वाराणसी स्नातक एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को हराया है। तीन दिन चली मतगणना के बाद गुरुवार को नतीजा सामने आया। शिक्षक सीट पर पहले ही लाल बिहारी यादव की जीत से सपा ने दोनों सीटें अपने नाम कर ली हैं।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वाराणसी खंड स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है। सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को हराया। मंगलवार से शुरू हुई मतगणना गुरुवार, 29 अक्टूबर को तीसरे दिन पूरी हुई। शुरुआती दौर से ही आशुतोष बढ़त बनाए हुए थे। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लाल बिहारी यादव की जीत के बाद स्नातक सीट भी सपा के खाते में गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में इन दोनों चुनाव नतीजों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन दिन चली मतगणना के बाद आया नतीजा
वाराणसी की पहड़िया मंडी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नवीन मंडी परिसर में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के वोटों की गिनती की गई। मंगलवार को शुरू हुई मतगणना गुरुवार तक जारी रही।
इस दौरान कई बार मतगणना की रफ्तार धीमी पड़ी। बुधवार को पांचवें दौर की गिनती के समय आपत्तियों और विवाद के कारण करीब तीन घंटे काम प्रभावित हुआ। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मतों की गिनती दोबारा शुरू हुई।
गुरुवार सुबह से सपा उम्मीदवार की बढ़त लगातार बनी रही। जैसे-जैसे दूसरे वरीयता के मतों की गणना आगे बढ़ी, दोनों उम्मीदवारों के बीच अंतर स्पष्ट होता गया।
आशुतोष सिन्हा को कितने वोट मिले?
प्रथम वरीयता के नौवें दौर तक आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट मिले थे। वहीं, भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को 33,478 मत प्राप्त हुए थे। इस चरण में दोनों उम्मीदवारों के बीच 16,984 वोटों का अंतर था।
चूंकि प्रथम वरीयता में जीत के लिए जरूरी मत नहीं मिले थे, इसलिए दूसरे वरीयता के मतों की गिनती भी करनी पड़ी।
गुरुवार दोपहर तक मतों का अंतर और बढ़ गया। बाद में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, आशुतोष सिन्हा ने 18 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में अंतिम वोटों की पूरी संख्या एक समान नहीं है।
केदारनाथ सिंह ने स्वीकार किया चुनाव परिणाम
मतगणना के दौरान भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर मतदाताओं का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन वह जनादेश को लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करते हैं।
केदारनाथ सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव में हार के बाद भी जनसेवा का उनका काम जारी रहेगा।
उनके इस संदेश के बाद भाजपा की हार लगभग स्पष्ट हो गई थी। हालांकि, उस समय दूसरे वरीयता के मतों की गिनती पूरी नहीं हुई थी।
शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव पहले ही जीत चुके
वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को हराया था।
लाल बिहारी यादव को 10,958 मत मिले, जबकि प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,060 वोट प्राप्त हुए। दोनों के बीच 4,898 मतों का अंतर रहा।
इस नतीजे के बाद समाजवादी पार्टी ने शिक्षक सीट अपने पास बरकरार रखी। अब स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आशुतोष सिन्हा की जीत के साथ वाराणसी की दोनों एमएलसी सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं।
बारिश के बीच सपा कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न
गुरुवार को मतगणना स्थल के बाहर सपा कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी रही। आशुतोष सिन्हा की बढ़त बढ़ने के साथ समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया।
वाराणसी में बारिश के बावजूद पार्टी कार्यकर्ता मतगणना स्थल के आसपास मौजूद रहे। परिणाम सामने आने के बाद समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और रंग-गुलाल के साथ जीत का जश्न मनाया।
आशुतोष सिन्हा ने अपनी जीत का श्रेय पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत को दिया। उन्होंने इसे आम लोगों की समस्याओं और मुद्दों से जुड़ी जीत बताया।
वाराणसी की दोनों सीटें जीतने के क्या हैं मायने?
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। ऐसे में यहां हुए विधान परिषद चुनाव के नतीजों पर राजनीतिक दलों की नजर थी।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं। इन सीटों के लिए निर्धारित पात्रता वाले मतदाता ही वोट डालते हैं।
इसलिए दोनों एमएलसी सीटों के नतीजों को पूरे वाराणसी लोकसभा क्षेत्र या विधानसभा मतदाताओं की राय का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता।
हालांकि, इन परिणामों ने विधान परिषद में वाराणसी से समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है।
आशुतोष सिन्हा की जीत के बाद पार्टी के सामने स्नातकों से जुड़े रोजगार, शिक्षा और अन्य मुद्दों को विधान परिषद में उठाने की जिम्मेदारी भी होगी।









