अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले एलन मस्क ने डेमोक्रेटिक पार्टी को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका दावा है कि 2028 में डेमोक्रेट्स को पूरी सत्ता मिली तो अमेरिका एकदलीय व्यवस्था की ओर बढ़ सकता है। मस्क ने इसके पीछे तीन संभावित कारण बताए हैं।
वॉशिंगटन: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क के एक बयान ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है। मस्क ने चेतावनी दी है कि अगर 2028 के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति पद के साथ अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेती है, तो देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए तीन संभावित राजनीतिक बदलावों का जिक्र किया है।
मस्क ने डेमोक्रेट्स की जीत को लेकर क्या कहा?
एलन मस्क ने 30 अक्टूबर को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा चिंता 2028 के चुनाव परिणामों को लेकर है। उनके मुताबिक, अगर डेमोक्रेटिक पार्टी को व्हाइट हाउस, प्रतिनिधि सभा और सीनेट तीनों पर नियंत्रण मिल गया, तो वह अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव कर सकती है। मस्क ने दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका में स्थायी रूप से एक ही पार्टी का दबदबा बन सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र का वास्तविक महत्व खत्म हो सकता है।
हालांकि, यह मस्क का राजनीतिक आकलन है। अमेरिका में किसी एक पार्टी को राष्ट्रपति पद और संसद में बहुमत मिलने का अर्थ अपने आप लोकतंत्र समाप्त होना नहीं है। देश की संवैधानिक व्यवस्था में अदालतों, राज्यों और नियमित चुनावों की अलग-अलग भूमिकाएं हैं।
मस्क ने बताए तीन बड़े खतरे, सुप्रीम कोर्ट को लेकर भी जताई चिंता
मस्क ने अपनी पोस्ट में पहला मुद्दा वॉशिंगटन डीसी और प्यूर्टो रिको को अमेरिकी राज्य का दर्जा देने का उठाया। उनका दावा है कि डेमोक्रेट्स इन दोनों क्षेत्रों को राज्य बनाकर सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। अमेरिका में हर राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं। हालांकि, किसी नए राज्य का गठन होने से उसके सीनेटर हमेशा एक ही पार्टी के होंगे, यह तय नहीं है।
दूसरा मुद्दा अमेरिका की इमिग्रेशन नीति से जुड़ा है। मस्क ने आशंका जताई कि डेमोक्रेट्स देश की सीमाओं को अधिक खुला कर सकते हैं और बिना कानूनी अनुमति के रह रहे प्रवासियों को वैध दर्जा दे सकते हैं। उनके मुताबिक, इससे पार्टी को भविष्य के चुनावों में राजनीतिक फायदा मिल सकता है। हालांकि, अमेरिका में कानूनी निवास का दर्जा मिलने से किसी व्यक्ति को अपने आप संघीय चुनावों में मतदान का अधिकार नहीं मिल जाता। इसके लिए अमेरिकी नागरिकता जरूरी है।
तीसरे मुद्दे में मस्क ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाए जाने की संभावना जताई। फिलहाल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में नौ जज हैं। मस्क का कहना है कि डेमोक्रेट्स संख्या बढ़ाकर अदालत में अपनी विचारधारा के जजों का प्रभाव बढ़ा सकते हैं। हालांकि, जजों की संख्या में बदलाव के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इन तीनों संभावनाओं को मस्क ने अपनी चेतावनी का आधार बनाया है, लेकिन ये कोई तय सरकारी फैसले नहीं हैं।
![]()
रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए मस्क ने खर्च किए करोड़ों डॉलर
मस्क ने अपने बयान में 2029 तक सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के कम से कम 51 सदस्यों की मौजूदगी को जरूरी बताया है। अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं। ऐसे में 51 सीटें सामान्य बहुमत के लिए महत्वपूर्ण हैं। मस्क अमेरिकी चुनावों में आर्थिक रूप से भी सक्रिय हैं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों और उनसे जुड़े राजनीतिक संगठनों को बड़ी रकम दी है।
वॉशिंगटन पोस्ट की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने 2026 के मध्यावधि चुनाव के लिए करीब 44.6 करोड़ डॉलर का राजनीतिक चंदा दिया है। इससे वह आधुनिक अमेरिकी राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े व्यक्तिगत दानदाताओं में शामिल हो गए हैं। मस्क ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अपना राजनीतिक संगठन अमेरिका PAC बनाया था।
यह संगठन मतदाताओं से संपर्क करने और चुनावी गतिविधियों में सहयोग देने का काम करता है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अक्टूबर में अमेरिका PAC को लगभग 7.68 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त रकम भी दी है।
चुनावी सर्वे में क्या तस्वीर, ट्रंप की लोकप्रियता कितनी?
अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इस चुनाव से प्रतिनिधि सभा और सीनेट की राजनीतिक स्थिति तय होगी। वहीं, राष्ट्रपति पद का अगला चुनाव 2028 में होगा। 25 अक्टूबर को जारी CBS News के चुनावी मॉडल में डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा की 229 सीटें मिलने का अनुमान दिया गया था। हालांकि, यह मतदान से पहले का अनुमान है और वास्तविक परिणाम अलग हो सकते हैं।
इस सर्वे में महंगाई और अर्थव्यवस्था मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल रहीं। लोगों के बीच रोजमर्रा के खर्च और आर्थिक स्थिति को लेकर असंतोष दिखाई दिया। इस बीच 26 अक्टूबर को जारी Reuters/Ipsos सर्वे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे पहले सितंबर में अलग-अलग सर्वे में भी उनकी लोकप्रियता को लेकर सवाल सामने आए थे।
ट्रंप ने 27 अक्टूबर को पत्रकारों से कहा था कि वह मध्यावधि चुनाव के नतीजों को स्वीकार करेंगे, बशर्ते चुनाव ईमानदारी से कराए गए हों। उन्होंने जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल करने की संभावना का भी जिक्र किया था।










