Israel Politics: नेतन्याहू के खिलाफ एकजुट हुआ विपक्ष, गादी आइसेनकोट को PM बनाने के लिए बेनेट-लैपिड का समर्थन

Israel Politics: इजरायल में नेतन्याहू के खिलाफ विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। बेनेट और लैपिड ने गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है। जानें मामला

इजरायल में नई सरकार बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने के लिए विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। नाफ्ताली बेनेट, एविग्डोर लिबरमैन और याइर गोलान ने उनका समर्थन किया है। अब फैसला राष्ट्रपति आइजक हरजोग को करना है।

यरुशलम: इजरायल में चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्षी पार्टियां गादी आइसेनकोट के पीछे खड़ी होती दिख रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नाफ्ताली बेनेट और अन्य विपक्षी नेताओं ने आइसेनकोट को अगला प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया है। 

वहीं, याइर लैपिड को संसद का स्पीकर बनाने की मांग भी उठ रही है। हालांकि, किसी भी गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने से नई सरकार का रास्ता अभी आसान नहीं है।

गादी आइसेनकोट के नाम पर विपक्षी दलों में सहमति

इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के बाद किसी भी राजनीतिक गठबंधन को सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली हैं। ऐसे में विपक्षी पार्टियों ने मिलकर नई सरकार बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। सबसे ज्यादा चर्चा याशर पार्टी के नेता गादी आइसेनकोट की हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्री नाफ्ताली बेनेट की बीयाहाड पार्टी ने आइसेनकोट का समर्थन करने का फैसला किया है। 

बेनेट का कहना है कि चुनाव में जनता ने जो फैसला दिया है, उसका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति के सामने आइसेनकोट का नाम रखेगी। बेनेट की पार्टी में पूर्व प्रधानमंत्री याइर लैपिड भी प्रमुख नेता हैं। वह विपक्षी खेमे की बातचीत में शामिल हैं। डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख याइर गोलान और इजरायल बेतेनु पार्टी के नेता एविग्डोर लिबरमैन ने भी आइसेनकोट के पक्ष में समर्थन जताया है।

नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने से लिबरमैन का इनकार

एविग्डोर लिबरमैन ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने की संभावना खारिज कर दी है। सोमवार को उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आइसेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने की सिफारिश करेगी। लिबरमैन ने याइर लैपिड को इजरायल की संसद नीसेट का स्पीकर बनाने का भी समर्थन किया है। फिलहाल इस पद पर नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के अमीर ओहाना हैं।

हालांकि, लिबरमैन ने अल्पमत सरकार बनाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि बिना मजबूत बहुमत वाली सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगी। इससे इजरायल में एक बार फिर चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।

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आइसेनकोट के घर के बाहर प्रदर्शन, बेटे की मौत पर लगाए आरोप

नई सरकार को लेकर चल रही बातचीत के बीच आइसेनकोट के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुआ। रविवार, 1 नवंबर की रात हर्जलिया स्थित उनके आवास के बाहर दक्षिणपंथी प्रदर्शनकारी जमा हुए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति ने आइसेनकोट पर उनके बेटे की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए। आइसेनकोट के बेटे गाल आइसेनकोट की दिसंबर 2023 में गाजा में लड़ाई के दौरान मौत हो गई थी।

प्रदर्शन में उनकी पत्नी हन्ना को भी धमकियां दिए जाने की खबर है। इस मामले में आइसेनकोट ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। याशर पार्टी ने घटना की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक उकसावे का नतीजा बताया। डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता याइर गोलान ने भी प्रदर्शनकारियों के व्यवहार पर नाराजगी जताई और नेतन्याहू के राजनीतिक खेमे को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, ये विपक्षी नेताओं के आरोप हैं।

सरकार बनाने के लिए कितनी सीटों की जरूरत?

इजरायल की संसद नीसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि आइसेनकोट के नेतृत्व वाले चार विपक्षी दलों के पास कुल 48 सीटें हैं। दो अरब पार्टियों के खाते में 19 सीटें गई हैं। अगर अरब पार्टियां भी आइसेनकोट का समर्थन करती हैं, तो उन्हें 67 सांसदों की सिफारिश मिल सकती है। 

लेकिन सरकार बनाने में मुश्किल यह है कि विपक्षी गठबंधन के कुछ नेता अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर रहने के खिलाफ हैं। यही वजह है कि विपक्ष में आइसेनकोट के नाम पर सहमति बनने के बावजूद सरकार का गठन तय नहीं माना जा सकता।

अब राष्ट्रपति हरजोग के फैसले पर टिकी नजर

राष्ट्रपति आइजक हरजोग 4 और 5 नवंबर को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान सभी पार्टियां बताएंगी कि वे किस नेता को सरकार बनाने का मौका देना चाहती हैं। इसके बाद राष्ट्रपति उस सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपेंगे, जिसके सफल होने की संभावना सबसे ज्यादा होगी। संबंधित नेता को गठबंधन तैयार करने के लिए शुरुआत में 28 दिन मिलेंगे। जरूरत पड़ने पर यह अवधि 14 दिन और बढ़ाई जा सकती है।

फिलहाल नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने हुए हैं। दूसरी तरफ आइसेनकोट विपक्षी दलों को साथ लाने में जुटे हैं। अब देखना होगा कि इजरायल में नई सरकार बनती है या राजनीतिक गतिरोध एक और चुनाव की तरफ ले जाता है।

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