Skin Cancer: कौन जोखिम में है और इसके लक्षण क्या हैं?

Skin Cancer: कौन जोखिम में है और इसके लक्षण क्या हैं?

स्किन कैंसर त्वचा के सेल्स में होने वाला गंभीर और तेजी से बढ़ने वाला कैंसर है। UV किरणों के अत्यधिक संपर्क, कमजोर इम्यूनिटी और पारिवारिक इतिहास इसके मुख्य कारण हैं। डॉ. सौम्या सचदेवा के अनुसार, समय पर पहचान और इलाज से खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित त्वचा जांच और सुरक्षा उपाय इसे रोकने में मदद करते हैं।

Skin Cancer Risk: स्किन कैंसर एक तेजी से बढ़ने वाला गंभीर रोग है, जो त्वचा के सेल्स को प्रभावित करता है। भारत में विशेषज्ञों के अनुसार, इसका खतरा उन लोगों में अधिक होता है जिनकी त्वचा गोरी हो, जो लंबे समय तक धूप में रहते हों, बुजुर्ग हों या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हो। प्रमुख लक्षणों में त्वचा पर नया उभार, तिल का रंग या आकार बदलना, खुजली और घाव का न भरना शामिल हैं। समय पर पहचान और त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क इस रोग से बचाव में मदद करता है।

त्वचा पर खतरे की चेतावनी

स्किन कैंसर त्वचा के सेल्स में होने वाला गंभीर और तेजी से बढ़ने वाला कैंसर है। मैक्स अस्पताल की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सौम्या सचदेवा के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण UV किरणों के अत्यधिक संपर्क और धूप में लंबे समय तक रहना है। बेसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और मेलानोमा—ये तीन मुख्य प्रकार हैं, जिनमें मेलानोमा सबसे खतरनाक होता है। समय पर पहचान और इलाज से जोखिम कम किया जा सकता है।

किसे होता है ज्यादा खतरा?

स्किन कैंसर का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी त्वचा गोरी है, जिनका परिवार इतिहास है, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों में। अक्सर शरीर के ऐसे हिस्से प्रभावित होते हैं जो धूप के संपर्क में रहते हैं चेहरा, गर्दन, हाथ, भुजाएं और पैर। नियमित त्वचा जांच से तिल या नई ग्रोथ में बदलाव तुरंत पकड़ा जा सकता है।

मुख्य लक्षण और पहचान

लक्षणों में त्वचा पर नया उभार, घाव का न भरना, किसी तिल का रंग या आकार बदलना, खुजली या खून आना शामिल है। मेलानोमा के संकेतों में तिल का असमान आकार, किनारों का धुंधला होना, रंग में बदलाव या अचानक बड़ा होना शामिल है। ऐसे किसी भी बदलाव पर तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क जरूरी है।

सावधानी और बचाव के तरीके

धूप में निकलते समय SPF 30 या अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं। दोपहर 11 बजे से 3 बजे तक धूप से बचें और टोपी, सनग्लासेस व फुल-स्लीव कपड़े पहनें। टैनिंग बेड का उपयोग न करें और बच्चों की त्वचा की विशेष देखभाल करें। स्वास्थ्यवर्धक आहार लें और इम्यूनिटी मजबूत रखें। त्वचा पर कोई असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

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