झुंझुनूं जिले में किसानों ने रबी फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। कृषि विभाग ने इस सीजन में 3.15 लाख हेक्टेयर में फसल बोने का लक्ष्य रखा है। इसमें सरसों के लिए सबसे ज्यादा 1.40 लाख हेक्टेयर जमीन तय की गई है। किसानों ने सिंचाई के लिए नियमित बिजली की मांग की है।
झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में ठंड की शुरुआत के साथ किसान रबी फसलों की बुवाई में लग गए हैं। कई खेतों में जुताई चल रही है, तो कहीं सरसों, गेहूं और चने की बुवाई की जा रही है। कृषि विभाग ने जिले में इस बार 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर में रबी की खेती का लक्ष्य रखा है। इनमें सरसों का रकबा सबसे अधिक है। वहीं, किसानों का कहना है कि फसलों की सिंचाई के लिए बिजली समय पर मिलनी चाहिए, ताकि खेतों में पानी देने का काम प्रभावित न हो।
सरसों की खेती के लिए 1.40 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य
झुंझुनूं के गांवों में इन दिनों किसान खेत तैयार करने और बीज डालने में व्यस्त हैं। कृषि विभाग ने इस बार सरसों की बुवाई के लिए 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है। जिले में गेहूं और चने की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। किसानों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सिंचाई की है। उनका कहना है कि बिजली की सप्लाई तय समय पर मिले तो बुवाई और फसलों को पानी देने में आसानी होगी।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. मोहन बाबरवाल के अनुसार, जिले में इस साल कुल 3.15 लाख हेक्टेयर में रबी की फसलें बोने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सरसों को सबसे ज्यादा जगह दी गई है।
विभाग ने अकेले सरसों के लिए 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। जिले में सरसों की खेती लंबे समय से होती रही है। इस बार भी किसानों का रुझान इसकी तरफ रहने की उम्मीद है।
सरसों के भाव को लेकर भी किसान उम्मीद लगाए हुए हैं। हालांकि, फसल तैयार होने के समय बाजार में क्या कीमत मिलेगी, यह अभी तय नहीं है।
गेहूं और चने के लिए 70-70 हजार हेक्टेयर जमीन
सरसों के अलावा जिले में गेहूं और चने की खेती भी बड़े स्तर पर की जाती है। कृषि विभाग ने इस बार गेहूं के लिए 70 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है। इतनी ही जमीन पर चने की बुवाई करने की तैयारी है।
तीनों फसलों को मिलाकर 2 लाख 80 हजार हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य बनता है। बाकी 35 हजार हेक्टेयर में दूसरी रबी फसलें बोने की योजना है।
किसान अपनी जमीन, पानी की उपलब्धता और पिछले सीजन के अनुभव के हिसाब से फसल का चुनाव कर रहे हैं। जिन खेतों में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है, वहां गेहूं की बुवाई की तैयारी की जा रही है। वहीं, कम पानी वाले इलाकों में सरसों और चना किसानों के लिए विकल्प हो सकते हैं।
कृषि विभाग ने फिलहाल बुवाई का लक्ष्य तय किया है। वास्तव में कितने हेक्टेयर में खेती हो पाएगी, इसकी स्थिति बुवाई का काम आगे बढ़ने के बाद साफ होगी।
किसानों की मांग, सिंचाई के समय मिले बिजली
रबी की बुवाई शुरू होने के साथ किसानों ने बिजली आपूर्ति का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि खेतों में पानी देने के समय बिजली मिलना जरूरी है।
जिन किसानों के खेतों में ट्यूबवेल से सिंचाई होती है, उन्हें बिजली की जरूरत पड़ती है। अगर तय समय पर बिजली नहीं आती या बार-बार कटौती होती है, तो पानी देने का काम प्रभावित हो सकता है।
किसानों का कहना है कि रबी सीजन में सिंचाई के लिए नियमित बिजली की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे खेत तैयार करने और जरूरत के मुताबिक फसलों को पानी देने में आसानी होगी।
गेहूं की खेती में सिंचाई का खास महत्व है। वहीं, सरसों और चने में भी फसल की अवस्था और मिट्टी की नमी के अनुसार पानी देना पड़ता है। ऐसे में किसानों के लिए समय पर बिजली मिलना जरूरी है।
तापमान गिरने से बुवाई में आई तेजी
अक्टूबर के आखिरी दिनों के मुकाबले नवंबर में मौसम में बदलाव दिखाई देने लगा है। तापमान कम होने के साथ किसान रबी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं।
सरसों, गेहूं और चने की खेती के लिए मौसम और मिट्टी में नमी की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। खेत में पर्याप्त नमी नहीं होने पर बीज के अंकुरण में परेशानी आ सकती है।
इसी वजह से कई किसान बुवाई से पहले खेतों में पानी देते हैं। इसे स्थानीय भाषा में पलेवा भी कहा जाता है। इसके बाद जमीन तैयार करके बीज बोए जाते हैं।
किसानों के सामने इस समय सही बुवाई का समय चुनने की चुनौती भी है। ज्यादा तापमान या खेत में नमी की कमी होने से फसल की शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
राजस्थान में भी रबी की बुवाई पर मौसम का असर
झुंझुनूं के साथ राजस्थान के दूसरे जिलों में भी रबी फसलों की बुवाई चल रही है। हालांकि, इस बार प्रदेश में शुरुआती बुवाई पिछले साल के मुकाबले धीमी रही है।
राजस्थान कृषि विभाग के 21 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में करीब 6.21 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हुई थी। यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग 5.16 प्रतिशत था।
अक्टूबर के आखिरी दिनों तक कई इलाकों में खेतों में नमी की कमी और अधिक तापमान के कारण किसानों को बुवाई के लिए इंतजार करना पड़ा। अब मौसम में बदलाव आने के साथ बुवाई बढ़ने की उम्मीद है।
झुंझुनूं में भी आने वाले दिनों में बुवाई का रकबा बढ़ सकता है। हालांकि, इसके लिए मौसम का साथ मिलना और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होना जरूरी होगा।







