अभिनेता-निर्देशक कुणाल खेमू की फिल्म ‘वाइब’ का सिनेमाघरों में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। एक बातचीत के दौरान कुणाल ने फिल्म के प्रदर्शन और ‘पैन-इंडिया’ टैग को लेकर अपनी राय साझा की।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: अभिनेता और निर्देशक कुणाल खेमू ने हालिया बातचीत में भारतीय सिनेमा में फिल्मों की सफलता और उन्हें दिए जाने वाले 'पैन-इंडिया' टैग को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने अपनी फिल्म 'वाइब' के प्रदर्शन से लेकर विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी 'हनुमान अंश' की असाधारण सफलता तक पर बात की।
कुणाल के मुताबिक, किसी फिल्म को सफल बनाने का कोई निश्चित फॉर्मूला नहीं होता और कई बार कहानी की ताकत ही दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लाती है।
'हनुमान अंश' को लेकर क्या बोले कुणाल खेमू?
कुणाल खेमू ने बातचीत के दौरान कम बजट में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' की सफलता का उदाहरण दिया। उनके अनुसार, फिल्म ने जिस तरह दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई है, उसे सिर्फ 'पैन-इंडिया' सफलता कहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह फिल्म अब केवल भारत के अलग-अलग हिस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों तक पहुंच रही है।
कुणाल का मानना है कि किसी फिल्म की लोकप्रियता को सिर्फ उसके कारोबार या भाषा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। अगर कोई कहानी देश की सीमाओं से बाहर जाकर लोगों से जुड़ती है, तो उसकी पहुंच कहीं ज्यादा व्यापक हो जाती है। बताया गया है कि लगभग 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई 'हनुमान अंश' ने 400 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। इस तरह फिल्म का प्रदर्शन कम बजट वाली फिल्मों की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।
'पैन-इंडिया' फिल्म का कोई तय फॉर्मूला नहीं
कुणाल खेमू ने 'पैन-इंडिया' शब्द के इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, किसी फिल्म को पैन-इंडिया बनाने के लिए कोई निश्चित फॉर्मूला मौजूद नहीं है। यह शब्द काफी हद तक फिल्म के कारोबार और अलग-अलग क्षेत्रों में उसके प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्ममेकिंग को केवल बाजार की रणनीति या किसी लोकप्रिय ट्रेंड के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। कई बार ऐसी फिल्में भी दर्शकों के बीच बड़ी सफलता हासिल कर लेती हैं, जिनके लिए निर्माताओं ने किसी स्थापित फार्मूले का इस्तेमाल नहीं किया होता।
कहानी को केंद्र में रखना जरूरी

फिल्ममेकिंग को लेकर कुणाल खेमू ने कहा कि एक कलाकार और फिल्मकार का सफर हमेशा आसान नहीं होता। इसमें असफलताएं, अप्रत्याशित परिणाम और कई तरह की चुनौतियां आती हैं। ऐसे में जब कोई फिल्म बिना किसी तय मानदंड के दर्शकों का दिल जीतती है, तो यह कलाकारों के लिए बेहद उत्साह बढ़ाने वाला अनुभव होता है।
उनके मुताबिक, कुछ फिल्में अपनी कहानी और भावनाओं के दम पर दर्शकों से जुड़ती हैं। ऐसी फिल्मों की सफलता यह बताती है कि अच्छी कहानी के लिए हमेशा किसी स्थापित व्यावसायिक फॉर्मूले का सहारा लेना जरूरी नहीं है। कुणाल की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पैन-इंडिया सिनेमा का बाजार लगातार चर्चा में है।
अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों को देशभर में रिलीज करने का चलन बढ़ा है, लेकिन कुणाल का मानना है कि आखिरकार दर्शकों का जुड़ाव ही किसी फिल्म की वास्तविक ताकत तय करता है।
कैसी रही 'वाइब' की बॉक्स ऑफिस कमाई?
कुणाल खेमू की फिल्म 'वाइब' 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में कुणाल के साथ प्रीति जिंटा और स्पर्श श्रीवास्तव अहम भूमिकाओं में नजर आए। हालांकि, सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 'वाइब' ने दुनियाभर में करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जबकि भारत में इसका कलेक्शन लगभग 18 करोड़ रुपये बताया गया है। फिल्म के प्रदर्शन की तुलना में 'हनुमान अंश' की सफलता ने कुणाल के सामने एक अलग उदाहरण पेश किया है।











