पटना में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। अपनी मांगों को लेकर छात्र मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकलने की तैयारी में हैं। छात्रों का कहना है कि सरकार की ओर से लगातार आश्वासन दिया जा रहा है लेकिन उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं हो रहा है। इसी नाराजगी के चलते छात्र सड़क पर उतरकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। कई प्रमुख स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी निर्धारित सुरक्षा घेरे को पार कर मुख्यमंत्री आवास तक नहीं पहुंच सकें। इस दौरान शहर के संवेदनशील इलाकों में पुलिसकर्मियों को अलर्ट रखा गया था। गांधी मैदान से आगे बढ़ने वाले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
यह विरोध प्रदर्शन 25 अगस्त 2026 को आयोजित मार्च से जुड़ा है। इसमें बड़ी संख्या में बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC और शिक्षक भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों के साथ दूसरे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र भी शामिल हुए थे। छात्रों ने गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया था। जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी आगे बढ़े वैसे-वैसे पुलिस ने रास्ते में सुरक्षा घेरा मजबूत किया। डाकबंगला चौराहे के आसपास भी भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
छात्रों के विरोध की एक प्रमुख वजह शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 के प्रस्तावित परीक्षा पैटर्न को लेकर असंतोष था। अभ्यर्थियों की मांग थी कि शिक्षक भर्ती परीक्षा पहले की तरह एक ही चरण में आयोजित की जाए। उनका कहना था कि पहले की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में एक चरण की लिखित परीक्षा के आधार पर चयन की प्रक्रिया अपनाई गई थी। ऐसे में नई भर्ती में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की व्यवस्था लागू करने से अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। छात्रों ने इस बदलाव को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी और सरकार से परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव करने की मांग की थी।
अभ्यर्थियों का कहना था कि शिक्षक पात्रता परीक्षा CTET और STET पास करने के बाद उन्हें फिर से प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरना उचित नहीं लगता। उनकी मांग थी कि TRE-4 की परीक्षा एक ही चरण में आयोजित की जाए ताकि चयन प्रक्रिया सरल और समयबद्ध रह सके। इसके साथ ही छात्रों ने परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग को हटाने की मांग भी उठाई थी। उनका कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों को स्पष्ट रखा जाना चाहिए और अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले सभी जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने 70वीं BPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए थे। कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। हालांकि BPSC ने पेपर लीक के आरोपों को खारिज किया था और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित प्रश्नपत्र से जुड़ी सामग्री को फर्जी बताया था। इस मुद्दे पर छात्रों और आयोग के बीच असहमति बनी हुई थी। प्रदर्शनकारी चाहते थे कि परीक्षा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और अभ्यर्थियों की शंकाओं का स्पष्ट जवाब दिया जाए।
छात्रों की मांग केवल शिक्षक भर्ती और BPSC तक सीमित नहीं थी। उन्होंने बिहार कर्मचारी चयन आयोग यानी BSSC की भर्ती परीक्षाओं को समय पर आयोजित कराने और लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को पूरा करने की भी मांग उठाई थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को परीक्षा कैलेंडर और भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। परीक्षा की तारीखों में बदलाव और नियुक्तियों में देरी से उनकी तैयारी प्रभावित होती है। इसलिए सरकार को भर्ती परीक्षाओं के संचालन के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की मांग भी उठाई थी। छात्रों का कहना था कि परीक्षा की प्रक्रिया और मूल्यांकन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें भाषा के आधार पर किसी उम्मीदवार के साथ भेदभाव न हो। इसके अलावा बिहार के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने जैसे मुद्दे भी प्रदर्शन के दौरान उठाए गए थे।
इस आंदोलन में शामिल छात्र संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि अभ्यर्थियों की समस्याओं को केवल आश्वासन देकर टालने के बजाय उन पर ठोस निर्णय लिया जाए। छात्रों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। इसी वजह से उन्होंने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का फैसला किया था।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। डाकबंगला चौराहे के पास बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ स्थानों पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रशासन ने शहर के प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की थी।
छात्रों का आंदोलन बिहार में भर्ती परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से चल रही नाराजगी का हिस्सा था। अभ्यर्थियों की मांग थी कि परीक्षा का पैटर्न पहले से घोषित किया जाए और भर्ती प्रक्रिया के बीच नियमों में बदलाव नहीं किया जाए। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवाओं का काफी समय और पैसा खर्च होता है। ऐसे में परीक्षा से संबंधित नियमों में बदलाव या भर्ती में देरी उनके भविष्य को प्रभावित करती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और समय पर नियुक्तियों का मुद्दा चर्चा में ला दिया था। छात्रों की मांग थी कि सरकार और संबंधित आयोग उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर सभी समस्याओं का समाधान निकालें। वहीं प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना और मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।











