भारत के पूर्व IMF कार्यकारी निदेशक के.वी. सुब्रमण्यम ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें 2027 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता मिलने को वैश्विक वित्तीय नेतृत्व में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया है।
नई दिल्ली: पाकिस्तान को वर्ष 2027 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता मिलने के बाद वैश्विक वित्तीय नेतृत्व को लेकर बहस शुरू हो गई है। पाकिस्तान सरकार ने इस नियुक्ति को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। वहीं, भारत के पूर्व IMF कार्यकारी निदेशक के.वी. सुब्रमण्यम ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से औपचारिक और प्रक्रियात्मक है। इससे किसी देश को वित्तीय संस्थानों के फैसलों पर अतिरिक्त अधिकार नहीं मिल जाता।
पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को बैंकॉक में आयोजित IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान हुई घोषणा को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था। पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा को वर्ष 2027 के लिए दोनों संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का अध्यक्ष बनाया गया है। पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी 1953 के बाद पहली बार मिली है।
‘यह प्रोटोकॉल है, पावर नहीं’
के.वी. सुब्रमण्यम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान 2027 में IMF और विश्व बैंक की वार्षिक पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेगा, लेकिन इस भूमिका को वैश्विक वित्तीय शक्ति के रूप में देखना सही नहीं है। उनके अनुसार, यह अध्यक्षता हर साल बदलती है और इसका मुख्य उद्देश्य बैठकों की कार्यवाही का संचालन करना है।
सुब्रमण्यम ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस वर्ष यह जिम्मेदारी पैराग्वे के पास है, जबकि 2025 में काबो वर्डे ने यह भूमिका निभाई थी। उन्होंने भारत की G20 और BRICS अध्यक्षताओं के साथ पाकिस्तान की आगामी भूमिका की तुलना को भी उचित नहीं माना।
उनकी दलील है कि G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत को वैश्विक आर्थिक सहयोग के एजेंडे को आगे बढ़ाने का अवसर मिला था। इसी तरह BRICS की अध्यक्षता उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत करने का मंच प्रदान करती है। इसके मुकाबले IMF और विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता मुख्य रूप से संस्थागत प्रक्रिया से जुड़ी होती है।
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पाकिस्तान ने इसे क्यों बताया ऐतिहासिक उपलब्धि?
पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 2027 की अध्यक्षता से देश को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और विकास संबंधी चर्चाओं में अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान विकासशील देशों की चिंताओं को सामने रखने, सदस्य देशों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने और विकास वित्त की उपलब्धता से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का प्रयास करेगा।
पाकिस्तान के लिए यह नियुक्ति कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उसे वैश्विक आर्थिक नीति से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इस भूमिका के महत्व और उसकी वास्तविक शक्तियों के बीच अंतर करना जरूरी है।
क्या अध्यक्षता से IMF के कर्ज पर मिलेगा नियंत्रण?
IMF और विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स दोनों संस्थानों के सर्वोच्च शासी निकाय हैं। इन बोर्डों में सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। लेकिन संस्थानों के रोजमर्रा के संचालन और अधिकांश नीतिगत फैसलों की जिम्मेदारी उनके कार्यकारी बोर्डों तथा संबंधित प्रबंधन के पास होती है।
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक की अध्यक्षता करने से पाकिस्तान को अतिरिक्त वोटिंग अधिकार, कर्ज मंजूर करने की विशेष शक्ति या IMF कार्यक्रमों की शर्तें बदलने का अधिकार नहीं मिलेगा। अध्यक्ष की भूमिका मुख्य रूप से बैठकों की कार्यवाही को व्यवस्थित करने और सदस्य देशों के बीच संवाद को सुविधाजनक बनाने तक सीमित रहती है।
यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए IMF के वित्तीय कार्यक्रमों पर निर्भर रहा है। ऐसे में अध्यक्षता मिलने को आर्थिक संकट से बाहर निकलने या वित्तीय संस्थानों पर नियंत्रण हासिल करने के बराबर नहीं माना जा सकता।










