अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर सीमित सैन्य हमले किए हैं। ईरानी मीडिया ने पांच धमाकों की जानकारी दी है। हमले के बाद ईरान ने कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। हालांकि, दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी जारी है।
तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच आठ महीने से जारी संघर्ष में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने हमले को सीमित और रक्षात्मक बताया है। दूसरी तरफ ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
केशम द्वीप पर पांच धमाके, अमेरिकी अधिकारियों ने क्या बताया?
ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित केशम द्वीप पर सोमवार, 2 नवंबर की रात कई धमाके हुए। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, द्वीप पर कुछ ही समय के अंतराल में पांच विस्फोटों की आवाज सुनी गई। स्थानीय लोगों ने आसमान में दो विमानों को उड़ते हुए देखने की बात भी कही है। इन धमाकों की खबर सबसे पहले ईरानी मीडिया से सामने आई। इसके बाद अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेना ने इलाके में कुछ ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है।
रॉयटर्स के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह हमला बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं था। अमेरिकी सेना ने उन ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की, जहां से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के जरिए अमेरिकी सैन्य संसाधनों को खतरा बताया गया था। फॉक्स न्यूज ने भी अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान की ओर से अमेरिकी विमान पर हमले के जवाब में यह कार्रवाई हुई थी।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले को लेकर तत्काल कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया। ईरान की ओर से भी नुकसान और हताहतों की संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
मिडटर्म चुनाव से पहले हमले ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में अमेरिकी संसद के निचले सदन की सभी सीटों और सीनेट की कुछ सीटों पर मतदान होना है। ऐसे समय में ईरान पर हुए हमलों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को फिर चर्चा में ला दिया है। ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि वह चुनाव से पहले ईरान पर नए हमले नहीं करेंगे। लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना पिछले कुछ सप्ताह से ईरानी ठिकानों पर छोटे स्तर की कार्रवाई करती रही है।
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि इन हमलों की सार्वजनिक घोषणा इसलिए नहीं की गई, ताकि इसे बड़े युद्ध की दोबारा शुरुआत का संकेत न माना जाए। इससे पहले सोमवार को ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना भी जताई थी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। लेकिन इन बयानों के कुछ ही समय बाद हमले की खबर सामने आने से बातचीत के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ईरान ने कहा- युद्ध रोकने की जिम्मेदारी अमेरिका की
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अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। ईरान की संसद के अध्यक्ष और अमेरिका के साथ बातचीत में प्रमुख भूमिका निभा रहे मोहम्मद बागेर घालीबाफ ने कहा कि उनका देश युद्ध के लिए तैयार है, लेकिन उसने वाशिंगटन को समझदारी भरा जवाब दिया है। घालीबाफ के मुताबिक, अब युद्ध को रोकने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वाशिंगटन ने कोई और सैन्य गलती की, तो ईरान का जवाब पहले से अलग और व्यापक हो सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। मौजूदा हालात को देखते हुए दोनों देशों के बीच गंभीर स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। इस बीच ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने अमेरिका से मिले संदेशों को अपने देश की जीत की स्वीकृति बताया है। हालांकि, यह ईरानी नेतृत्व का दावा है और अमेरिका ने इसे स्वीकार नहीं किया है।
तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ धमकी भरे बड़े पोस्टर भी लगाए गए हैं। इन पोस्टरों से दोनों देशों के बीच बढ़ती नाराजगी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
समझौते के लिए ईरान ने रखीं कई शर्तें
सैन्य तनाव के बीच शांति समझौते की कोशिशें भी जारी हैं। पिछले सप्ताह एक्सियोस ने रिपोर्ट दी थी कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को बातचीत से जुड़ा पत्र भेजा था। ईरान ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए एक प्रस्ताव दिया है। तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिका उसकी शर्तें मान लेता है, तो जलमार्ग से सामान्य आवाजाही बहाल करने की प्रक्रिया दो दिनों में शुरू की जा सकती है।
ईरान की मांग है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी हटाए, तेल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों में राहत दे और क्षेत्र में सैन्य तनाव कम करे। अरागची ने यह भी कहा कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए ईरान और ओमान के बीच तय नए रास्ते को अमेरिका को स्वीकार करना चाहिए। फिलहाल इन शर्तों पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
होर्मुज में तनाव बढ़ा तो दुनिया पर क्या असर होगा?
केशम द्वीप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता रहा है। फरवरी 2026 के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष से इस जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया।
सोमवार को शांति समझौते की उम्मीद बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में सात फीसदी से ज्यादा गिरावट आई थी। लेकिन ताजा हमलों के बाद बाजार की नजर फिर पश्चिम एशिया के हालात पर है।









