NCP Politics: अमित शाह से मुलाकात के बाद NCP ने खारिज की टूट की खबरें, सुनेत्रा पवार पर भरोसा

NCP Politics: अमित शाह से मुलाकात के बाद NCP ने पार्टी में मतभेद और टूट की अटकलों को खारिज किया। नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के भीतर मतभेद की खबरों पर पार्टी नेताओं ने सफाई दी है। अमित शाह से मुलाकात के बाद उन्होंने सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। साथ ही शरद पवार गुट से विलय की संभावना खारिज कर दी है।

मुंबई: महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके बेटे शामिल नहीं थे, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चा शुरू हो गई। 

हालांकि, NCP नेताओं ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वे सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में मिलकर काम करेंगे। पार्टी ने वित्त मंत्रालय वापस पाने की मांग भी दोहराई है।

अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे NCP के छह बड़े नेता

महाराष्ट्र में सियासी चर्चाओं के बीच NCP के छह वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे शामिल थे। बैठक में महाराष्ट्र की महायुति सरकार के कामकाज, गठबंधन दलों के बीच तालमेल और NCP से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इस मुलाकात का मकसद सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाना था।

हालांकि, बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता मौजूदा नेतृत्व से खुश नहीं हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि बैठक के दौरान NCP के दोनों गुटों के विलय की संभावना पर चर्चा हुई थी। इन चर्चाओं के बीच पार्टी नेतृत्व ने सामने आकर अपनी स्थिति साफ की है।

सुनेत्रा पवार और उनके बेटों की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

अमित शाह के साथ हुई बैठक में NCP अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार शामिल नहीं थीं। उनके बेटे पार्थ पवार और जय पवार भी इस मुलाकात का हिस्सा नहीं थे। इसी वजह से यह सवाल उठने लगा कि क्या पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पवार परिवार के बीच सब कुछ ठीक है। हालांकि, NCP प्रवक्ता उमेश पाटिल ने इन अटकलों को गलत बताया। 

उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार पहले ही अमित शाह से मुलाकात कर चुके थे। उस दौरान उन्होंने खुद वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के लिए समय देने का अनुरोध किया था। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में हुई बैठक पहले से तय थी। इसलिए सुनेत्रा पवार की गैरमौजूदगी को किसी राजनीतिक मतभेद से जोड़ना सही नहीं है।

शरद पवार गुट से विलय की खबरों पर NCP ने क्या कहा?

अमित शाह से मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा NCP और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के संभावित विलय को लेकर हुई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि दोनों गुटों को फिर एक साथ लाने की संभावना पर बातचीत हुई थी। हालांकि, NCP के एक वरिष्ठ नेता ने इन चर्चाओं को खारिज कर दिया।

पार्टी नेता ने कहा कि सभी नेता उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में मिलकर काम करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल शरद पवार गुट के साथ विलय की कोई योजना नहीं है। NCP के मुताबिक, पार्टी महाराष्ट्र की महायुति सरकार का हिस्सा बनी रहेगी और गठबंधन के दूसरे दलों के साथ तालमेल मजबूत करने पर ध्यान देगी।

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वित्त मंत्रालय वापस चाहती है अजित पवार की NCP

दिल्ली में हुई बैठक का एक अहम मुद्दा महाराष्ट्र का वित्त मंत्रालय भी रहा। NCP लंबे समय से यह विभाग वापस पाने की मांग कर रही है। इससे पहले वित्त मंत्रालय अजित पवार के पास था। जनवरी 2026 में उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विभाग की जिम्मेदारी संभाली। अब NCP चाहती है कि यह मंत्रालय दोबारा उसके हिस्से में आए। पार्टी नेताओं का कहना है कि वित्त विभाग वापस मिलने पर मंत्री का नाम संगठन की तरफ से तय किया जाएगा।

सोमवार रात मुंबई में हुई कोर कमेटी की बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पुष्टि की कि अमित शाह के सामने वित्त मंत्रालय का मुद्दा उठाया गया था। हालांकि, वित्त मंत्रालय NCP को वापस देने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

सुनील तटकरे बोले- पार्टी में नाराजगी की कोई वजह नहीं

मुंबई में सोमवार, 2 नवंबर की रात NCP की कोर कमेटी की बैठक हुई। इसके बाद सुनील तटकरे ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए पार्टी के भीतर मतभेद की खबरों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि NCP में नेताओं के बीच बातचीत और सामूहिक फैसले लेने की परंपरा है। संगठन से जुड़े मामलों को आपसी चर्चा के जरिए सुलझाया जाता है।

तटकरे के मुताबिक, पार्टी में असंतोष जैसी कोई स्थिति नहीं है। आने वाले दिनों में भी नेता एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए रखेंगे। कोर कमेटी की बैठक में संगठन को मजबूत करने, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और विधायकों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की गई।

अब NCP विधायकों की बैठक पर रहेगी नजर

NCP ने मंगलवार, 3 नवंबर को अपने विधायकों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। इसमें संगठन से जुड़े मुद्दों और आगे की राजनीतिक रणनीति पर बातचीत होने की उम्मीद है। अमित शाह से मुलाकात के बाद पार्टी ने भले ही मतभेद की खबरें खारिज कर दी हों, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्टों में नेतृत्व को लेकर असहमति के दावे अब भी सामने आ रहे हैं। इन दावों पर पार्टी का आधिकारिक रुख अलग है।

फिलहाल यह साफ है कि NCP ने सार्वजनिक रूप से सुनेत्रा पवार के नेतृत्व का समर्थन किया है और दोनों गुटों के विलय से इनकार किया है। अब देखना होगा कि वित्त मंत्रालय की मांग पर महायुति सरकार क्या फैसला लेती है। महाराष्ट्र की राजनीति, NCP की बैठकों और महायुति सरकार से जुड़े नए फैसलों की जानकारी के लिए

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