सोना पप्पू केस: ED ने तृणमूल नेता श्रेया पांडे से की पूछताछ, जमीन घोटाले और सिंडिकेट कनेक्शन की जांच तेज

कोलकाता में ED ने तृणमूल नेता श्रेया पांडे से सोना पप्पू सिंडिकेट केस में पूछताछ की। भूमि घोटाला, जबरन वसूली और सिंडिकेट नेटवर्क की जांच की जा रही है ,

ED ने कोलकाता में तृणमूल नेता श्रेया पांडे से सोना पप्पू सिंडिकेट केस में पूछताछ की है भूमि घोटाला और जबरन वसूली के आरोपों की जांच में उनका नाम डिजिटल डिवाइस की जांच से सामने आया है जारी कार्रवाई चल

कोलकाता: कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े सिंडिकेट और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता Shreya Pandey से पूछताछ की है। यह मामला कथित तौर पर “सोना पप्पू” नामक प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़े सिंडिकेट नेटवर्क, जमीन धोखाधड़ी, वसूली और धमकी जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित बताया जा रहा है।

यह पूछताछ कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में हुई, जहां ED ने इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक और डिजिटल जांच के तहत कई लोगों को रडार पर रखा हुआ है।

एक दिन पहले ही ED दफ्तर पहुंचीं श्रेया पांडे

जानकारी के अनुसार, श्रेया पांडे को पहले मंगलवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह एक दिन पहले ही सोमवार को ED कार्यालय पहुंच गईं। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला जांच प्रक्रिया के दौरान सामने आए डिजिटल सबूतों से जुड़ा है।

ED सूत्रों का दावा है कि मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच में कुछ ऐसे संकेत मिले, जिनमें श्रेया पांडे का नाम सामने आया। इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया।

हालांकि, श्रेया पांडे ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वह स्वेच्छा से जांच एजेंसी के सामने पेश हुई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सोमवार के लिए कोई आधिकारिक समन नहीं मिला था।

सोना पप्पू सिंडिकेट केस क्या है?

यह पूरा मामला कथित रूप से एक बड़े सिंडिकेट नेटवर्क से जुड़ा है, जिसका संचालन दक्षिण कोलकाता के कासबा और बालीगंज जैसे इलाकों में जमीन से जुड़े अवैध कारोबार, धमकी और वसूली के जरिए किया जाता था।

इस केस का मुख्य नाम Biswajit Poddar (Sona Pappu) बताया जा रहा है, जिसे कथित रूप से “सोना पप्पू” के नाम से जाना जाता है। उस पर जमीन कब्जा, वसूली और आपराधिक धमकी जैसे कई आरोप हैं।

ED के अनुसार, उसके खिलाफ कई FIR दर्ज हैं और वह लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर था।

जमीन धोखाधड़ी और वसूली के गंभीर आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क पर जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, अवैध कब्जा और व्यापारियों से वसूली के आरोप हैं। आरोप यह भी है कि इस सिंडिकेट ने प्रभावशाली लोगों के जरिए इलाके में दबदबा बनाया हुआ था।

ED की जांच में सामने आया है कि कुछ कारोबारियों और राजनीतिक संपर्कों के जरिए इस नेटवर्क को संरक्षण मिलने की आशंका है। इसी सिलसिले में कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

कारोबारी और सहयोगियों की भूमिका की जांच

इस मामले में पहले ही कई लोगों की जांच हो चुकी है। कारोबारी Joy Kamdar को गिरफ्तार किया जा चुका है। ED का कहना है कि उनके घर से जमीन से जुड़े दस्तावेज, नकदी और महंगी गाड़ियों से संबंधित सबूत बरामद हुए हैं।

सोना पप्पू केस: ED ने तृणमूल नेता श्रेया पांडे से की पूछताछ, जमीन घोटाले और सिंडिकेट कनेक्शन की जांच तेज

इसके अलावा Kalyan Shukla से भी पूछताछ की गई है, जिनके साथ श्रेया पांडे के करीबी संबंध होने की बात सामने आई है।

राजनीतिक और सामाजिक कनेक्शन की जांच

ED सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कुछ राजनीतिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में इन लोगों की मौजूदगी रही है। आरोप है कि सोना पप्पू से जुड़े लोग विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के संपर्क में भी रहे हैं।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह नेटवर्क केवल अपराधियों तक सीमित था या इसमें किसी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक मिलीभगत भी शामिल थी।

डिजिटल सबूतों से बढ़ी जांच की दिशा

इस पूरे केस में सबसे महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल डिवाइस से मिले सबूत हैं। ED का दावा है कि मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

इन्हीं सबूतों के आधार पर नए नाम सामने आए हैं और पूछताछ का दायरा बढ़ाया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि यह मामला सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित अपराध की संभावना भी है।

सोना पप्पू का आपराधिक इतिहास

सोना पप्पू, यानी Biswajit Poddar (Sona Pappu), पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। फरवरी में रवींद्र सरोवर क्षेत्र में हुई झड़पों के बाद वह फरार हो गया था, हालांकि वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा।

अप्रैल में ED ने उसके घर पर छापेमारी की थी, जिसमें नकदी, लग्जरी वाहन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए थे। बाद में 18 मई को वह खुद ED के सामने पेश हुआ और उसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच का बढ़ता दायरा

ED ने संकेत दिया है कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है और आगे और भी गिरफ्तारियां और पूछताछ हो सकती हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित सिंडिकेट में कितने लोग शामिल थे और इसकी फंडिंग कैसे होती थी।

कई FIR दर्ज होने के बाद यह मामला अब एक बड़े संगठित आर्थिक अपराध की जांच में बदलता जा रहा है।

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