डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स कम होने पर खान-पान और पर्याप्त तरल पदार्थ जरूरी हैं। कीवी, अनार और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ डाइट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए इन पर निर्भर रहना सही नहीं है।
डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले फूड्स: डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या घट सकती है, इसलिए मरीज की स्थिति और ब्लड रिपोर्ट की निगरानी जरूरी होती है। संतुलित भोजन, पानी और अन्य तरल पदार्थ शरीर को रिकवरी में मदद दे सकते हैं। कीवी, अनार और फल-सब्जियां पौष्टिक विकल्प हैं, लेकिन किसी खास फल, जूस या आयुर्वेदिक उपाय से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ने का पक्का प्रमाण नहीं है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराना जरूरी है।
गू में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए सही खानपान और डॉक्टर की निगरानी जरूरी

डेंगू के दौरान कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है। ऐसे में खान-पान के साथ शरीर में पानी की कमी न होने देना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है। कीवी, अनार, संतरा और अन्य फल शरीर को विटामिन, मिनरल और दूसरे पोषक तत्व देते हैं। हालांकि, केवल इन चीजों को खाने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ने की गारंटी नहीं होती।
डेंगू में प्लेटलेट्स के लिए कौन-से फूड्स खाएं?
डेंगू के दौरान मरीज की डाइट में पौष्टिक और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। कीवी, अनार, संतरा, अमरूद और सेब जैसे फल विटामिन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व प्रदान करते हैं। अनार में फोलेट और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं, जबकि कीवी और संतरे में विटामिन सी मिलता है।
इसके अलावा लौकी, कद्दू और दूसरी सब्जियां संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकती हैं। कद्दू के बीज जैसे खाद्य पदार्थ भी कई पोषक तत्व देते हैं। मरीज की भूख और पाचन के अनुसार भोजन की मात्रा तय की जानी चाहिए।
ध्यान रखें कि किसी एक फल या सब्जी को प्लेटलेट्स बढ़ाने का निश्चित उपाय नहीं माना जा सकता। डेंगू में प्लेटलेट्स का स्तर बीमारी के दौरान स्वाभाविक रूप से बदल सकता है। इसलिए खान-पान को इलाज का विकल्प नहीं बनाना चाहिए।
डेंगू में पानी और तरल पदार्थ क्यों हैं जरूरी?
डेंगू में बुखार, उल्टी और कम भोजन-पानी लेने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो सकती है। मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त पानी, ओआरएस या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं। नारियल पानी भी तरल पदार्थों का एक विकल्प हो सकता है, यदि मरीज इसे पी पा रहा हो।
यदि मरीज को लगातार उल्टी हो रही है, पेट में तेज दर्द है, बहुत कमजोरी महसूस हो रही है, खून आ रहा है या पेशाब कम हो रहा है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ये गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
डेंगू में केवल प्लेटलेट्स की संख्या ही मरीज की स्थिति तय नहीं करती। डॉक्टर लक्षणों, ब्लड प्रेशर, शरीर में तरल पदार्थों की स्थिति और अन्य जांचों को ध्यान में रखकर इलाज करते हैं।
पपीते के पत्ते, गिलोय और व्हीटग्रास जूस पर क्या ध्यान रखें?
पपीते के पत्तों का रस, गिलोय, व्हीटग्रास और एलोवेरा जूस को अक्सर प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपायों के रूप में बताया जाता है। हालांकि, इनसे डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ने या गंभीर बीमारी से बचाव होने का पर्याप्त विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
इनका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर गिलोय और अन्य हर्बल उत्पादों के कुछ लोगों में दुष्प्रभाव हो सकते हैं या वे दूसरी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के इनका इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
स्वामी रामदेव सहित विभिन्न आयुर्वेदिक वक्ताओं द्वारा बताए गए उपायों को भी वैज्ञानिक प्रमाण और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर परखना चाहिए। डेंगू का कोई घरेलू नुस्खा डॉक्टर की निगरानी, जरूरी जांच या अस्पताल में इलाज की जगह नहीं ले सकता।
डेंगू में रिकवरी के लिए इन बातों का रखें ध्यान
डेंगू होने पर पर्याप्त आराम करें, डॉक्टर की सलाह के अनुसार तरल पदार्थ लें और जरूरत के मुताबिक ब्लड टेस्ट कराएं। बुखार या दर्द के लिए दवा लेने से पहले चिकित्सक से पूछें। एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं, इसलिए डेंगू में इन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह न लें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्लेटलेट्स कम होने पर घबराने के बजाय डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषण दे सकता है, लेकिन सुरक्षित रिकवरी के लिए समय पर जांच, लक्षणों की निगरानी और उचित चिकित्सा देखभाल जरूरी है।











