कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जनता दल सेक्युलर गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा को तीन और जेडीएस को एक सीट मिली, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने जीत पर खुशी जताते हुए कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग के मुद्दे पर घेरा और कहा कि गठबंधन उम्मीदवारों ने सीधे मुकाबले में जीत हासिल की है।
बेंगलुरु कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। भाजपा और जनता दल सेक्युलर (JD-S) के उम्मीदवारों ने सभी चार सीटें जीत ली हैं। इस जीत के बाद केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के चारों उम्मीदवारों को जीत के लिए क्रॉस वोटिंग का सहारा नहीं लेना पड़ा। कुमारस्वामी ने कांग्रेस को पिछले राज्यसभा चुनाव की याद दिलाते हुए कहा कि दूसरों के वोट के सहारे जीतने वालों को अब अपने राजनीतिक फैसलों पर विचार करना चाहिए।
चारों सीटों पर NDA की जीत, कांग्रेस का खाता नहीं खुला
कर्नाटक में 23 अक्टूबर को विधान परिषद की चार सीटों के लिए मतदान हुआ था। इनमें दो शिक्षक और दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई और 28 अक्टूबर तक सभी सीटों के नतीजे सामने आ गए।
भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। वहीं, उसकी सहयोगी जनता दल सेक्युलर ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस से छीन लिया। इन परिणामों से भाजपा-जेडीएस गठबंधन को राजनीतिक मजबूती मिली है। दूसरी ओर, राज्य में सरकार चला रही कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
क्रॉस वोटिंग को लेकर कुमारस्वामी ने क्या कहा?
चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि NDA के चारों विजेता उम्मीदवारों को क्रॉस वोटिंग के जरिए जीत हासिल नहीं हुई है।
उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पूर्व में राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग का फायदा उठाने वाले नेताओं को अब आत्ममंथन करना चाहिए। कुमारस्वामी ने यह भी चेतावनी दी कि क्रॉस वोटिंग में शामिल लोगों को अपने फैसलों के राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
उनका बयान कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के बीच पहले से चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच आया है। हालांकि, कुमारस्वामी के ये राजनीतिक आरोप और टिप्पणियां हैं। इनसे किसी विशेष नेता या विधायक द्वारा अनुचित क्रॉस वोटिंग किए जाने की पुष्टि नहीं होती।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस ने कांग्रेस को हराया
इस चुनाव में बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम खास चर्चा में रहा। यहां जनता दल सेक्युलर के ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस उम्मीदवार और पांच बार विधान परिषद सदस्य रह चुके पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट हासिल हुए।
पुट्टन्ना पहले जनता दल सेक्युलर में थे, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उन्होंने 2024 के उपचुनाव में रंगनाथ को हराया था। इस बार नतीजा उलट गया और जेडीएस ने भाजपा के समर्थन से यह सीट जीत ली। कुमारस्वामी और भाजपा नेताओं ने इसे गठबंधन के बेहतर तालमेल का नतीजा बताया है।
भाजपा ने तीनों सीटों पर बनाए रखा कब्जा
भाजपा ने अपने हिस्से की तीनों विधान परिषद सीटों पर जीत हासिल की। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के शशिल जी. नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मट्टूर को 3,297 वोटों से हराया। नमोशी को 15,596 और मट्टूर को 12,299 वोट मिले। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के एस.वी. संकनूर ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिंबिकाई को 9,323 वोटों से हराया।
दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर भाजपा के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस के शशि हुलिकुंटे मठ को 23,098 वोटों के अंतर से हराया। इन तीनों सीटों को बचाकर भाजपा ने शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी चुनावी पकड़ बनाए रखने का दावा किया है।
आर. अशोक ने विधानसभा चुनाव को लेकर किया बड़ा दावा
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी चारों सीटों की जीत पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि भाजपा और जेडीएस के बीच बेहतर तालमेल रहा तो अगले विधानसभा चुनाव में गठबंधन को बड़ा फायदा मिल सकता है। अशोक ने दावा किया कि दोनों पार्टियां एकजुट होकर चुनाव लड़ें तो 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में 160 से अधिक सीटें जीत सकती हैं।
उन्होंने बेंगलुरु शिक्षक सीट पर ए.पी. रंगनाथ की जीत को गठबंधन कार्यकर्ताओं और नेताओं के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया। साथ ही कांग्रेस उम्मीदवार पुट्टन्ना की हार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए राजनीतिक झटका करार दिया। हालांकि, 160 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने की बात विपक्षी नेता का राजनीतिक अनुमान है, चुनावी सर्वेक्षण या भविष्य का निश्चित परिणाम नहीं।
बैलेट पेपर से हुआ था विधान परिषद चुनाव
कर्नाटक की चारों विधान परिषद सीटों पर मतदान ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराया गया था। इन चुनावों में सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता हिस्सा नहीं लेते। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए निर्धारित पात्रता रखने वाले पंजीकृत मतदाता ही वोट डालते हैं। चारों सीटों पर कुल 43 उम्मीदवार मैदान में थे। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 81.98 प्रतिशत और उत्तर-पूर्व शिक्षक क्षेत्र में 86.97 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।
दक्षिण-पूर्व स्नातक क्षेत्र में 73.58 प्रतिशत और पश्चिम स्नातक क्षेत्र में 75.62 प्रतिशत वोट पड़े। इन आंकड़ों से पता चलता है कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
कर्नाटक की राजनीति पर क्या होगा असर?
विधान परिषद चुनाव में मिली जीत से भाजपा-जेडीएस गठबंधन का उत्साह बढ़ा है। दोनों दल इसे आगे होने वाले चुनावों की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए चारों सीटों पर हार अपने संगठन और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच समर्थन की समीक्षा करने का अवसर है।
हालांकि, विधान परिषद की इन चार सीटों के परिणाम से राज्य की कांग्रेस सरकार के बहुमत या स्थिरता पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। अब देखना होगा कि भाजपा और जेडीएस इस जीत के बाद अपने राजनीतिक तालमेल को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।









