लालू परिवार में बढ़ती दूरियां! साला, समधी, बेटा और अब बेटी तक पहुँची तकरार की कहानी

लालू परिवार में बढ़ती राजनीतिक और पारिवारिक दूरियां सुर्खियों में। रोहिणी आचार्य और बेटियों के घर छोड़ने से परिवारिक तनाव गहराया, राजनीतिक प्रभाव की आशंका।

बिहार की राजनीति में सबसे प्रभावशाली माने जाने वाले लालू प्रसाद यादव के परिवार में कलह की कहानी नई नहीं है। रोहिणी आचार्य के हाल ही में परिवार से दूरी बनाने के बाद एक बार फिर पुराने विवाद सुर्खियों में हैं। साधु यादव, सुभाष यादव, चंद्रिका राय से लेकर तेज प्रताप तक—परिवारिक टकराव वर्षों से जारी रहा है।

Patna: बिहार की राजनीति में लालू यादव का परिवार हमेशा सत्ता, प्रभाव और जनाधार के केंद्र में रहा है, लेकिन इसके साथ ही पारिवारिक विवादों की एक लंबी श्रृंखला भी जुड़ी रही है। हाल ही में रोहिणी आचार्य द्वारा परिवार से संबंध तोड़ने के फैसले ने ध्यान फिर उसी पुराने अध्याय पर ला दिया है, जो वर्षों से समय-समय पर सामने आता रहा है। बिहार में कभी साधु यादव और सुभाष यादव जैसे साले–समधी परिवार से अलग हुए, तो कभी तेज प्रताप यादव जैसे बेटे ने पिता और पार्टी नेतृत्व से खुलकर नाराज़गी जताई। साधु यादव ने तो खुले मंच से लालू परिवार पर संगठन को ‘निजी संपत्ति’ की तरह चलाने का आरोप तक लगाया था। 

समधी से बढ़ी राजनीतिक दूरी

तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय की शादी टूटने के बाद लालू परिवार और समधी चंद्रिका राय के रिश्ते पूरी तरह बिगड़ गए। तलाक विवाद के बीच चंद्रिका राय ने आरजेडी छोड़कर जदयू का दामन थाम लिया और बाद में एनडीए के लिए प्रचार किया। 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार का साथ देकर यह स्पष्ट कर दिया कि पारिवारिक मतभेद अब सियासी टकराव में बदल चुके हैं।

तेज प्रताप की खुली बगावत

2025 में तेज प्रताप यादव से जुड़ा विवाद सामने आने पर लालू यादव ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद तेज प्रताप ने परिवार पर दबाव में निर्णय लेने का आरोप लगाया और सोशल मीडिया पर खुलकर नाराजगी जताई। अंततः उन्होंने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) का गठन किया, जिससे लालू परिवार का आंतरिक संघर्ष पहली बार खुले राजनीतिक विभाजन में बदल गया।

परिवारिक दरार का सबसे भावुक अध्याय

रोहिणी आचार्य का परिवार छोड़ने का फैसला लालू यादव परिवार की तकरारों में सबसे संवेदनशील मोड़ बनकर सामने आया है। X पर साझा की गई उनकी भावुक पोस्ट में उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने और परिवार से नाता तोड़ने की घोषणा की। रोहिणी ने लिखा कि यह कदम उन्होंने दबाव में आकर उठाया है और इसके लिए वे स्वयं को जिम्मेदार मानती हैं। उनके शब्दों में वह पीड़ा साफ झलकी, जो वर्षों से पारिवारिक राजनीति में उलझे सदस्यों को सहनी पड़ी है।

पोस्ट के बाद रोहिणी ने लगातार कई खुलासे किए। उन्होंने बताया कि उन्हें बदनाम किया गया, अपमानजनक नामों से पुकारा गया और उनके अंगदान को भी संदेह के दायरे में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के भीतर उन्हें आर्थिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी कटघरे में खड़ा किया गया। उनकी पोस्ट ने बिहार की राजनीति और लालू परिवार के भीतर चल रहे तनाव को सार्वजनिक मंच पर एक बार फिर उजागर कर दिया।

बहनों का घर छोड़ने का सिलसिला

रोहिणी के फैसले के तुरंत बाद लालू परिवार की तीन और बेटियां रागिनी, चंदा और राजलक्ष्मी ने भी पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड आवास खाली कर दिया। तीनों अपने बच्चों के साथ दिल्ली रवाना हो गईं, जिससे परिवारिक परिस्थितियों में बढ़ते तनाव की पुष्टि होती है। यह कदम बताता है कि घर के भीतर स्थिति सामान्य नहीं है और परिवार के सदस्यों में असहजता गहराती जा रही है।

उनके पटना छोड़ने के बाद अब आधिकारिक आवास में केवल लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती ही रह गए हैं। परिवार के भीतर हो रहे इस विभाजन ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं l  क्या लालू परिवार भीतर से इतनी गंभीर टूट का सामना कर रहा है कि इसके राजनीतिक प्रभाव भी दिखेंगे? या परिवार भविष्य में किसी सुलह की दिशा में लौटेगा?

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