प्रियंका चोपड़ा ने एक पॉडकास्ट में महाराष्ट्र की छाछ और साउथ इंडियन स्टाइल बटरमिल्क के प्रति अपनी पसंद बताई। बिना चीनी वाली छाछ पाचन, हाइड्रेशन और पोषण में मदद कर सकती है, लेकिन सेवन के दौरान नमक और व्यक्तिगत सहनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।
Health: छाछ भारतीय खानपान का पारंपरिक हिस्सा है। इसे गर्मियों में शरीर को तरोताजा रखने के लिए खूब पिया जाता है, लेकिन संतुलित मात्रा में इसका सेवन दूसरे मौसमों में भी किया जा सकता है। अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस ने एक पॉडकास्ट में महाराष्ट्र की छाछ और दक्षिण भारतीय शैली में तैयार बटरमिल्क के प्रति अपनी पसंद बताई। उनके अनुसार, वह इसे लगभग रोज पीती हैं।
43 वर्षीय प्रियंका इन दिनों एस.एस. राजामौली की फिल्म 'वाराणसी' की शूटिंग के लिए हैदराबाद में हैं। मिथिकल किचन पॉडकास्ट में उन्होंने छाछ के प्रति अपनी पसंद साझा की। हालांकि, किसी सेलिब्रिटी की खानपान संबंधी आदत अपने आप में किसी खाद्य पदार्थ के स्वास्थ्य लाभों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होती। छाछ के संभावित फायदे उसके पोषण, बनाने के तरीके और व्यक्ति की सेहत पर निर्भर करते हैं।
1. पाचन को बेहतर रखने में मदद
छाछ का सेवन कई लोग भोजन के बाद करना पसंद करते हैं। पारंपरिक रूप से इसे दही में पानी मिलाकर तैयार किया जाता है। यदि इसे ऐसे दही से बनाया गया है जिसमें जीवित लाभकारी बैक्टीरिया मौजूद हैं, तो यह आंतों के सूक्ष्मजीवों के संतुलन को सहयोग दे सकती है।
छाछ में अदरक, करी पत्ता और हींग जैसी सामग्री मिलाने से इसका स्वाद बढ़ता है। कुछ लोगों को अदरक और अन्य मसालों वाला पेय भोजन के बाद आरामदायक लग सकता है। हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि छाछ हर व्यक्ति में गैस, पेट फूलने या दूसरी पाचन समस्याओं को दूर कर देती है।
यदि बार-बार पेट दर्द, दस्त या गैस की परेशानी होती है, तो केवल छाछ पर निर्भर रहने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है।
2. शरीर में पानी की कमी पूरी करने में सहायक
छाछ में पानी की मात्रा अधिक होती है। इसमें पोटैशियम और अन्य खनिज भी हो सकते हैं, जिनकी मात्रा इस्तेमाल किए गए दूध या दही और बनाने की विधि के अनुसार बदलती है। इसलिए छाछ सामान्य दैनिक तरल सेवन में योगदान दे सकती है।
गर्म मौसम में, शारीरिक गतिविधि के बाद या लंबे समय तक काम करने के दौरान इसे पीना तरोताजा महसूस करने का एक तरीका हो सकता है। हालांकि, अत्यधिक पसीना आने या गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में केवल सामान्य छाछ पर्याप्त नहीं होती। ऐसी परिस्थितियों में जरूरत के अनुसार उचित ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) या चिकित्सकीय सलाह की आवश्यकता हो सकती है।
3. कैल्शियम और विटामिन बी का स्रोत
दूध से बने उत्पादों की तरह छाछ में भी कैल्शियम हो सकता है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर की मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए भी इसकी जरूरत होती है।
छाछ में विटामिन बी समूह के कुछ विटामिन भी मौजूद हो सकते हैं। ये शरीर में ऊर्जा के उपयोग और अन्य महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं। हालांकि, पोषक तत्वों की वास्तविक मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि छाछ किस तरह तैयार की गई है और उसमें कितना दही या दूध इस्तेमाल हुआ है।
हड्डियों की सेहत के लिए केवल छाछ पीना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार अन्य पोषक तत्वों का सेवन भी महत्वपूर्ण है।
4. वजन प्रबंधन में हो सकती है मदद
बिना चीनी वाली छाछ कई मीठे पेय और शक्करयुक्त पैकेज्ड ड्रिंक्स के मुकाबले कम कैलोरी वाला विकल्प हो सकती है। इसमें मौजूद प्रोटीन भी कुछ समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है।
यदि कोई व्यक्ति मीठे पेय की जगह सादी छाछ चुनता है, तो इससे कुल कैलोरी सेवन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, छाछ की कैलोरी उसकी मात्रा, गाढ़ेपन और उसमें मिलाई गई सामग्री पर निर्भर करती है।
छाछ अपने आप वजन कम करने का उपाय नहीं है। वजन प्रबंधन के लिए कुल कैलोरी सेवन, भोजन की गुणवत्ता, शारीरिक गतिविधि, नींद और जीवनशैली को साथ में ध्यान में रखना जरूरी है।
5. ब्लड शुगर प्रबंधन में क्या भूमिका है?
