परिचय बहुत समय पहले की बात है एक सुंदर से गाँव में एक प्यारी सी बच्ची रहती थी। वह इतनी भोली और चंचल थी कि गाँव के सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे। उसके जन्मदिन पर उसकी नानी ने उसे मखमल की एक लाल रंग की टोपी और चोगा बनाकर दिया था। वह उसे इतना पसंद आया कि वह उसे हर समय पहनती थी। इसलिए धीरे-धीरे सब लोग उसे लाल परी कहकर पुकारने लगे। वह अपनी माँ की लाडली थी लेकिन उसे जंगल की दुनिया और वहाँ छिपे खतरों का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था।
विस्तृत कहानी
एक दिन लाल परी की माँ ने उसे अपने पास बुलाया और बताया कि जंगल के पार रहने वाली उसकी नानी बहुत बीमार हैं। माँ ने एक टोकरी में ताजे फल केक और कुछ दवाइयाँ रखीं और लाल परी को देते हुए कहा कि वह जाकर यह सामान नानी को दे आए। घर से निकलते समय माँ ने उसे सख्त हिदायत दी कि वह रास्ते में कहीं न रुके और किसी भी अनजान व्यक्ति से बात न करे क्योंकि जंगल में खतरनाक जानवर हो सकते हैं। लाल परी ने सिर हिलाया और खुशी-खुशी जंगल के रास्ते पर चल पड़ी।
जंगल बहुत खूबसूरत था। रास्ते में रंग-बिरंगे फूल खिले थे और पक्षी चहचहा रहे थे। लाल परी अपनी माँ की चेतावनी भूल गई और फूलों को निहारने लगी। तभी झाड़ियों के पीछे से एक बड़ा और चालाक भेड़िया बाहर आया। भेड़िये ने लाल परी को देखा और उसके मन में लालच आ गया। उसने बहुत ही मीठी आवाज़ में लाल परी से पूछा कि वह इतनी सुबह-सुबह कहाँ जा रही है।
लाल परी बहुत मासूम थी। उसने सोचा कि यह जानवर तो बहुत ही मित्रवत लग रहा है। उसने भेड़िये को बता दिया कि वह अपनी बीमार नानी के लिए खाना लेकर जा रही है और उनका घर जंगल के दूसरे छोर पर तीन बड़े ओक के पेड़ों के नीचे है। धूर्त भेड़िये ने एक योजना बनाई। उसने लाल परी से कहा कि उसे नानी के लिए कुछ ताजे फूल भी ले जाने चाहिए जिससे वे खुश हो जाएंगी। लाल परी को यह विचार अच्छा लगा और वह फूल चुनने में व्यस्त हो गई।
इस बीच भेड़िया छोटे रास्ते से दौड़ता हुआ नानी के घर पहुँच गया। उसने दरवाजा खटखटाया और अपनी आवाज़ बदलकर कहा कि वह लाल परी है। बीमार नानी ने दरवाजा खोल दिया। भेड़िया तुरंत अंदर कूदा और नानी को डराकर एक अलमारी में बंद कर दिया। फिर उसने नानी का गाउन और चश्मा पहन लिया और बिस्तर पर लेट गया ताकि लाल परी उसे पहचान न सके।
थोड़ी देर बाद लाल परी नानी के घर पहुँची। उसने दरवाजा खुला देखा और अंदर चली गई। जब वह बिस्तर के पास गई तो उसे अपनी नानी कुछ अजीब लगीं। उसने नानी से पूछा कि आज उनके कान इतने बड़े क्यों लग रहे हैं। भेड़िये ने नानी की आवाज़ बनाने की कोशिश करते हुए कहा कि यह उसे बेहतर सुनने के लिए हैं। फिर लाल परी ने पूछा कि उनकी आँखें इतनी बड़ी क्यों हैं। भेड़िये ने कहा कि यह उसे बेहतर देखने के लिए हैं। अंत में लाल परी ने डरते हुए पूछा कि उनके दाँत इतने बड़े और नुकीले क्यों हैं।
इस बार भेड़िये ने अपना नाटक खत्म किया और अपनी असली आवाज़ में गुर्राते हुए कहा कि यह उसे खाने के लिए हैं। लाल परी डर के मारे चिल्लाने लगी। भेड़िया उस पर झपटने ही वाला था कि तभी वहाँ से गुजर रहे एक लकड़हारे ने बच्ची की चीख सुनी। लकड़हारा तुरंत कुल्हाड़ी लेकर घर में घुस आया। उसने देखा कि भेड़िया बच्ची पर हमला कर रहा है।
लकड़हारे ने बिना समय गंवाए भेड़िये को पकड़ लिया और उसे रस्सी से मज़बूती से बांध दिया। उसने अलमारी से नानी को सुरक्षित बाहर निकाला। नानी और लाल परी ने लकड़हारे का धन्यवाद किया। लाल परी को अपनी गलती का बहुत पछतावा हुआ कि उसने अपनी माँ की बात नहीं मानी थी और एक अजनबी पर भरोसा कर लिया था। उसने वादा किया कि अब वह कभी भी रास्ते में अनजान लोगों से बात नहीं करेगी। लकड़हारे ने भेड़िये को जंगल से बहुत दूर छोड़ दिया ताकि वह फिर कभी किसी को परेशान न कर सके।
सीख
इस कहानी से हमें यह महत्वपूर्ण सीख मिलती है कि हमें कभी भी अनजान लोगों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें अपनी निजी जानकारी देनी चाहिए। लाल परी ने अपनी माँ की चेतावनी को नजरअंदाज किया और एक धूर्त भेड़िये से बात की जिसके कारण उसकी और उसकी नानी की जान खतरे में पड़ गई। माता-पिता और बड़े बुजुर्ग जो भी कहते हैं वह हमारी भलाई के लिए ही होता है। बाहरी दुनिया में कई ऐसे लोग होते हैं जो बाहर से मित्रवत दिखते हैं लेकिन उनके इरादे बुरे हो सकते हैं।













