थे।

रेलवे अधिकारी के साथ वर्चस्व की लड़ाई भी आई सामने

केएम त्रिपाठी के खिलाफ चले भ्रष्टाचार के मामले के दौरान उनके कैडर के एक अन्य अधिकारी के साथ कथित वर्चस्व की लड़ाई की बात भी सामने आई थी। दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद की जानकारी रेलवे बोर्ड के स्तर तक पहुंचने का दावा किया गया।

जिस ठेकेदार से 70 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में केएम त्रिपाठी पकड़े गए थे, उसके दूसरे अधिकारी से करीबी संबंध होने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, यह विवाद मामले की पृष्ठभूमि का हिस्सा रहा और रिश्वत मामले में अदालत की कार्रवाई अलग आधार पर हुई।

रिश्वत मामले में 2014 में हुई थी सजा

केएम त्रिपाठी के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई। वर्ष 2009 के रिश्वत मामले में CBI की कार्रवाई के बाद अदालत ने उन्हें 2014 में दोषी ठहराया था। इस मामले में उन्हें पांच वर्ष की सजा सुनाई गई थी।

अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी CBI कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया है। इस फैसले के साथ कभी रेलवे में प्रभावशाली माने जाने वाले अधिकारी के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई में एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है।

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