पीरियड्स से पहले हार्मोनल बदलाव के कारण पेट फूलना, स्तनों में संवेदनशीलता, मूड स्विंग, थकान, सिरदर्द और खाने की इच्छा बदलना आम है। लेकिन तेज दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव या गंभीर मूड बदलाव होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
Women's Health Tilps: महिलाओं के शरीर में मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले कई तरह के बदलाव महसूस होना आम बात है। किसी को पेट फूला हुआ लगता है, किसी के स्तनों में संवेदनशीलता बढ़ जाती है, तो कुछ महिलाओं को मूड में बदलाव, थकान, सिरदर्द या किसी खास तरह का खाना खाने की इच्छा होने लगती है। कई बार ये लक्षण इतने अलग महसूस होते हैं कि महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि नियमित पीरियड्स और सामान्य जांच के बावजूद शरीर ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका एक बड़ा कारण मासिक चक्र के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं। हालांकि हर महिला में इन बदलावों की तीव्रता और लक्षण अलग हो सकते हैं। आमतौर पर हल्के और कुछ समय के लिए रहने वाले लक्षण चिंता का कारण नहीं होते, लेकिन अगर वे रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें या बहुत ज्यादा गंभीर हो जाएं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
पीरियड्स से पहले हार्मोन में क्या बदलाव होता है?
मासिक धर्म चक्र के अलग-अलग चरणों में शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर बदलता रहता है। ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ता है, जबकि चक्र के अंत में गर्भधारण न होने पर इन हार्मोनों का स्तर तेजी से कम होने लगता है।
इन्हीं उतार-चढ़ावों का असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्मोनल बदलाव मस्तिष्क में मौजूद कुछ रसायनों और न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर मूड, नींद, भूख और ऊर्जा के स्तर पर दिखाई दे सकता है।
यही वजह है कि पीरियड्स शुरू होने से पहले किसी महिला को शारीरिक परेशानी महसूस हो सकती है, जबकि दूसरी महिला को मुख्य रूप से भावनात्मक या मानसिक बदलाव महसूस हों।
कौन-कौन से लक्षण सामान्य माने जाते हैं?
पीरियड्स से पहले दिखाई देने वाले लक्षणों को आमतौर पर प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी PMS से जोड़ा जाता है। इसकी तीव्रता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर इनमें कई तरह के लक्षण शामिल हो सकते हैं।
1. पेट फूलना और भारीपन
पीरियड्स से पहले शरीर में पानी और नमक के संतुलन में बदलाव हो सकता है। इससे पेट या शरीर के दूसरे हिस्सों में सूजन या भारीपन महसूस हो सकता है। कई महिलाओं में पीरियड्स शुरू होने के बाद यह परेशानी अपने आप कम हो जाती है।
2. स्तनों में संवेदनशीलता
हार्मोनल बदलाव के कारण पीरियड्स से पहले स्तनों में दर्द, संवेदनशीलता, भारीपन या भराव महसूस हो सकता है। यह लक्षण भी आमतौर पर मासिक धर्म शुरू होने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाता है।
3. मूड में बदलाव
चिड़चिड़ापन, उदासी, बेचैनी या अचानक मूड बदलना भी कुछ महिलाओं में पीरियड्स से पहले दिखाई दे सकता है। हार्मोनल बदलाव और मस्तिष्क के रसायनों पर इसका प्रभाव इसके संभावित कारणों में शामिल माना जाता है।
4. नींद और थकान की समस्या
कुछ महिलाओं को इस दौरान सामान्य से ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। नींद आने में परेशानी या जरूरत से ज्यादा नींद आने जैसी स्थिति भी हो सकती है।
5. खाने की इच्छा में बदलाव
पीरियड्स से पहले मीठा, नमकीन या किसी खास खाद्य पदार्थ को खाने की इच्छा बढ़ना भी कई महिलाओं में देखा जाता है। भूख में बदलाव हार्मोनल उतार-चढ़ाव से जुड़ा हो सकता है।
6. सिरदर्द, मुंहासे और हल्की ऐंठन
कुछ महिलाओं को पीरियड्स शुरू होने से पहले सिरदर्द, त्वचा पर मुंहासे या पेट के निचले हिस्से में हल्की ऐंठन महसूस हो सकती है। हालांकि इन लक्षणों की तीव्रता लगातार बढ़ रही हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पीरियड्स से पहले होने वाले हार्मोनल बदलावों का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। कुछ महिलाओं को कब्ज, गैस या पेट फूलने की समस्या महसूस होती है। हार्मोनल बदलावों के कारण आंतों की गतिविधि में परिवर्तन इसका एक कारण हो सकता है।
इसी तरह शरीर में पानी रुकने से वजन थोड़ा बढ़ा हुआ या शरीर सामान्य से ज्यादा फूला हुआ महसूस हो सकता है। आमतौर पर ऐसे बदलाव अस्थायी होते हैं और पीरियड्स शुरू होने के बाद कम हो जाते हैं।
इन लक्षणों को कम करने के लिए क्या करें?
पीरियड्स से पहले होने वाली सामान्य परेशानी को कम करने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव मददगार हो सकते हैं। नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि, पैदल चलना और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना उपयोगी हो सकता है।
पर्याप्त नींद लेना भी महत्वपूर्ण है। पीरियड्स से पहले बहुत ज्यादा कैफीन, नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड या पैकेज्ड फूड का सेवन कम करने से कुछ महिलाओं को राहत मिल सकती है।
आहार में दही, हरी सब्जियां, मेवे और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी भी सप्लीमेंट का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू नहीं करना चाहिए।
अपने लक्षणों का रिकॉर्ड रखना क्यों उपयोगी है?
अगर हर महीने पीरियड्स से पहले एक जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें नोट करना उपयोगी हो सकता है। कम से कम दो-तीन मासिक चक्रों तक तारीख, लक्षणों की अवधि और उनकी तीव्रता का रिकॉर्ड रखने से पैटर्न समझने में मदद मिल सकती है।
यह जानकारी डॉक्टर के लिए भी उपयोगी होती है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि लक्षण वास्तव में मासिक चक्र से जुड़े हैं या किसी अन्य कारण से हो रहे हैं।
कब सामान्य PMS से अलग मानें?
हर प्रीमेंस्ट्रुअल लक्षण को सामान्य मान लेना सही नहीं है। अगर मूड में बदलाव बहुत ज्यादा हो, दर्द इतना बढ़ जाए कि सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगें, असामान्य या अत्यधिक रक्तस्राव हो, या लक्षण हर महीने बढ़ते जाएं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कुछ मामलों में गंभीर प्रीमेंस्ट्रुअल लक्षण PMDD यानी प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर से जुड़े हो सकते हैं। इसके अलावा थायराइड से जुड़ी समस्या, एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉएड या अन्य स्त्री रोग संबंधी स्थितियों के लक्षण भी कभी-कभी सामान्य PMS जैसे दिखाई दे सकते हैं।
इसलिए केवल इंटरनेट पर पढ़ी जानकारी के आधार पर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। खासकर लगातार, गंभीर या नए लक्षण दिखाई देने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर रहता है।













