कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व संकट की अटकलें तेज, शिवकुमार–खरगे मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। डीके शिवकुमार और मल्लिकार्जुन खरगे की मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ी है। जानिए क्या

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से उनके आवास पर मुलाकात की, जिसके बाद राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही सियासी खींचतान की अटकलें और तेज हो गईं।

बेंगलुरु: कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व संकट की चर्चाएं एक बार फिर जोर पकड़ने लगी हैं। उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से दिल्ली में हुई हालिया मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि शिवकुमार ने स्पष्ट रूप से किसी भी राजनीतिक या नेतृत्व संबंधी बातचीत से इनकार किया है, लेकिन यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राज्य सरकार अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे कर चुकी है और सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।

शिवकुमार ने राजनीतिक बातचीत से किया इनकार

डीके शिवकुमार ने कहा कि उनकी यह मुलाकात पूरी तरह नीतिगत मुद्दों तक सीमित थी। उन्होंने बताया कि वे राज्य कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष के रूप में केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बदलकर नए कानून VB-GRAMG अधिनियम लाने के प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने पहुंचे थे। शिवकुमार ने कहा, “मैंने किसी राजनीतिक पद या नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई चर्चा नहीं की। इसकी न तो जरूरत है और न ही ऐसा कोई मुद्दा फिलहाल है।”

उन्होंने यह भी दोहराया कि वे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ मिलकर कांग्रेस हाईकमान के फैसलों का सम्मान करेंगे। “हम दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि पार्टी नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, हम उसका पालन करेंगे,” शिवकुमार ने कहा।

“पद हो या न हो, मैं पार्टी का कार्यकर्ता रहूंगा” - शिवकुमार

शिवकुमार ने खुद को आजीवन पार्टी कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी पद के लिए नहीं, बल्कि संगठन के लिए है। उन्होंने कहा, “चाहे कोई पद हो या न हो, मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता रहूंगा। मैंने पोस्टर लगाए हैं, झाड़ू लगाई है और जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए काम किया है। मैं सिर्फ मंच पर भाषण देने के लिए राजनीति में नहीं आया।”

जब उनसे उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष के “इनाम” के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस सवाल को टालते हुए कहा कि वे ऐसी बातों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व संकट की अटकलें तेज, शिवकुमार–खरगे मुलाकात से बढ़ी सियासी हलचल

आधे कार्यकाल के बाद बढ़ी नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा हिस्सा पूरा कर लिया। इसके बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले किए गए सत्ता-साझेदारी के कथित समझौते और ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

इस बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि वे पद पर बने रहेंगे और पार्टी हाईकमान का समर्थन उनके साथ है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहने का कोई औपचारिक फैसला नहीं हुआ है।

खरगे का बयान और आंतरिक संदेश

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में कहा था कि कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर जो भ्रम है, वह स्थानीय स्तर पर है, न कि पार्टी हाईकमान में। उन्होंने राज्य के नेताओं से आंतरिक मतभेदों की जिम्मेदारी लेने की अपील की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि खरगे ने एक वरिष्ठ नेता के रूप में मार्गदर्शन दिया है।

शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर MGNREGA को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाकर और राज्यों पर 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ डालकर योजना को व्यावहारिक रूप से समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। “यह गरीबों, मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ है। यहां तक कि बीजेपी शासित राज्य भी इस मॉडल को लागू नहीं कर पाएंगे,” उन्होंने कहा।

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