चुनाव आयोग ने उन लोगों की परेशानी दूर कर दी है, जिनका नाम पहले वोटर लिस्ट में था, लेकिन SIR की ड्राफ्ट सूची में नहीं मिला। ऐसे मतदाता फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। केवल पहले से मतदाता होने के कारण उनका आवेदन गलत नहीं माना जाएगा।
नई दिल्ली: आपने पिछले चुनाव में वोट डाला था, लेकिन इस बार वोटर लिस्ट में अपना नाम खोजने पर नहीं मिल रहा है, तो अब आप फॉर्म-6 भर सकते हैं। चुनाव आयोग ने 3 नवंबर 2026 को इस मामले में स्थिति साफ कर दी है। आयोग के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान जिन पुराने मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से छूट गया है, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे लोगों को फॉर्म-6 भरने से घबराने की जरूरत नहीं है। आयोग ने इस संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों को भी निर्देश भेजे हैं।
पुराने वोटरों को फॉर्म-6 भरने में क्यों हो रही थी दिक्कत?
SIR के दौरान वोटर लिस्ट की जांच हो रही है। इस बीच कुछ लोगों को ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम नहीं मिला। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो पहले कई बार वोट डाल चुके हैं। अब इन लोगों को दोबारा अपना नाम जुड़वाना है, लेकिन फॉर्म-6 की एक शर्त को लेकर वे उलझन में थे। दरअसल, फॉर्म-6 में लिखना होता है कि आवेदक पहली बार वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहा है। ऐसे में पुराने मतदाताओं को डर था कि वे यह फॉर्म भरेंगे तो उनकी दी गई जानकारी गलत मानी जा सकती है। उन्हें इस बात की भी चिंता थी कि कहीं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई न हो जाए।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मतदाता सूची से जुड़ी गलत घोषणा करने पर कार्रवाई हो सकती है। इसी वजह से कई पुराने मतदाता फॉर्म भरने से बच रहे थे। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा तो आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इस बारे में स्थिति साफ कर दी।
पुराने वोटरों के लिए चुनाव आयोग ने क्या कहा?
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चुनाव आयोग ने अब साफ कर दिया है कि जिन लोगों का नाम पहले वोटर लिस्ट में था, लेकिन SIR की नई ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आया है, वे फॉर्म-6 भर सकते हैं। इसके जरिए वे अपना नाम फिर से जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। पहले वोट डाल चुके लोगों को भी यह सुविधा मिलेगी। आयोग ने बताया कि फॉर्म-6 में पहली बार वोटर बनने से जुड़ी घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है। अगर किसी व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था और अब नहीं मिल रहा है, तो दोबारा फॉर्म भरने पर उसकी घोषणा सिर्फ इसी कारण गलत नहीं मानी जाएगी।
इस बारे में चुनाव आयोग ने मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को भी निर्देश दिए हैं। उनसे कहा गया है कि किसी पुराने मतदाता ने फिर से फॉर्म-6 भरा है, तो केवल इसी वजह से उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए। हालांकि, आवेदन में दी गई बाकी जानकारी सही होना जरूरी है।
फॉर्म-6 भरने के लिए क्या शर्त रखी गई है?
आयोग ने यह राहत कुछ जरूरी शर्तों के साथ दी है। आवेदन करने वाले व्यक्ति का नाम किसी दूसरी लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज नहीं होना चाहिए। इसके अलावा फॉर्म में दी गई बाकी जानकारी भी सही और कानून के मुताबिक होनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि फॉर्म-6 भरने पर गलत जानकारी देने की छूट मिल गई है। आयोग ने केवल यह स्पष्ट किया है कि पहले वोटर रह चुके व्यक्ति के दोबारा आवेदन करने को अपने आप झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।
आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच करेंगे। सभी जरूरी शर्तें पूरी होने पर ही नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से जुड़ा है मामला
चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण दिल्ली हाई कोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के आदेश के बाद आया है। नीलोत्पल दत्ता और अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में याचिकाकर्ताओं ने फॉर्म-6 भरने को लेकर अपनी चिंता जताई थी। उनका कहना था कि वे पहले से पंजीकृत मतदाता रहे हैं। ऐसे में पहली बार नाम शामिल कराने की घोषणा करना गलत हो सकता है।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता फॉर्म-6 भरकर अपनी समस्या का समाधान करा सकते हैं। अदालत ने इस बात से सहमति जताई कि ऐसी स्थिति में झूठी घोषणा किए जाने को लेकर याचिकाकर्ताओं की आशंका उचित नहीं है। कोर्ट ने उन्हें फॉर्म-6 जमा करने की अनुमति देते हुए कहा कि आवेदन पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।









