उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रेनों की अधिकतम गति 75 किमी प्रति घंटा निर्धारित की है। बिना डिवाइस वाली ट्रेनों की सीमा 60 किमी रहेगी। रेलवे ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए 980 फॉग सेफ डिवाइस तैनात किए हैं।
New Delhi: उत्तर भारत में बढ़ते कोहरे के बीच पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रेनों की गति सीमा को कम कर दिया है ताकि शीतकालीन सीज़न में सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके। जैसे-जैसे रात और सुबह के समय कोहरा घना होता जा रहा है, ट्रेनों की दृश्यता पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है, जिसके चलते रेलवे ने सभी रूटों पर विशेष सावधानी के निर्देश जारी किए हैं। अब जिन ट्रेनों में फॉग सेफ डिवाइस लगी है, वे अधिकतम 75 किमी प्रति घंटा की गति से चलेंगी, जबकि जिन ट्रेनों में यह डिवाइस नहीं है, उनकी अधिकतम मंजूर गति 60 किमी प्रति घंटा होगी। सामान्य दिनों में पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों की अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा तक रहती है, लेकिन कोहरे के कारण इसे नियंत्रित किया जा रहा है ताकि किसी भी दुर्घटना की आशंका कम हो सके।
फॉग सेफ डिवाइस की तैनाती
पूर्वोत्तर रेलवे ने इस सर्दी में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कुल 980 फॉग सेफ डिवाइस इंस्टॉल की हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के अनुसार इन डिवाइसों के बाद ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और अपेक्षाकृत तेज होगा। लखनऊ मंडल में 315, इज्जतनगर मंडल में 250 और वाराणसी मंडल में 415 फॉग सेफ डिवाइस उपलब्ध कराई गई हैं। यह डिवाइस पूरी तरह GPS आधारित तकनीक पर काम करती है, जो ट्रेन चालक को समय से पहले अलर्ट कर देती है। घने कोहरे में जहां दृश्यता 10–15 मीटर तक सीमित हो जाती है, वहाँ यह तकनीक लोको पायलट के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
GPS आधारित तकनीक से बढ़ी सुरक्षा

फॉग सेफ डिवाइस इस तरह डिजाइन की गई है कि यह किसी भी सिग्नल के 500 मीटर पहले लोको पायलट को सतर्क कर देती है। डिवाइस से अलर्ट साउंड निकलता है और इसके साथ वीडियो डिस्प्ले पर भी आगे आने वाले सिग्नल दिखने लगते हैं। इससे लोको पायलट को समय रहते पता चल जाता है कि आगे सिग्नल कैसा है, ट्रैक की स्थिति क्या है, गति सीमा कितनी है, और अगला पड़ाव कितनी दूरी पर है। पहले जब यह तकनीक उपयोग में नहीं थी, तब कोहरे के दौरान अधिकतम गति 60 किमी प्रति घंटा ही अनुमेय थी, क्योंकि दृश्यता बेहद कम हो जाती थी। लेकिन इस GPS आधारित टेक्नोलॉजी से अब अधिकतम स्पीड 75 किमी प्रति घंटा तक संभव हो पाई है, जो ट्रेन संचालन को तेज भी बनाती है और सुरक्षित भी करती है।
फॉग सिग्नल मैन की आवश्यकता कम हुई
पहले ट्रेनों को सुरक्षित चलाने के लिए रेलवे कोहरे के मौसम में फॉग सिग्नल मैन की तैनाती करता था, जो ट्रैकों के पास खड़े होकर ट्रेन को सिग्नल देता था। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और जोखिम भरी होती थी। लेकिन अब फॉग सेफ डिवाइस की वजह से फॉग सिग्नल मैन की जरूरत लगभग खत्म हो गई है। यह तकनीक न सिर्फ लोको पायलट को लगातार अपडेट देती है, बल्कि ट्रेन संचालन को भी तेज बनाती है, जिससे रूट पर ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर होता है। कोहरे के दौरान पूर्ण ब्लॉक और स्वचालित ब्लॉक पद्धति में काम करते समय इंजन चालक और सहायक लोको पायलट दोनों को काउंसलिंग दी गई है ताकि वे सभी निर्देशों का पालन कर सकें।
हर मंडल में सक्रिय निगरानी
पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों प्रमुख मंडलों—लखनऊ, इज्जतनगर और वाराणसी—में सभी यात्री तथा मालगाड़ियों में फॉग पास डिवाइस का लगातार उपयोग किया जा रहा है। रेलवे पटरियों की पेट्रोलिंग भी बढ़ाई गई है ताकि कोहरे में किसी भी तरह की बाधा, टूट-फूट या असामान्य गतिविधि को समय रहते पहचाना जा सके। ट्रैक इंजीनियरों और पेट्रोलिंग टीमों को भी इस मौसम में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।










