अमेरिका में महंगाई, ईरान युद्ध और विदेश नीति को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता पर दबाव बढ़ रहा है। सर्वेक्षणों में कम समर्थन के बीच कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार उनसे दूरी बना रहे हैं, जिससे मिडटर्म चुनाव की चुनौती बढ़ सकती है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अगले मिडटर्म चुनाव से पहले राजनीतिक चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। महंगाई, ईरान के साथ युद्ध और विदेश नीति को लेकर जनता की नाराजगी उनके प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। अलग-अलग जनमत सर्वेक्षणों में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट के संकेत मिले हैं। इसी बीच, उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ उम्मीदवार भी चुनावी फायदे के लिए उनकी नीतियों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मतदान होता है। इनके नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं कि राष्ट्रपति को कांग्रेस में अपने प्रस्तावों को पारित कराने के लिए कितना राजनीतिक समर्थन मिलेगा।
हालांकि, मौजूदा सर्वेक्षणों और उम्मीदवारों की रणनीतियों के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि रिपब्लिकन पार्टी चुनाव हार जाएगी। चुनाव परिणाम मतदाताओं की प्राथमिकताओं, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और चुनावी मुकाबलों पर भी निर्भर करेंगे।
ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति के कामकाज को लेकर सामने आए विभिन्न सर्वेक्षणों में समर्थन का स्तर अलग-अलग रहा है। NBC न्यूज के सर्वे में 34 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के कामकाज का समर्थन किया। वॉशिंगटन पोस्ट और ABC न्यूज के सर्वे में यह आंकड़ा 33 प्रतिशत, जबकि फॉक्स न्यूज के सर्वे में 36 प्रतिशत बताया गया।
प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण में ट्रंप को 30 प्रतिशत समर्थन मिलने का दावा किया गया है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति के सामने जनसमर्थन बनाए रखने की चुनौती है।
ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी उनकी अप्रूवल रेटिंग में गिरावट आई थी। जनवरी 2021 में अमेरिकी संसद भवन पर उनके समर्थकों की हिंसक भीड़ के हमले के बाद उनकी लोकप्रियता काफी नीचे चली गई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उस समय उनकी रेटिंग 34 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
हालांकि, अलग-अलग सर्वेक्षणों के नतीजों की सीधे तुलना करते समय उनकी तारीख, नमूने और सवाल पूछने के तरीके को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी एक सर्वे का आंकड़ा पूरे अमेरिकी मतदाता वर्ग की राय का अंतिम प्रतिनिधित्व नहीं करता।
महंगाई बनी ट्रंप प्रशासन की बड़ी चुनौती
2024 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने महंगाई कम करने और अमेरिकी परिवारों के रोजमर्रा के खर्च को घटाने का वादा किया था। लेकिन बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता उनके राजनीतिक समर्थन को प्रभावित कर सकती है।
दिए गए विवरण के मुताबिक, अंडे, दूध, ब्रेड, मांस और सब्जियों जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आवास का खर्च भी परिवारों के बजट पर दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन तथा ऊर्जा पर होने वाला खर्च बढ़ सकता है।
यदि वेतन में हुई वृद्धि की तुलना में रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में परिवारों को भोजन, किराया, परिवहन और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है।
रॉयटर्स-इप्सोस के सर्वेक्षण के हवाले से बताया गया है कि 78 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वस्तुओं की कीमतें उनकी आय से अधिक तेजी से बढ़ रही हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 65 प्रतिशत अमेरिकी महंगाई के लिए ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं।
ये आंकड़े सही पाए जाने पर राष्ट्रपति के सामने मौजूद आर्थिक चुनौती को रेखांकित करते हैं। हालांकि, महंगाई पर वैश्विक ऊर्जा बाजार, आपूर्ति व्यवस्था और अन्य आर्थिक परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान युद्ध से बढ़ सकता है आर्थिक दबाव
ईरान के साथ युद्ध ट्रंप प्रशासन के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है। संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ने और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका है।
अमेरिका में ईंधन की कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने पर वस्तुओं की ढुलाई और कारोबार के खर्च में भी वृद्धि हो सकती है। इसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
NBC न्यूज के सर्वेक्षण में केवल 29 प्रतिशत लोगों ने ईरान युद्ध से निपटने के ट्रंप के तरीके का समर्थन किया। वहीं, फॉक्स न्यूज के सर्वे में 64 प्रतिशत लोगों ने उनकी विदेश नीति पर असहमति जताई।
हालांकि, रिपब्लिकन मतदाताओं के बीच ट्रंप को समर्थन मिलने के संकेत भी हैं। एसोसिएटेड प्रेस के सर्वेक्षण के मुताबिक, 69 प्रतिशत रिपब्लिकन मतदाताओं ने उनकी विदेश नीति का समर्थन किया।
इससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्रपति की लोकप्रियता का आकलन करते समय सभी मतदाताओं और उनकी पार्टी के समर्थकों की राय को अलग-अलग देखना जरूरी है। ईरान युद्ध का मिडटर्म चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह संघर्ष की अवधि, आर्थिक प्रभाव और सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप से क्यों बना रहे दूरी?
ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट के संकेतों के बीच उनकी पार्टी के कुछ उम्मीदवार अपनी चुनावी रणनीति बदलते दिखाई दे रहे हैं। रॉयटर्स की अक्टूबर में प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि कड़े मुकाबले वाली 62 सीटों में से 41 सीटों पर रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप की कुछ नीतियों से असहमति जता रहे हैं या उनसे दूरी बनाए हुए हैं।
इन उम्मीदवारों की रणनीति का उद्देश्य उन मतदाताओं को आकर्षित करना हो सकता है, जो किसी एक पार्टी के स्थायी समर्थक नहीं हैं। ऐसे मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, खासकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहां दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला कड़ा हो।
हालांकि, ट्रंप से दूरी बनाना रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए आसान फैसला नहीं है। यदि वे राष्ट्रपति की नीतियों का खुलकर विरोध करते हैं, तो पार्टी के कट्टर समर्थकों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, ट्रंप के साथ पूरी तरह खड़े रहने से उन मतदाताओं का समर्थन खोने का जोखिम है, जो उनकी आर्थिक या विदेश नीति से असहमत हैं।
इस तरह रिपब्लिकन उम्मीदवारों के सामने अपनी पार्टी के आधार को बनाए रखने और स्वतंत्र मतदाताओं तक पहुंचने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
कांग्रेस में बहुमत खोने पर ट्रंप को क्या नुकसान होगा?
यदि डेमोक्रेटिक पार्टी मिडटर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए कानून पारित कराना और बजट संबंधी फैसले लागू करना अधिक कठिन हो सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस संघीय बजट, सरकारी खर्च और कानून निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कांग्रेस के किसी सदन में विपक्ष का बहुमत होने पर राष्ट्रपति की नीतियों पर अधिक बहस, जांच और राजनीतिक निगरानी हो सकती है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रपति के सभी प्रस्ताव अपने आप रुक जाएंगे। किसी विधेयक का भविष्य उसके स्वरूप, दोनों सदनों में समर्थन और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।
रिपब्लिकन पार्टी के पास भी कुछ चुनावी फायदे हो सकते हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के पास प्रचार अभियान के लिए मजबूत वित्तीय संसाधन हैं। इसके अलावा, डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की नीतियों को लेकर कुछ मतदाताओं की चिंताएं भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती हैं।
मिडटर्म चुनाव से पहले क्या होगा निर्णायक?
ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए आने वाले समय में महंगाई, ईंधन की कीमतें, रोजगार और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे। मतदाता यह आकलन कर सकते हैं कि सरकार ने आर्थिक वादों को किस हद तक पूरा किया है और विदेश नीति से देश को क्या लाभ या नुकसान हुआ है।
दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए भी जरूरी होगा कि वह मतदाताओं के सामने विश्वसनीय आर्थिक और राजनीतिक विकल्प पेश करे।
फिलहाल, सर्वेक्षण ट्रंप के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल के संकेत देते हैं, लेकिन मिडटर्म चुनाव का अंतिम परिणाम पहले से तय नहीं है। आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था, युद्ध की स्थिति और चुनाव प्रचार की दिशा अमेरिकी राजनीति की तस्वीर बदल सकती है।