बिना चीनी वाली छाछ संतुलित आहार का हिस्सा बन सकती है। खासकर जब इसे अधिक चीनी वाले पेय की जगह लिया जाए, तो यह बेहतर विकल्प हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि छाछ सीधे ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है या मधुमेह का इलाज है।
छाछ में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की मात्रा उसकी सामग्री पर निर्भर करती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को इसमें चीनी, मीठे फ्लेवर या अन्य अतिरिक्त सामग्री मिलाने से बचना चाहिए और अपनी डाइट के अनुसार सेवन करना चाहिए। निर्धारित दवाओं या उपचार के स्थान पर छाछ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
6. साउथ इंडियन स्टाइल छाछ कैसे अलग है?
दक्षिण भारत में छाछ को कई बार करी पत्ता, अदरक, हींग और भुने जीरे के साथ तैयार किया जाता है। कुछ व्यंजनों में हरी मिर्च और अन्य मसालों का भी इस्तेमाल होता है। इन सामग्रियों से पेय का स्वाद और सुगंध बढ़ती है।
इसे तैयार करने के लिए दही में पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंट सकते हैं। इसके बाद स्वाद के अनुसार करी पत्ता, थोड़ा अदरक, भुना जीरा और चुटकी भर हींग मिलाई जा सकती है। नमक सीमित मात्रा में डालना बेहतर है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें अपने सोडियम सेवन पर ध्यान देना पड़ता है।
मसालों वाली छाछ हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होती। जिन्हें किसी मसाले से परेशानी होती है या एसिडिटी बढ़ती है, वे अपनी सहनशीलता के अनुसार सामग्री चुन सकते हैं।
7. रोज छाछ पीते समय किन बातों का ध्यान रखें?
छाछ को नियमित आहार में शामिल किया जा सकता है, लेकिन कुछ लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।
लैक्टोज इनटॉलरेंस: दूध में मौजूद लैक्टोज को पचाने में परेशानी होने वाले कुछ लोगों को छाछ से भी गैस, पेट दर्द या दस्त हो सकते हैं। ऐसे लक्षण हों तो सेवन कम करें या डॉक्टर से सलाह लें।
नमक की मात्रा: हाई ब्लड प्रेशर या सोडियम सीमित रखने की सलाह पाने वाले लोगों को छाछ में अतिरिक्त नमक कम डालना चाहिए।
अतिरिक्त चीनी: छाछ में चीनी या मीठे सिरप मिलाने से उसकी कैलोरी बढ़ सकती है। सादी छाछ बेहतर विकल्प हो सकती है।
स्वच्छता और भंडारण: साफ बर्तनों और सुरक्षित डेयरी उत्पादों से छाछ तैयार करें। इसे लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें।
व्यक्तिगत सहनशीलता: यदि इसे पीने के बाद लगातार पेट संबंधी परेशानी हो, तो सेवन रोककर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।











