ब्राजील चुनाव में हार के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो अमेरिका पहुंचे, ट्रम्प की मदद से 3 देशों के रास्ते निकले

ब्राजील चुनाव में हार के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो परिवार सहित अमेरिका पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने मदद की। भ्रष्टाचार मामलों में जांच जारी है।

ब्राजील का राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो परिवार सहित अमेरिका पहुंच गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनकी मदद की। भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच के बीच बोल्सोनारो अर्जेंटीना और इक्वाडोर होते हुए मियामी पहुंचे।

ब्रासीलिया: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो अपने परिवार के साथ अमेरिका पहुंच गए हैं। भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच का सामना कर रहे बोल्सोनारो ने अदालत के पासपोर्ट जमा कराने के आदेश के बीच देश छोड़ दिया। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके प्रशासन ने बोल्सोनारो को अमेरिका पहुंचने में मदद की। वह अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ ब्राजील से अर्जेंटीना पहुंचे और फिर इक्वाडोर होते हुए 28 अक्टूबर को मियामी पहुंच गए। इस पूरे घटनाक्रम ने ब्राजील और अमेरिका के राजनीतिक संबंधों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

अर्जेंटीना और इक्वाडोर के रास्ते अमेरिका पहुंचे बोल्सोनारो

फ्लावियो बोल्सोनारो ने 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद देश छोड़ने की तैयारी शुरू की थी। रिपोर्ट के अनुसार, वह 27 अक्टूबर की रात परिवार के साथ सड़क मार्ग से अर्जेंटीना पहुंचे। उन्होंने दक्षिणी ब्राजील के फोज दो इगुआसू से अर्जेंटीना के पुएर्तो इगुआसू जाने वाले रास्ते का इस्तेमाल किया। अर्जेंटीना के आव्रजन अधिकारियों के मुताबिक, बोल्सोनारो रात करीब 10 बजकर 50 मिनट पर सीमा पार करके पहुंचे थे।

इसके कुछ समय बाद वह परिवार सहित एक निजी विमान से रवाना हो गए। विमान ईंधन भरने के लिए इक्वाडोर के गुआयाकिल में रुका और वहां से अमेरिका के मियामी के लिए उड़ान भरी। बोल्सोनारो बुधवार, 28 अक्टूबर की सुबह अमेरिका पहुंच गए। रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रा में उन्होंने इतालवी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया। हालांकि, उनके ब्राजील से बाहर निकलने के आधिकारिक रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं।

ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका में रहने की अनुमति दी

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बोल्सोनारो और उनके परिवार को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी परिवार को वीजा उपलब्ध कराने की बात कही थी। अधिकारियों के मुताबिक, बोल्सोनारो को ह्यूमैनिटेरियन पैरोल के तहत अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था विशेष मानवीय परिस्थितियों या सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में इस्तेमाल की जाती है।

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह भी बताया गया है कि बोल्सोनारो भविष्य में स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, अस्थायी प्रवेश की अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें ग्रीन कार्ड या अमेरिकी नागरिकता मिल गई है। उनके छोटे भाई एडुआर्डो बोल्सोनारो पहले से अमेरिका में रह रहे हैं और ट्रम्प प्रशासन के करीबी माने जाते हैं। फ्लावियो के अमेरिका पहुंचने में एडुआर्डो की भूमिका की भी चर्चा है।

भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच

फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ ब्राजील में कई वित्तीय मामलों की जांच चल रही है। इनमें संदिग्ध लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसियां उनके कुछ कारोबारी और वित्तीय संबंधों की पड़ताल कर रही हैं। एक मामला उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए धन जुटाने से भी जुड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, फ्लावियो ने पूर्व बैंकर डेनियल वोरकारो से फिल्म के लिए लगभग 1.2 करोड़ डॉलर जुटाने की कोशिश करने की बात स्वीकार की थी। इसके अलावा एक ऐसे वकील से उनके कथित संबंधों की जांच भी की जा रही है, जिस पर ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप हैं। हालांकि, बोल्सोनारो ने अपने खिलाफ लगाए गए गलत काम के आरोपों से इनकार किया है। अदालत ने उन्हें पासपोर्ट जमा कराने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बाद वह देश से बाहर चले गए।

चुनाव में लूला से करीब 44 लाख वोटों से हारे

ब्राजील में 25 अक्टूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया था। आधिकारिक परिणाम के अनुसार, लूला को 51.79 प्रतिशत और बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत वोट मिले। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब 44.3 लाख वोटों का अंतर रहा। इसके साथ ही लूला ने राष्ट्रपति के रूप में अपना अगला कार्यकाल हासिल कर लिया।

फ्लावियो ने चुनाव परिणाम स्वीकार करने से इनकार करते हुए मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में गड़बड़ी हुई और उनके खिलाफ सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, चुनाव परिणाम बदलने लायक धांधली के उनके दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं। दूसरी ओर, ट्रम्प ने बोल्सोनारो का समर्थन किया और ब्राजील के चुनाव को लेकर सवाल उठाए।

अमेरिका पहुंचने के बाद फ्लावियो ने एक बयान में खुद को ब्राजील का वैध राष्ट्रपति बताया था। बाद में इस बयान को हटाकर उन्होंने खुद को देश का नेता बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि राजनीतिक उत्पीड़न के कारण उन्हें ब्राजील छोड़ना पड़ा। इसके लिए उन्होंने ट्रम्प और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति का आभार भी जताया। वहीं, लूला ने बोल्सोनारो के देश छोड़ने की आलोचना की है। अब यह मामला सिर्फ ब्राजील की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अमेरिका के साथ उसके संबंधों और न्यायिक कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। 

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