किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर घेरा कमिश्नर कार्यालय, गन्ने के दाम समेत 16 मांगों पर प्रदर्शन

भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक ने गन्ना मूल्य, खाद, बिजली और पानी समेत 16 मांगों को लेकर मेरठ कमिश्नरी का घेराव किया। जानें धरने की पूरी खबर।

मेरठ में भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के कार्यकर्ताओं और किसानों ने कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरना दिया। गन्ने के दाम, खाद, बिजली और पानी समेत 16 मांगों को लेकर मेरठ मंडल के कई जिलों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर जाम भी लगा।

मेरठ: किसानों की समस्याओं को लेकर मंगलवार को मेरठ कमिश्नरी के बाहर काफी हलचल रही। सुबह से ही अलग-अलग जिलों के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर यहां पहुंचने लगे थे। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के बैनर तले जुटे किसानों ने कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया और सड़क पर धरना देकर विरोध जताया। किसानों का कहना है कि खेती से जुड़ी कई परेशानियों का समाधान नहीं हो रहा है। इसी वजह से मंडल स्तर पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया।

मेरठ मंडल के कई जिलों से पहुंचे किसान

भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के जिलाध्यक्ष कालू प्रधान के नेतृत्व में किसानों ने यह धरना शुरू किया। प्रदर्शन में मेरठ के अलावा मंडल के दूसरे जिलों से भी किसान और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए।

किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर घेरा कमिश्नर कार्यालय, गन्ने के दाम समेत 16 मांगों पर प्रदर्शन

किसान अपने ट्रैक्टर और ट्रॉलियों में सवार होकर कमिश्नरी पहुंचे। बड़ी संख्या में वाहनों के पहुंचने से कार्यालय के आसपास की सड़क पर जाम लग गया। इसके बाद किसानों ने वहीं बैठकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिया।

यह धरना किसी एक गांव या जिले की समस्या को लेकर नहीं था। संगठन ने मंडल के अलग-अलग इलाकों में खेती से जुड़ी परेशानियों को उठाने के लिए किसानों को मेरठ बुलाया था।

प्रदर्शन में शामिल किसानों ने साफ किया कि वे अपनी समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाना चाहते हैं। संगठन की ओर से गन्ने के दाम, खाद की उपलब्धता, बिजली और सिंचाई के पानी जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।

दोपहर ढाई बजे धरना स्थल पहुंचे धर्मेंद्र मलिक

भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। वह दोपहर करीब ढाई बजे धरना स्थल पर पहुंचे।

उनके पहुंचने के बाद संगठन के पदाधिकारियों और किसानों ने अपनी मांगों को लेकर चर्चा की। धरने में बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

संगठन ने कुल 16 मांगों को लेकर कमिश्नरी का घेराव किया। इनमें गन्ना मूल्य के अलावा खेती के लिए खाद, बिजली की व्यवस्था और पानी से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं।

मेरठ मंडल में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं। ऐसे में गन्ने के दाम किसानों के लिए अहम मुद्दा है। इसके अलावा फसलों की सिंचाई के लिए बिजली और पानी की जरूरत पड़ती है। खाद की उपलब्धता भी खेती के खर्च और फसल की देखभाल से जुड़ा विषय है।

फिलहाल धरने के दौरान प्रशासन की ओर से मांगों पर क्या आश्वासन दिया गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

आलू की खेती करने वालों को भी मिलेगी राहत

इसी बीच मेरठ के आलू उत्पादक किसानों के लिए उद्यान विभाग की ओर से बीज वितरण की व्यवस्था की गई है। जिले में 30 नवंबर तक किसानों को आलू का बीज उपलब्ध कराया जाएगा।

जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार के मुताबिक, प्रथम सीड साइज के आलू बीज की कीमत 3,630 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। इस पर उद्यान विभाग किसानों को 1,000 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान दे रहा है।

अनुदान घटाने के बाद किसानों को आलू का बीज 2,630 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा। इससे किसानों को खरीदारी के समय पूरी कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी।

पहले आलू का बीज लेने वाले किसानों को 3,630 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान करना पड़ता था। इसके बाद अनुदान की रकम डीबीटी के जरिए उनके बैंक खाते में भेजी जाती थी।

अब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। किसानों को बीज खरीदते समय ही अनुदान का लाभ दिया जा रहा है। यानी उन्हें पहले पूरी रकम जमा करने और फिर सब्सिडी आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

आलू का बीज लेने के लिए कहां करना होगा आवेदन?

मेरठ में आलू का बीज लेने वाले किसानों को उद्यान विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए विभाग ने potato.uphorticulture.in वेबसाइट उपलब्ध कराई है।

किसान यहां आवेदन करके बीज वितरण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। विभाग के अनुसार, इस समय कुफरी बहार, कुफरी फ्राइसोना और कुफरी ख्याति प्रजाति के आलू बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

आलू की खेती करने वाले किसान अपनी जरूरत के मुताबिक बीज का चुनाव कर सकते हैं। हालांकि, आवेदन करने से पहले बीज की उपलब्धता और विभाग की शर्तों की जानकारी लेना जरूरी होगा।

किसानों के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी उपयोगी है क्योंकि उन्हें बीज खरीदते समय ही 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की राहत मिल रही है।

दूसरी ओर, मेरठ कमिश्नरी में हुए प्रदर्शन के बाद अब किसानों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक ने जिन 16 मांगों को लेकर धरना दिया है, उन पर क्या कार्रवाई होती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

खेती-किसानी से जुड़ी सरकारी योजनाओं, अनुदान और स्थानीय खबरों की जानकारी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देखते रहें।

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