संतकबीर नगर के कृषि विज्ञान केंद्र बगही में लगे मौसम सूचक संयंत्र ने काम शुरू कर दिया है। इसके जरिए 30 और 31 अक्टूबर को बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल, अनाज और भूसा सुरक्षित रखने की सलाह दी है।
संतकबीर नगर: उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले में अब मौसम की जानकारी स्थानीय स्तर पर मिलने लगी है। कृषि विज्ञान केंद्र बगही में स्थापित मौसम सूचक संयंत्र ने काम करना शुरू कर दिया है। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जिले के लिए बारिश और तेज हवाओं का पहला अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वानुमान के मुताबिक, 30 और 31 अक्टूबर को जिले के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।
बगही कृषि विज्ञान केंद्र से मिला बारिश का पहला अलर्ट
संतकबीर नगर के मलौली क्षेत्र स्थित कृषि विज्ञान केंद्र बगही में लगाए गए मौसम सूचक संयंत्र से स्थानीय मौसम की जानकारी मिलने लगी है। संयंत्र के सक्रिय होने के बाद पहली बार जिले में बारिश और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इससे किसानों को मौसम में होने वाले बदलाव की जानकारी पहले ही मिल सकेगी और वे खेती से जुड़े जरूरी फैसले समय रहते ले सकेंगे।
पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार 30 अक्टूबर को जिले में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज बौछारें पड़ने की संभावना है। शनिवार 31 अक्टूबर को भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। हालांकि, हवा की वास्तविक रफ्तार स्थान और मौसम की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
मौसम में इस बदलाव को देखते हुए किसानों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों ने भी संभावित बारिश के दौरान फसल बचाने के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
मौसम सूचक संयंत्र से मिलने वाले स्थानीय आंकड़े खेती के लिए उपयोगी हो सकते हैं। खासकर बारिश, तापमान और हवा की स्थिति का समय पर पता चलने से किसान कटाई, सिंचाई और दूसरे कृषि कार्यों की बेहतर योजना बना सकेंगे।
बारिश से बचाने के लिए कटी फसल और अनाज को सुरक्षित रखें
कृषि वैज्ञानिक सीपीएन गौतम और उनकी टीम ने मौसम में बदलाव की आशंका को देखते हुए किसानों से अपनी फसल और अनाज की सुरक्षा पर ध्यान देने को कहा है। खासकर उन किसानों को सावधानी बरतने की जरूरत है, जिनकी फसल कटाई के बाद अभी खेत में ही पड़ी है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि बारिश शुरू होने से पहले कटी हुई फसल को खेत से उठाकर सुरक्षित जगह रख लेना चाहिए। खुले में रखी फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। ज्यादा देर तक नमी रहने पर उपज को नुकसान भी पहुंच सकता है। ऐसे में किसान मौसम साफ रहने के दौरान ही फसल समेट लें।
अनाज और भूसे को लेकर भी यही सावधानी बरतने को कहा गया है। जिन किसानों के पास पक्का गोदाम या भंडारण की जगह नहीं है, वे तिरपाल का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे कि तिरपाल ठीक से बंधा हो, ताकि हवा चलने पर हटे नहीं और बारिश का पानी अंदर न जाए।
अनाज की बोरियां सीधे जमीन पर रखने से भी बचना चाहिए। इन्हें किसी ऊंची और सूखी जगह पर रखने से नीचे की नमी से बचाया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश आने के बाद फसल बचाने की भागदौड़ करने से बेहतर है कि किसान पहले ही जरूरी इंतजाम कर लें।
खेत में पानी न रुके, निकासी के रास्ते पहले जांच लें
बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत है। खासकर निचले इलाकों में बने खेतों में बारिश का पानी रुक सकता है। जिन खेतों की मिट्टी पहले से गीली है, वहां जलभराव होने पर खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा है कि वे अपने खेतों की मेड़ और पानी निकलने वाले रास्ते देख लें। जहां मिट्टी या कचरा जमा होने से निकासी बंद है, उसे साफ कर दें। जरूरत के हिसाब से पानी बाहर निकालने के लिए नाली भी बनाई जा सकती है।
तेज हवा और बिजली चमकने के दौरान खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी गई है। यदि काम करते समय अचानक मौसम बिगड़ जाए तो खुले मैदान में रुकने के बजाय सुरक्षित इमारत में चले जाएं। बिजली कड़कने के दौरान पेड़ के नीचे खड़े होना खतरनाक हो सकता है।
किसानों को कीटनाशक और दूसरे कृषि रसायनों का छिड़काव भी मौसम देखकर करने को कहा गया है। बारिश से ठीक पहले छिड़काव करने पर दवा पानी के साथ बह सकती है। इससे मेहनत और खर्च दोनों बेकार हो सकते हैं। इसलिए छिड़काव के लिए ऐसा समय चुनना चाहिए, जब बारिश की आशंका न हो।
कृषि विज्ञान केंद्र में मौसम सूचक संयंत्र के काम शुरू करने से किसानों को अब अपने इलाके के मौसम की जानकारी मिलने में मदद होगी। बारिश, हवा और मौसम के बदलाव से जुड़े आंकड़ों के आधार पर किसान फसल कटाई, सिंचाई और दूसरे जरूरी कामों का समय तय कर सकेंगे।








