अमेरिका और जापान ने AIM-120 AMRAAM मिसाइल को लेकर नया समझौता किया है। इसके तहत जापान में मिसाइल के अलग-अलग पुर्जों को जोड़ने और उनकी जांच करने की सुविधा बनाई जाएगी। इस मिसाइल का इस्तेमाल अमेरिकी F-35 समेत कई लड़ाकू विमानों में होता है।
फिलीपींस: अमेरिका की एक प्रमुख लड़ाकू मिसाइल अब जापान में भी तैयार की जाएगी। दोनों देशों के बीच AIM-120 AMRAAM मिसाइल की असेंबली और जांच को लेकर समझौता हुआ है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 28 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। वह फिलीपींस के सेबू शहर में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मिले थे। इस मुलाकात में दोनों देशों ने हथियारों का उत्पादन बढ़ाने और रक्षा सहयोग को आगे ले जाने पर बातचीत की।
समझौते के बाद जापान में ऐसी सुविधा बनाई जाएगी, जहां अमेरिका की इस मिसाइल के पुर्जों को जोड़कर उसे इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सकेगा। इससे जरूरत के समय मिसाइलों की सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जापान में मिसाइल बनाने का काम कैसे होगा?
जापान और अमेरिका लंबे समय से रक्षा के क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। अब दोनों देशों ने मिलकर AMRAAM मिसाइल की असेंबली का काम जापान में शुरू करने की योजना बनाई है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि मिसाइल का हर पुर्जा जापान में ही बनाया जाएगा। समझौते के तहत वहां अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने और तैयार मिसाइल की जांच करने का इंतजाम होगा।
जापान के रक्षा मंत्री कोइजुमी ने इस फैसले को अपने देश की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बताया है। उनके मुताबिक, इससे जापान को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए मिसाइलें जुटाने में मदद मिलेगी। साथ ही हथियारों से जुड़ी जापानी कंपनियों को भी इस काम में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता है। यह समझौता 'ऑपरेशन सुपरचार्ज' कार्यक्रम का हिस्सा है।
अमेरिका और जापान ने हथियारों का उत्पादन बढ़ाने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया है। हालांकि, जापान में नई सुविधा कहां बनाई जाएगी और वहां एक साल में कितनी मिसाइलें तैयार होंगी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
AMRAAM मिसाइल कितनी ताकतवर है?
AIM-120 AMRAAM अमेरिका की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसे लड़ाकू विमान से दुश्मन के विमान को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। AMRAAM का पूरा नाम एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है। इसकी मदद से पायलट दूर उड़ रहे दुश्मन के विमान पर हमला कर सकता है।
इस मिसाइल की खासियत यह है कि हमला करने के लिए पायलट को दुश्मन का विमान अपनी आंखों से देखना जरूरी नहीं होता। लड़ाकू विमान का रडार सामने मौजूद खतरे का पता लगाता है। इसके बाद पायलट मिसाइल दाग सकता है।
AMRAAM में अपना रडार भी लगा होता है। जब मिसाइल छोड़ी जाती है तो शुरुआत में उसे लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लड़ाकू विमान से जानकारी मिल सकती है। दुश्मन के विमान के करीब पहुंचने पर मिसाइल का अपना रडार उसे पकड़कर आगे बढ़ता है। इससे हमला करने वाले पायलट को हर समय मिसाइल का रास्ता तय करने की जरूरत नहीं रहती।
अमेरिका की रेथियॉन कंपनी इस मिसाइल का निर्माण करती है। कंपनी के अनुसार, 40 से ज्यादा देश इसे खरीद चुके हैं। इसका इस्तेमाल F-15, F-16, F/A-18, F-22 और F-35 जैसे लड़ाकू विमानों में किया जाता है। AMRAAM के कई मॉडल बनाए गए हैं। हर मॉडल की मार करने की दूरी और दूसरी क्षमताएं अलग हो सकती हैं।
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F-35 लड़ाकू विमान के लिए क्यों जरूरी है यह मिसाइल?
अमेरिका का F-35 दुनिया के आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे इस तरह तैयार किया गया है कि दुश्मन के रडार के लिए इसका पता लगाना मुश्किल हो। जापान की वायुसेना भी इस विमान का इस्तेमाल करती है।
AMRAAM मिसाइल F-35 के प्रमुख हथियारों में शामिल है। इस विमान में हथियार रखने के लिए अंदर ही खास जगह बनाई गई है। F-35 अपने भीतर AMRAAM मिसाइल लेकर उड़ सकता है। इससे विमान के बाहर हथियार लगाने की जरूरत कम पड़ती है और रडार से बचने की उसकी क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है।
जापान में मिसाइलों की असेंबली शुरू होने से अमेरिका के साथ उसके रक्षा सहयोग को और बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए नई सुविधा तैयार करनी होगी। मिसाइलों का उत्पादन कब शुरू होगा और जापान को कितनी मिसाइलें मिलेंगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने जापान के साथ मिसाइल बनाने का फैसला क्यों लिया?
पिछले कुछ समय से दुनिया के कई हिस्सों में लड़ाई चल रही है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण आधुनिक हथियारों की मांग बढ़ी है। अमेरिका भी अपने और सहयोगी देशों के लिए मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने में लगा है। दूसरी तरफ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर जापान और अमेरिका चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में दोनों देश अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करना चाहते हैं। जापान में मिसाइलों की असेंबली होने से अमेरिका की फैक्ट्रियों पर काम का दबाव कुछ कम हो सकता है।
दोनों देशों ने समुद्र से दागी जाने वाली SM-3 Block IIA इंटरसेप्टर मिसाइल का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी सहयोग करने पर सहमति जताई है। अमेरिका ने हाल ही में रेथियॉन के साथ AMRAAM मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए 20.7 अरब डॉलर तक का बड़ा समझौता किया है। इसके जरिए आने वाले वर्षों में ज्यादा मिसाइलें तैयार करने की योजना है।
फिलहाल जापान में बनने वाली नई सुविधा की लागत और उसके शुरू होने की तारीख तय नहीं बताई गई है। इसलिए वहां मिसाइलों की असेंबली कब शुरू होगी, यह आगे की घोषणाओं से ही साफ होगा।









