सारांश: धनबाद के झरिया में दिवाली से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक मिठाई कारखाने पर छापा मारा। यहां से 210 किलो रंगीन बताशे और 150 किलो सेवई जब्त की गई। कारखाना बिना लाइसेंस चल रहा था। खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच रांची में होगी।
झरिया: दिवाली से पहले धनबाद जिले के झरिया में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई बनाने वाले एक कारखाने पर छापेमारी की है। सोमवार को हुई इस कार्रवाई में कुल 360 किलो खाद्य सामग्री जब्त की गई। इनमें 210 किलो रंगीन बताशे और 150 किलो सेवई शामिल हैं। जांच के दौरान कारखाने के पास खाद्य कारोबार का वैध लाइसेंस नहीं मिला। अधिकारियों ने खाद्य सामग्री में प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल का मामला भी सामने आने की बात कही है। अब नमूनों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गुप्त सूचना मिलने के बाद कारखाने पर पहुंची टीम
झरिया थाना क्षेत्र के फतेहपुर रोड पर एक मिठाई कारखाने में अवैध तरीके से खाद्य सामग्री तैयार किए जाने की सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को मिली थी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. राजा कुमार के नेतृत्व में टीम ने सोमवार को कारखाने पर अचानक छापा मारा।
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यह कारखाना दिनेश गुप्ता का बताया गया है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वहां तैयार की जा रही खाद्य सामग्री की जांच की। इस दौरान बड़ी मात्रा में रंगीन बताशे और सेवई मिलीं। विभाग ने दोनों खाद्य पदार्थों को अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. राजा कुमार के मुताबिक, विभाग को सूचना मिली थी कि फतेहपुर गली में बिना जरूरी अनुमति के मिठाई बनाने का कारोबार चल रहा है। इसी जानकारी के आधार पर छापेमारी की गई।
210 किलो रंगीन बताशे और 150 किलो सेवई मिली
कारखाने में जांच के दौरान 210 किलोग्राम रंगीन बताशे और 150 किलोग्राम सेवई बरामद हुई। कुल 360 किलो खाद्य सामग्री को विभाग ने जब्त कर लिया।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। हालांकि, खाद्य सामग्री में किस तरह की मिलावट है और वह स्वास्थ्य के लिए कितनी नुकसानदायक हो सकती है, इसकी अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला की रिपोर्ट से होगी।
छापेमारी के दौरान यह भी पता चला कि कारखाना वैध खाद्य लाइसेंस के बिना संचालित किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
दिवाली के दौरान मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार में बड़ी मात्रा में सामान तैयार करके भेजा जाता है। विभाग का ध्यान इसी दौरान बिना लाइसेंस चलने वाले कारोबार और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर है।
धनबाद जिले की दुकानों तक पहुंचता था सामान
अधिकारियों को जानकारी मिली है कि इस कारखाने में तैयार खाद्य सामग्री की आपूर्ति धनबाद जिले के अलग-अलग इलाकों में की जाती थी। अब विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यहां से किन दुकानों और बाजारों में सामान भेजा गया है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि कारखाने में तैयार सामग्री कितनी मात्रा में पहले ही बाजार तक पहुंच चुकी है। हालांकि, अभी विभाग की ओर से किसी विशेष दुकान या कारोबारी का नाम सार्वजनिक किए जाने की जानकारी नहीं है।
बताया गया है कि बरामद रंगीन बताशे दिवाली के मौके पर बिक्री के लिए तैयार किए जा रहे थे। त्योहार के दौरान ऐसी मिठाइयों की मांग बढ़ने के कारण विभाग ने इस मामले में जांच का दायरा आगे बढ़ाया है।
जब्त खाद्य सामग्री को कमरे में बंद कर लगाया ताला
छापेमारी के बाद अधिकारियों ने बरामद खाद्य सामग्री को एक कमरे में रखवाकर सील कर दिया। जब्त सामान में रंगीन बताशे और सेवई शामिल हैं।
खाद्य पदार्थों के नमूनों को जांच के लिए रांची स्थित प्रयोगशाला भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद यह साफ हो सकेगा कि इनमें किन पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था और खाद्य सुरक्षा मानकों का कितना उल्लंघन हुआ है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद कारखाना संचालक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान में खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. राजा कुमार के साथ चंदन कुमार साव, चंद्रदेव मंजू और नैना कुमार नायक भी शामिल रहे।
दिवाली पर मिठाई खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
दिवाली के मौके पर मिठाई खरीदते समय लोगों को उसकी गुणवत्ता और साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए। खासकर खुले में बिकने वाली मिठाइयों और जरूरत से ज्यादा चमकीले रंग वाले खाद्य पदार्थों को लेकर सावधानी जरूरी है।
हालांकि, किसी मिठाई का रंग देखकर ही उसमें मिलावट होने का फैसला नहीं किया जा सकता। इसकी पुष्टि जांच से ही होती है। फिर भी मिठाई खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई, पैकिंग और खाद्य पदार्थ की स्थिति जरूर देखनी चाहिए।
पैक किए गए खाद्य पदार्थ खरीदने पर निर्माण और एक्सपायरी की तारीख के साथ जरूरी लेबल की जानकारी भी जांचना बेहतर है। किसी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत दी जा सकती है।
झरिया में हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट मिलने से यह स्पष्ट होगा कि जब्त खाद्य सामग्री में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है और कारखाना संचालक के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।










