कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज़ हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता-साझेदारी और नेतृत्व को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। दोनों गुट खुलकर सार्वजनिक बयान दे रहे हैं, लेकिन अंततः जिम्मेदारी कांग्रेस हाईकमान पर टिकी हुई है।
बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की लड़ाई तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से पार्टी हाईकमान से “भ्रम पर पूर्ण विराम लगाने” का आग्रह किया, जबकि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सत्ता-साझेदारी पर “पांच-छह” वरिष्ठ नेताओं के बीच “गुप्त समझौते” की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने इसे स्पष्ट करने से इनकार किया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि अब यह मामला सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ चर्चा के बाद ही सुलझाया जाएगा। आइए जानते हैं इस राजनीतिक जंग के प्रमुख पहलू 10 पॉइंट्स में:
- गुप्त समझौते का मुद्दा: डीके शिवकुमार ने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर “पांच-छह वरिष्ठ नेताओं के बीच एक गुप्त समझौता” हुआ था। हालांकि उन्होंने ब्यौरा सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि ऐसा करने से पार्टी की छवि को नुकसान हो सकता है।
- सिद्धारमैया का विरोध: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि केवल केंद्रीय नेतृत्व ही इस भ्रम को समाप्त कर सकता है। उन्होंने पार्टी हाईकमान से अपील की कि वे इस विवाद पर “पूर्ण विराम” लगाएं।
- हाईकमान का अंतिम निर्णय: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे का अंतिम निर्णय सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह “सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं” है।
- पिछला समझौता: कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, मई 2023 में खरगे के आवास पर सत्ता-साझेदारी पर एक समझौता हुआ था। इसके तहत सिद्धारमैया को पहले ढाई साल और बाकी समय शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव था।
- विवाद का केंद्र: सिद्धारमैया ने पहले कहा था कि वह पूरे पांच साल मुख्यमंत्री बने रहेंगे। बाद में उन्होंने नरम सुर अपनाते हुए कहा कि आलाकमान का निर्णय उनका अंतिम मार्गदर्शन करेगा। वहीं शिवकुमार के करीबी नेता इसे सम्मान देने की बात करते हैं, ताकि कांग्रेस की विश्वसनीयता और संगठनात्मक नेतृत्व की वफादारी बनी रहे।
- विधायक दल की स्थिति: सिद्धारमैया के समर्थक कहते हैं कि विधायक दल के भीतर औपचारिक रूप से उठाए जाने तक प्रतिस्थापन पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। वहीं शिवकुमार ने सिद्धारमैया को “वरिष्ठ नेता और पार्टी की संपत्ति” करार दिया और उनकी अगली योजनाओं का समर्थन किया।
- राजधानी में विधायक: शिवकुमार का समर्थन करने वाले कई विधायक राजधानी बेंगलुरु पहुंच गए हैं। सिद्धारमैया ने कहा, उन्हें जाने दो, देखते हैं वे क्या राय देते हैं। इसका उद्देश्य पार्टी के भीतर मतभेद को और स्पष्ट करना है।
- कैबिनेट फेरबदल का मसला: उपमुख्यमंत्री चाहते हैं कि किसी भी कैबिनेट फेरबदल से पहले लीडरशिप का मुद्दा सुलझाया जाए, ताकि सत्ता-साझेदारी में किसी प्रकार की असमानता न रह जाए।
- विपक्ष की प्रतिक्रिया: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि कर्नाटक को स्थिर नेतृत्व चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि बेलगावी में शीतकालीन सत्र से पहले नेतृत्व संकट का समाधान किया जाए।
- भविष्य की राह: दोनों गुट खुले तौर पर भ्रम की स्थिति को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन अंततः हाईकमान के निर्णय का इंतजार है। कांग्रेस की शीर्ष तिकड़ी – खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी – ही इस विवाद का अंतिम हल निकाल पाएंगे।
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी यह खींचतान केवल दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सत्ता-साझेदारी का मामला नहीं है। यह पूरे राज्य में पार्टी की स्थिरता, विधायक दल की शक्ति और हाईकमान के निर्णय पर निर्भर करती है।











