बिहार में बाढ़ प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, खेतों से बालू हटाने के लिए ₹18,000 अनुदान

बिहार में बाढ़ से खेतों में जमा बालू और गाद हटाने के लिए किसानों को ₹18,000 प्रति हेक्टेयर सहायता मिलेगी। जानें पात्रता और जांच प्रक्रिया।

बिहार में बाढ़ से प्रभावित किसानों को खेतों से बालू और गाद हटाने के लिए आर्थिक मदद मिलेगी। सरकार ने प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये और न्यूनतम 2,200 रुपये सहायता का प्रावधान बताया है। पश्चिम चंपारण में प्रभावित खेतों की जांच शुरू की जा रही है।

बगहा: बिहार में बाढ़ से परेशान किसानों के लिए राहत की खबर है। गंडक नदी का पानी उतरने के बाद पश्चिम चंपारण के कई गांवों में खेतों पर बालू और गाद की मोटी परत जम गई है। इससे किसानों के सामने दोबारा खेती शुरू करने की परेशानी खड़ी हो गई है। अब राज्य सरकार ऐसे किसानों को आर्थिक मदद देने की तैयारी कर रही है। खेतों से बालू और गाद हटाने के लिए निर्धारित शर्तों के तहत 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान है। फिलहाल कृषि विभाग प्रभावित जमीन का ब्योरा जुटा रहा है।

बाढ़ का पानी उतरा, लेकिन खेतों में रह गई बालू

पश्चिम चंपारण में पिछले महीने गंडक समेत दूसरी नदियों में आई बाढ़ से खेती को नुकसान पहुंचा था। कई इलाकों में पानी के साथ बहकर आई बालू और गाद खेतों में जमा हो गई।

 बिहार में बाढ़ प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, खेतों से बालू हटाने के लिए ₹18,000 अनुदान

अब पानी उतरने के बाद किसानों को अपनी जमीन दोबारा खेती के लायक बनाने में परेशानी हो रही है। कुछ खेतों में बालू की मोटी परत जम गई है, जबकि कई जगह गाद के कारण खेती का काम प्रभावित है।

किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या खेतों की सफाई पर होने वाला खर्च है। बालू हटाने और जमीन को फिर से तैयार करने में मेहनत के साथ पैसे भी लगते हैं।

इसी परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रभावित कृषि भूमि की जांच कराने और पात्र किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की है।

विधायक ने मुख्यमंत्री के सामने रखी किसानों की परेशानी

वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित किसानों ने अपनी समस्या स्थानीय विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा के सामने रखी थी।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों ने बताया था कि गंडक नदी की बाढ़ के कारण उनके खेतों में बड़ी मात्रा में बालू और गाद जमा हो गई है। इससे अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो रहा है।

किसानों की परेशानी जानने के बाद विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपकर प्रभावित किसानों के लिए आर्थिक सहायता की मांग की।

विधायक ने कहा कि किसानों के लिए खेतों से बालू हटाना आसान नहीं है। ऐसे में सरकारी सहायता मिलने से उन्हें दोबारा खेती शुरू करने में मदद मिल सकती है।

किसानों को कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता?

बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित कृषि भूमि से बालू और गाद हटाने के लिए निर्धारित राहत मानकों के अनुसार सहायता देने की बात कही है।

इसके तहत पात्र किसानों को अधिकतम 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता मिल सकती है। प्रत्येक पात्र किसान के लिए न्यूनतम 2,200 रुपये सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।

यहां यह समझना जरूरी है कि 2,200 रुपये कम गाद वाले हर खेत के लिए अलग प्रति हेक्टेयर दर नहीं है। यह पात्र किसान को मिलने वाली न्यूनतम सहायता राशि है।

सहायता के लिए खेत में जमा बालू या गाद की स्थिति और निर्धारित पात्रता शर्तों की जांच की जाएगी। इसलिए सभी प्रभावित किसानों को एक जैसी राशि मिलना जरूरी नहीं है।

कृषि विभाग ने प्रखंड अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट

बाढ़ प्रभावित खेतों की जानकारी जुटाने के लिए पश्चिम चंपारण के जिला कृषि पदाधिकारी ने सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में उन खेतों की पहचान करनी होगी, जहां बाढ़ के बाद बालू या गाद जमा हुई है। इसके बाद प्रभावित जमीन का विवरण तैयार करके जिला स्तर पर भेजा जाएगा।

इससे पहले अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के 22 जिलों के जिलाधिकारियों को प्रभावित कृषि भूमि और मत्स्य पालन क्षेत्रों का आकलन कराने के निर्देश दिए थे।

जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के निर्धारित मानकों के अनुसार वित्तीय सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

खेतों की जांच के बाद ही आगे बढ़ेगी अनुदान प्रक्रिया

किसानों को सहायता देने से पहले प्रभावित जमीन का सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों की रिपोर्ट में यह देखा जाएगा कि बाढ़ के कारण खेत पर कितनी बालू या गाद जमा हुई है और जमीन किस हद तक प्रभावित हुई है।

इसके बाद पात्रता के अनुसार सहायता राशि निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

फिलहाल पश्चिम चंपारण में प्रभावित किसानों की अंतिम संख्या और कुल सहायता राशि की जानकारी सामने नहीं आई है। कृषि विभाग की रिपोर्ट पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

यह राहत खेतों से बालू और गाद हटाने के लिए है। इसे फसल नुकसान की भरपाई के लिए चल रही कृषि इनपुट अनुदान योजना से अलग समझना चाहिए।

किसानों को अगली फसल लगाने में मिलेगी मदद

बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ उतरने के बाद खेतों की सफाई करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। खेत में अधिक बालू जमा होने पर जमीन को दोबारा खेती लायक तैयार करने में खर्च बढ़ सकता है।

सरकार की इस पहल से ऐसे किसानों को मदद मिलने की उम्मीद है, जिनकी जमीन बाढ़ के कारण प्रभावित हुई है।

हालांकि, वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब खेतों की जांच पूरी होगी और पात्र किसानों तक सहायता राशि पहुंचाई जाएगी।

फिलहाल पश्चिम चंपारण में कृषि विभाग प्रभावित जमीन की जानकारी इकट्ठा कर रहा है। इसके बाद ही तय होगा कि किन किसानों को कितनी आर्थिक सहायता दी जाएगी।

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