क्या AI इंसानी दिमाग पर भारी पड़ेगा? Neuralink इंजीनियर के बयान से बहस तेज

Neuralink के इंजीनियर Danish Hussain ने कहा कि सोशल मीडिया के AI एल्गोरिद्म यूजर्स की सोच और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

ब्रेन-टेक कंपनी Neuralink के एक वरिष्ठ इंजीनियर ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के AI एल्गोरिद्म लोगों की सोच और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। उनका कहना है कि ये सिस्टम यूजर्स का ध्यान नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं, जिससे स्वतंत्र सोच और डिजिटल आदतों पर असर पड़ सकता है।

AI Algorithms Impact: ब्रेन-टेक कंपनी Neuralink के सर्जरी मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रमुख Danish Hussain ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए चेतावनी दी है कि आधुनिक AI एल्गोरिद्म लोगों की सोच और व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार दुनिया भर में अरबों डॉलर से विकसित ये एल्गोरिद्म यूजर्स का ध्यान लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए काम करते हैं। इस कारण सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला कंटेंट अक्सर यूजर की पसंद के अनुसार चुना जाता है, जिससे जानकारी का दायरा सीमित हो सकता है और स्वतंत्र सोच पर असर पड़ने की आशंका बढ़ती है।

AI एल्गोरिद्म को लेकर इंजीनियर की चेतावनी

Danish Hussain, जो Neuralink में सर्जरी मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रमुख हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में लोग ऐसे एल्गोरिद्म से घिरे हुए हैं जिनके पीछे भारी निवेश और जटिल तकनीक काम कर रही है।

उनके अनुसार इन एल्गोरिद्म का मुख्य उद्देश्य यूजर का ध्यान अधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना होता है। इसी कारण सिस्टम लगातार वही कंटेंट दिखाता है जो यूजर को पसंद आता है, जिससे धीरे-धीरे एक डिजिटल इको-सिस्टम बन जाता है जो सोच को सीमित कर सकता है।

सोशल मीडिया एल्गोरिद्म कैसे बदलते हैं व्यवहार

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद एल्गोरिद्म यह तय करते हैं कि किसी यूजर को कौन-सा कंटेंट पहले दिखेगा और कौन-सा नहीं। यही वजह है कि यूजर अक्सर उसी तरह की जानकारी और विचारों के बीच रह जाता है जो उसकी पसंद से मेल खाते हैं।

कई शोधों में यह भी सामने आया है कि ऐसे एल्गोरिद्म लंबे समय तक स्क्रीन पर रहने की आदत बढ़ा सकते हैं। इसके चलते ध्यान की कमी, डिजिटल लत और बच्चों में Attention‑deficit/hyperactivity disorder यानी ADHD जैसे लक्षण बढ़ने की आशंका भी जताई जाती रही है।

क्या है Neuralink का ब्रेन-चिप प्रोजेक्ट

ब्रेन-टेक कंपनी Neuralink की स्थापना टेक उद्यमी Elon Musk ने की थी। यह कंपनी ऐसी तकनीक विकसित कर रही है जिसे Brain‑Computer Interface कहा जाता है। इसका उद्देश्य इंसानी दिमाग को सीधे कंप्यूटर से जोड़ना है, ताकि लोग केवल अपने विचारों के जरिए डिजिटल डिवाइस को नियंत्रित कर सकें।

यह तकनीक खास तौर पर लकवे या गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए मददगार हो सकती है। हालिया अपडेट के मुताबिक कंपनी ऐसी तकनीक विकसित कर रही है जिसमें दिमाग की बाहरी सुरक्षा परत dura mater को हटाए बिना ही चिप को इम्प्लांट किया जा सके। इसे ब्रेन-इंटरफेस तकनीक में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a comment