पैसे दे देता लेकिन गाली-गलौज अच्छी नहीं लगी' बेगूसराय में ASI ने मांगी 50 हजार की रिश्वत, 29 हजार लेते निगरानी टीम ने दबोचा

बेगूसराय में शराब जब्ती केस से नाम हटाने के बदले ASI पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा। निगरानी टीम ने 29 हजार रुपये लेते हुए उसे रंगेहाथ गिरफ्तार किया। जांच जारी।
पैसे दे देता लेकिन गाली-गलौज अच्छी नहीं लगी' बेगूसराय में ASI ने मांगी 50 हजार की रिश्वत, 29 हजार लेते निगरानी टीम ने दबोचा
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बिहार के बेगूसराय जिले में रिश्वतखोरी का एक मामला सामने आया है जहां शराब बरामदगी से जुड़े केस में नाम हटाने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में साहेबपुरकमाल थाने में तैनात सहायक अवर निरीक्षक यानी ASI चंदन कुमार झा को निगरानी विभाग की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पुलिसकर्मी को 29 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की खास बात यह है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह पैसे देने के लिए तैयार था लेकिन पुलिस अधिकारी के कथित गाली-गलौज और व्यवहार से परेशान होकर उसने निगरानी विभाग में शिकायत करने का फैसला किया।

यह पूरा मामला साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र के एक शराब बरामदगी कांड से जुड़ा है। साहेबपुरकमाल गांव के वार्ड संख्या आठ निवासी अमित कुमार ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। अमित कुमार के अनुसार उनकी हुंडई कार 13 अगस्त 2026 को ही दूसरे व्यक्ति को बेच दी गई थी। वाहन की बिक्री से संबंधित दस्तावेज और शपथ पत्र भी उनके पास मौजूद थे। उनका कहना था कि कार बेचने के बाद उस पर उनका स्वामित्व नहीं रह गया था। इसके बावजूद बाद में जब उसी कार से शराब बरामद हुई तो पुलिस ने उन्हें भी मामले से जुड़ा हुआ मानते हुए जांच के दायरे में रखा।

जानकारी के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 की रात साहेबपुरकमाल गांव के गैस एजेंसी रोड के पास पुलिस की गश्ती टीम ने एक चारपहिया वाहन को जब्त किया था। इस कार से करीब 77 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई थी। शराब की मात्रा लगभग 154 बोतलों के बराबर बताई गई। इस बरामदगी के बाद 16 अक्टूबर को साहेबपुरकमाल थाने में कांड संख्या 279/26 दर्ज किया गया। मामले की जांच की जिम्मेदारी ASI चंदन कुमार झा को दी गई थी।

अमित कुमार का आरोप था कि उन्होंने जांच अधिकारी को बताया था कि वह कार को शराब बरामद होने से काफी पहले ही बेच चुके हैं। इस संबंध में उन्होंने वाहन बिक्री से जुड़े दस्तावेज और शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया था। उनका दावा था कि इसके बावजूद जांच अधिकारी की ओर से केस से नाम हटाने के बदले रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार उनसे पहले 50 हजार रुपये मांगे गए थे। आरोप यह भी है कि रकम नहीं देने पर केस में उनका नाम शामिल करने की बात कही गई थी। इसी वजह से वह मानसिक दबाव में थे और उन्हें आशंका थी कि बेची जा चुकी कार के मामले में उन्हें परेशान किया जा सकता है।

शिकायतकर्ता अमित कुमार ने बताया कि वह पैसे देने के लिए तैयार हो सकते थे लेकिन कथित तौर पर उनके साथ जिस तरह गाली-गलौज की गई और व्यवहार किया गया उससे उन्हें अच्छा नहीं लगा। इसी बात ने उन्हें निगरानी विभाग तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने 26 अक्टूबर 2026 को पटना स्थित निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने पूरे मामले की जानकारी देते हुए आरोप लगाया कि शराब बरामदगी के केस से उनका नाम हटाने के लिए जांच अधिकारी उनसे पैसे मांग रहे हैं।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपों का सत्यापन कराने का फैसला किया। विभाग की टीम ने 29 अक्टूबर को शिकायत की जांच की। इस दौरान रिश्वत मांगने से संबंधित आरोपों का सत्यापन किया गया। सत्यापन के बाद निगरानी विभाग ने कार्रवाई की योजना बनाई और आरोपी पुलिसकर्मी को रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए जाल बिछाया। इसके लिए शिकायतकर्ता को तय रकम के साथ आरोपी तक पहुंचने के लिए कहा गया।

सोमवार 2 नवंबर 2026 को पटना से निगरानी विभाग की टीम बेगूसराय पहुंची। टीम ने साहेबपुरकमाल प्रखंड मुख्यालय के आसपास ट्रैप की कार्रवाई की तैयारी की। शिकायतकर्ता को केमिकल लगे 29 हजार रुपये दिए गए थे। पहले 50 हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप था लेकिन बाद में कथित तौर पर 29 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। शिकायतकर्ता तय स्थान पर रुपये लेकर पहुंचा और आरोपी ASI से संपर्क किया।

बताया गया कि साहेबपुरकमाल प्रखंड मुख्यालय के मुख्य द्वार के पास रुपये देने की व्यवस्था की गई थी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार रकम एक फोटो स्टेट दुकान के पास दी गई। जैसे ही ASI चंदन कुमार झा ने शिकायतकर्ता से 29 हजार रुपये लिए और उन्हें अपने पास रखा वैसे ही पहले से मौजूद निगरानी विभाग की टीम ने उन्हें पकड़ लिया। टीम ने मौके पर ही रिश्वत की रकम बरामद कर ली। इस कार्रवाई के दौरान आसपास मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई और कुछ ही देर में पूरे इलाके में पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी की चर्चा फैल गई।

निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में निगरानी थाना कांड संख्या 127/26 दर्ज किया गया है। कार्रवाई में निगरानी डीएसपी गौतम शरण ओमी और डीएसपी मोहन कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। टीम ने गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। कुछ रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद आरोपी को बेगूसराय सर्किट हाउस ले जाया गया जहां आवश्यक पूछताछ और कागजी कार्रवाई की गई। इसके बाद उसे आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाने की तैयारी की गई।

इस घटना के सामने आने के बाद साहेबपुरकमाल थाना और जिले के पुलिस महकमे में चर्चा तेज हो गई है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह शराब बरामदगी से जुड़े केस की जांच के दौरान कथित रिश्वत मांगने से संबंधित है। बिहार में शराबबंदी कानून लागू है और शराब की बरामदगी से जुड़े मामलों में पुलिस की जांच और कार्रवाई की अहम भूमिका होती है। ऐसे में जांच अधिकारी पर ही रिश्वत मांगने का आरोप लगना पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है।

पूरे मामले में फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप और निगरानी विभाग की ट्रैप कार्रवाई सामने आई है। आरोपी ASI के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े आरोपों के संबंध में कौन-कौन से तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत मांगने या लेने की शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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