पेट और आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद हैं ये 5 ड्रिंक्स, जानिए डॉक्टर की सलाह

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पेट की सेहत का सीधा संबंध हमारे खानपान से है। क्रैनबेरी, ब्लूबेरी, संतरा और कीवी जैसे फलों में कई ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो आंतों के अच्छे बैक्टीरिया के लिए उपयोगी हो सकते हैं। डॉक्टर जोसेफ सलहब ने इनके फायदे बताए हैं।

Gut Health: कई लोगों को सुबह पेट ठीक से साफ नहीं होता, तो कुछ गैस और कब्ज से परेशान रहते हैं। इसके पीछे खानपान की आदतें भी एक वजह हो सकती हैं। दरअसल, हमारी आंतों में बड़ी संख्या में बैक्टीरिया रहते हैं। इनमें कई बैक्टीरिया भोजन पचाने में मदद करते हैं। इन्हें स्वस्थ रखने के लिए फाइबर वाली चीजें खाना जरूरी है। पेट और आंतों के विशेषज्ञ डॉ. जोसेफ सलहब ने कुछ ऐसे फलों के जूस और ड्रिंक्स के बारे में बताया है, जिनका सेवन आंतों की सेहत के लिए अच्छा हो सकता है।

पेट के लिए क्या काम करते हैं अच्छे बैक्टीरिया?

हमारी आंतों में अच्छे और दूसरे तरह के बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं। इनमें से कई भोजन को पचाने और उससे पोषक तत्वों के इस्तेमाल में मदद करते हैं। आंतों में रहने वाले इन सूक्ष्म जीवों को गट माइक्रोबायोम कहा जाता है।

खाने में फाइबर की कमी होने पर कब्ज जैसी परेशानी बढ़ सकती है। वहीं, फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने से आंतों को फाइबर मिलता है। कुछ फलों में ऐसे प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं, जिनका अच्छे बैक्टीरिया पर सकारात्मक असर हो सकता है। हालांकि, सिर्फ जूस पीने से पेट की हर परेशानी ठीक हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।

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हमारी आंतों में अलग-अलग तरह के सूक्ष्म जीव रहते हैं। इन्हें मिलाकर गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। इनमें कई बैक्टीरिया ऐसे होते हैं, जो भोजन के पाचन और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में मदद करते हैं। खानपान में फाइबर की कमी होने से आंतों की सेहत प्रभावित हो सकती है।

डॉक्टर जोसेफ सलहब के मुताबिक, कुछ फलों और कोको में मौजूद पॉलीफेनोल्स आंतों के बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, सिर्फ जूस पीने से पाचन की सभी परेशानियां दूर नहीं होतीं। इसके लिए रोज की डाइट भी संतुलित होनी चाहिए।

क्रैनबेरी और ब्लूबेरी जूस से आंतों को मिल सकता है फायदा

क्रैनबेरी जूस में पॉलीफेनोल्स नाम के प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं। ये ऐसे प्लांट कंपाउंड हैं, जिनका आंतों में मौजूद बैक्टीरिया पर अच्छा असर हो सकता है। कुछ शोध बताते हैं कि क्रैनबेरी के तत्व गट माइक्रोबायोम को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।

वहीं, ब्लूबेरी में एंथोसायनिन पाया जाता है। इसी तत्व की वजह से इनका रंग गहरा नीला होता है। एंथोसायनिन एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट है। आंतों के बैक्टीरिया इन यौगिकों को तोड़ते हैं और इससे बनने वाले पदार्थ पाचन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

इन दोनों फलों का जूस लेते समय यह जरूर देखें कि उसमें अलग से चीनी न मिलाई गई हो। बाजार में मिलने वाले कई पैक्ड जूस में शुगर की मात्रा ज्यादा हो सकती है।

संतरे और कीवी से भी मिलते हैं जरूरी पोषक तत्व

संतरा विटामिन सी के लिए जाना जाता है, लेकिन इसमें कई दूसरे प्राकृतिक पोषक तत्व भी होते हैं। संतरे में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स गट माइक्रोबायोम पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं। हालांकि, संतरे का जूस निकालने पर इसके फाइबर का बड़ा हिस्सा कम हो जाता है।

इसलिए संतरे को छीलकर खाना ज्यादा फायदेमंद विकल्प हो सकता है। इससे शरीर को विटामिन सी के साथ फाइबर भी मिलता है, जो मल त्याग को आसान बनाने में मदद करता है।

कीवी भी पाचन के लिहाज से अच्छा फल माना जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी और दूसरे प्लांट कंपाउंड मिलते हैं। खासकर कब्ज की परेशानी वाले लोगों के लिए पूरी कीवी खाना उपयोगी हो सकता है। कुछ अध्ययनों में कीवी के नियमित सेवन से मल त्याग में सुधार देखा गया है।

कीवी का जूस पीने के बजाय इसे पूरा खाना या गूदे सहित ब्लेंड करना बेहतर रहेगा।

हॉट कोको भी कर सकता है गट बैक्टीरिया को सपोर्ट

फलों के अलावा डॉक्टर ने हॉट कोको का भी जिक्र किया है। कोको में पॉलीफेनोल्स होते हैं, जिनका असर आंतों में रहने वाले कुछ बैक्टीरिया पर पड़ सकता है।

कुछ छोटे अध्ययनों में कोको फ्लेवनॉल्स के सेवन से बिफिडोबैक्टीरिया जैसे फायदेमंद बैक्टीरिया में बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, इसे पाचन की बीमारी का इलाज नहीं समझना चाहिए।

हॉट कोको बनाते समय ज्यादा चीनी डालने से बचें। मीठे चॉकलेट ड्रिंक के मुकाबले कम चीनी वाला कोको बेहतर विकल्प हो सकता है।

जूस बनाने से अच्छा है फलों को ब्लेंड करना

डॉ. जोसेफ सलहब की सलाह है कि जहां तक संभव हो, फलों का रस निकालने के बजाय उन्हें ब्लेंड करके पिएं। इसकी वजह फाइबर है। जूसर से रस निकालने पर फलों का काफी फाइबर अलग हो जाता है, जबकि पूरे फल को ब्लेंड करने पर इसका बड़ा हिस्सा बना रहता है।

फाइबर आंतों के कुछ अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। इसलिए सिर्फ जूस पर निर्भर रहने के बजाय साबुत फल, सब्जियां और फाइबर वाली दूसरी चीजें भी खानी चाहिए।

अगर आपको अक्सर कब्ज, पेट दर्द या पाचन से जुड़ी परेशानी रहती है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। गट हेल्थ और सही खानपान से जुड़ी जानकारी के लिए विश्वसनीय स्वास्थ्य स्रोतों पर भी नजर रखें।

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