यूपी में भाजपा का बड़ा चुनावी प्लान, 18 मंडलों में पीएम मोदी की रैलियां, अमित शाह संभालेंगे मोर्चा

भाजपा ने यूपी में 18 मंडलों में पीएम मोदी की रैलियों की योजना बनाई है। अमित शाह और नितिन नवीन भी जिलों में संगठन और चुनावी तैयारियां संभालेंगे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी प्रदेश के सभी 18 मंडलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां कराने की योजना बना रही है। अमित शाह और नितिन नवीन को भी अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी दी जाएगी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तक को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उतारने की योजना बना रही है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार पीएम मोदी सभी 18 मंडलों में जनसभाएं कर सकते हैं, जबकि अमित शाह और नितिन नवीन जिला तथा विधानसभा स्तर पर संगठन की तैयारियां देखेंगे। पार्टी का सबसे ज्यादा ध्यान उन इलाकों पर रहेगा, जहां पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा था।

यूपी के सभी 18 मंडलों में पीएम मोदी की रैलियों की तैयारी

भाजपा इस बार विधानसभा चुनाव से काफी पहले बड़े नेताओं की जनसभाएं कराने की योजना बना रही है। पार्टी चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में आयोजित की जाएं।

 यूपी में भाजपा का बड़ा चुनावी प्लान, 18 मंडलों में पीएम मोदी की रैलियां, अमित शाह संभालेंगे मोर्चा

इससे पहले चुनावों के दौरान प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में प्रधानमंत्री की बड़ी सभाएं कराई जाती थीं। अब पार्टी ने प्रचार का दायरा बढ़ाने की तैयारी की है, ताकि अलग-अलग जिलों के लोगों तक बड़े नेताओं की पहुंच हो सके।

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा हो चुकी है। पार्टी के प्रस्तावित कार्यक्रम में मंडल स्तर की जनसभाओं के साथ जिला और विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ताओं की बैठकें भी शामिल हैं।

हालांकि, प्रधानमंत्री की रैलियों की तारीखों और स्थानों की अंतिम सूची अभी सामने नहीं आई है।

कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों पर रहेगा ज्यादा ध्यान

भाजपा ने चुनावी कार्यक्रमों की तैयारी में उन इलाकों को पहले रखने का फैसला किया है, जहां 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था।

पार्टी की योजना के अनुसार पहले कमजोर सीटों और जिलों में बड़े नेताओं के कार्यक्रम कराए जाएंगे। इसके बाद उन क्षेत्रों में जनसभाएं होंगी, जहां भाजपा का संगठन पहले से मजबूत माना जाता है।

भाजपा के लिए पिछले दो चुनावों के परिणाम महत्वपूर्ण रहे हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2022 में पार्टी की सीटें कम हुई थीं। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को उत्तर प्रदेश में पहले के मुकाबले कम सीटें मिलीं।

इन्हीं नतीजों को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब जिला स्तर पर संगठन की स्थिति और पिछले चुनावों के प्रदर्शन की समीक्षा कर रही है।

अमित शाह और नितिन नवीन को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। पार्टी की योजना के मुताबिक शाह जिला और क्षेत्रीय स्तर पर कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा बूथ प्रबंधन और संगठन की तैयारियों पर भी उनकी नजर रहेगी।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम करने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

पार्टी की कोशिश बड़े नेताओं की जनसभाओं के साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय करने की है। इसके लिए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेता अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें करेंगे।

मध्य नवंबर तक जिला और विधानसभा स्तर के प्रभारियों को जरूरी तैयारियां पूरी करने के लिए कहा गया है। इसके बाद नवंबर के दूसरे पखवाड़े से जनसंपर्क और संगठनात्मक कार्यक्रमों में तेजी आने की उम्मीद है।

1.77 लाख से ज्यादा बूथों पर भाजपा की तैयारी

भाजपा ने बड़े नेताओं की रैलियों के साथ बूथ स्तर पर भी काम शुरू कर दिया है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में उत्तर प्रदेश के 98 जिले और 1,918 मंडल शामिल हैं।

पार्टी की ओर से 1,77,516 बूथों के सत्यापन का काम पूरा किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके जरिए बूथ समितियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की स्थिति की जांच की गई।

अब पार्टी बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्र संयोजकों और दूसरे पदाधिकारियों के साथ बैठकें करने की तैयारी में है। इन बैठकों में संगठन के कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी।

भाजपा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े मुद्दों को भी अपनी तैयारियों में शामिल किया है। पार्टी का मानना है कि इस प्रक्रिया को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों का जवाब कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर देना होगा।

2027 के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव पर भी नजर

भाजपा की मौजूदा रणनीति केवल 2027 के विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भी संगठन को मजबूत करने की योजना बना रही है।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें कम हुई थीं। पार्टी अब आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए संगठनात्मक कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है।

फिलहाल भाजपा का ध्यान नवंबर और दिसंबर में होने वाले कार्यक्रमों पर है। आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं की जनसभाओं का विस्तृत कार्यक्रम सामने आ सकता है।

Leave a comment