कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि एच.डी. देवेगौड़ा ने एनडीए को मजबूत किया है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर प्रशासनिक विफलता, कर्ज बढ़ने और विकास कार्य ठप होने के आरोप लगाए और उम्मीदवार चयन को सही बताया।
बेगंलुरु: कर्नाटक में आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने पार्टी के उम्मीदवार चयन का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी ने योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जिससे संगठन में संतोष का माहौल है।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी नेतृत्व ने सभी उम्मीदवारों का चयन उनकी संगठनात्मक क्षमता और लंबे अनुभव को देखते हुए किया है।
देवगौड़ा को लेकर बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा (H. D. Deve Gowda) के राज्यसभा नामांकन को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयेंद्र ने कहा कि देवगौड़ा ने राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाई है और उन्होंने NDA (National Democratic Alliance) को मजबूत करने में भी योगदान दिया है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य स्तर पर उनके नाम पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई थी और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अन्य उम्मीदवारों को अवसर दिया गया है।
कांग्रेस पर विकास और वित्तीय प्रबंधन को लेकर हमला
बीजेपी नेता ने राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में विकास कार्यों की गति धीमी रही है और सरकार का ध्यान प्रशासनिक विवादों पर अधिक केंद्रित रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे वित्तीय स्थिति गंभीर होती जा रही है।
![]()
उम्मीदवारों के चयन पर पार्टी का रुख
बीजेपी ने राज्यसभा के लिए प्रोफेसर एम. नागराज को उम्मीदवार बनाया है, जबकि विधान परिषद चुनावों के लिए लिंगराज पाटिल और रघु कौतील्या को मैदान में उतारा गया है।
पार्टी का कहना है कि इन सभी उम्मीदवारों ने लंबे समय तक संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम किया है और उनकी भूमिका पार्टी विस्तार में महत्वपूर्ण रही है।
समुदाय और संगठनात्मक अनुभव पर जोर
बीजेपी नेतृत्व ने कहा कि एम. नागराज का संबंध कुरुबा समुदाय से है और उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में सक्रिय भूमिका निभाई है।
वहीं लिंगराज पाटिल ने जिला और राज्य स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाली हैं, जबकि रघु कौतील्या शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं।
सुमलता अंबरीश को लेकर भी संकेत
बीजेपी नेता ने पूर्व सांसद सुमलता अंबरीश (Sumalatha Ambareesh) का जिक्र करते हुए कहा कि उनका नाम राज्यसभा के लिए विचाराधीन था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पार्टी ने पहले भी उन्हें मांड्या से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया था, जहां उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की थी।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया और पलटवार
दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी और जेडीएस पर पलटवार करते हुए कहा कि देवगौड़ा जैसे वरिष्ठ नेता के साथ राजनीतिक व्यवहार पर सवाल उठते हैं।
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने इसे “जनता के साथ विश्वासघात” करार दिया, जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी-जेडीएस गठबंधन की आलोचना की।
कर्नाटक में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर चल रही बयानबाज़ी केवल सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है।
NDA और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है।









