राजस्थान के कोटा के गुमानपुरा क्षेत्र में रिपेयरिंग के दौरान एक जर्जर तीन मंजिला मकान मात्र 6 सेकंड में ढह गया। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया, कोई जनहानि नहीं हुई।
कोटा: राजस्थान के कोटा शहर में मंगलवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब गुमानपुरा थाना क्षेत्र के बल्लभबाड़ी स्थित घोसी मोहल्ले में एक तीन मंजिला मकान मात्र कुछ सेकंड में भरभराकर गिर गया। यह पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि स्थानीय लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही इमारत मलबे में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरा ढांचा लगभग 6 सेकंड में ढह गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
रिपेयरिंग के दौरान हुआ हादसा, मकान पहले से था जर्जर
जानकारी के अनुसार, यह तीन मंजिला मकान पहले से ही जर्जर स्थिति में था और उसमें मरम्मत (रिपेयरिंग) का काम चल रहा था।
इमारत के अंदर कोई स्थायी निवासी मौजूद नहीं था, क्योंकि मरम्मत कार्य के कारण उसे खाली कराया गया था। इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया और किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी और कमजोर इमारतों में बिना तकनीकी जांच के मरम्मत कार्य करना खतरनाक साबित हो सकता है।
6 सेकंड में ढही पूरी बिल्डिंग, VIDEO में कैद हुआ मंजर
स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे तीन मंजिला इमारत अचानक एक तरफ झुकती है और कुछ ही सेकंड में पूरी तरह ढह जाती है।
धूल और मलबे का गुबार पूरे इलाके में फैल गया, जिससे आसपास के लोग दहशत में आ गए।
लोगों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी और मौके पर भीड़ जमा हो गई।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम
घटना की जानकारी मिलते ही गुमानपुरा थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस ने इलाके को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की और आम लोगों को मलबे के पास जाने से रोका।
डीएसपी योगेश शर्मा ने बताया कि घटना लगभग शाम 4:30 बजे के आसपास हुई। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन एहतियातन राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, डॉग स्क्वॉड भी तैनात
हालांकि मकान खाली था, फिर भी प्रशासन ने किसी संभावित जोखिम को देखते हुए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है।
मलबे की जांच के लिए डॉग स्क्वॉड को भी मौके पर बुलाया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई व्यक्ति मलबे में फंसा न हो।
जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम तेजी से चल रहा है।
इलाके में दहशत और लोगों की भीड़
हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए।
लोगों ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इतनी तेज़ी से किसी इमारत को गिरते नहीं देखा। कुछ ही सेकंड में पूरा मकान धूल में बदल गया।
प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।
जर्जर इमारतों को लेकर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर शहरों में मौजूद पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई पुरानी इमारतें बिना संरचनात्मक जांच के खड़ी हैं, जो किसी भी समय बड़ा हादसा बन सकती हैं।
कोटा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
प्रशासन की प्राथमिक जांच: संरचनात्मक कमजोरी का शक
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह संकेत मिला है कि मकान काफी पुराना और कमजोर हो चुका था।
मरम्मत कार्य के दौरान संभवतः संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे इमारत अचानक गिर गई।
हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी।
राहत की बात: कोई जनहानि नहीं
इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
अगर यह हादसा दिन में किसी व्यस्त समय या रिहायशी गतिविधि के दौरान होता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे जर्जर भवनों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों की राय: बिना तकनीकी सलाह मरम्मत खतरनाक
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी इमारतों की मरम्मत बिना तकनीकी जांच के करना बेहद जोखिम भरा होता है।
कई बार दीवारों या नींव में कमजोरी होने पर हल्का सा दबाव भी पूरी संरचना को गिरा सकता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि किसी भी पुराने भवन की मरम्मत से पहले स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए।
प्रशासन ने शुरू की जांच
स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
यह पता लगाया जा रहा है कि मरम्मत कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि मकान किस स्थिति में था और क्या उसे पहले से असुरक्षित घोषित किया गया था।










