सेना के ड्रोन प्रोजेक्ट का 3.50 करोड़ वाला दावा फर्जी, हॉस्टल से गिरे छात्र सर्वेश की हालत गंभीर

हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा का 3.50 करोड़ का ड्रोन प्रोजेक्ट फर्जी निकला। छात्र हॉस्टल से गिरकर गंभीर घायल हुआ। पुलिस जांच जारी है।

हमीरपुर के पॉलिटेक्निक छात्र सर्वेश शर्मा को सेना के लिए ड्रोन बनाने का 3.50 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मिलने का दावा फर्जी निकला है। iDEX-DIO ने इसका खंडन किया है। इसी बीच छात्र हॉस्टल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में पढ़ने वाले सर्वेश शर्मा को लेकर सामने आई एक खबर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर में दावा किया गया था कि सर्वेश को भारतीय सेना के लिए ड्रोन बनाने का 3.50 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मिला है। अब रक्षा मंत्रालय से जुड़े iDEX-DIO ने इस दावे को गलत बताया है। इसी बीच 28 अक्टूबर को सर्वेश हॉस्टल की इमारत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस घटना की जांच कर रही है।

3.50 करोड़ के ड्रोन प्रोजेक्ट की खबर कैसे फैली?

हमीरपुर के बड़ू स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में सर्वेश शर्मा कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर का छात्र है। वह ड्रोन तकनीक पर काम करने के कारण सितंबर में चर्चा में आया था।

उस समय खबर सामने आई थी कि भारतीय सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के उसके प्रोजेक्ट को 3.50 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिली है।

सेना के ड्रोन प्रोजेक्ट का 3.50 करोड़ वाला दावा फर्जी, हॉस्टल से गिरे छात्र सर्वेश की हालत गंभीर

बताया गया था कि सर्वेश को सेना के लोगो वाला एक पत्र मिला था, जिसमें इस प्रोजेक्ट का जिक्र था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने भी उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी उपलब्धि को सार्वजनिक किया।

यह खबर कई मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुई। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने भी सितंबर में सर्वेश को सम्मानित किया था।

हालांकि, जिस आर्थिक सहायता का दावा किया गया था, उसकी अब आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, बल्कि संबंधित रक्षा संगठन ने उसे फर्जी बताया है।

iDEX-DIO ने प्रोजेक्ट मिलने के दावे को बताया फर्जी

रक्षा मंत्रालय से जुड़े डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) और इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी किया।

संगठन ने बताया कि सर्वेश शर्मा को सेना के लिए ड्रोन विकसित करने के नाम पर 3.50 करोड़ रुपये का iDEX अनुदान मिलने की खबर गलत है।

संगठन के मुताबिक, यह दावा करीब दो महीने से इंटरनेट पर फैल रहा था। उसने लोगों से रक्षा परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि करने की अपील की है।

हालांकि, अनुदान का दावा गलत होने का मतलब यह नहीं है कि सर्वेश ने ड्रोन तकनीक पर कोई काम नहीं किया। उसके द्वारा कम लागत वाला ड्रोन मॉडल तैयार किए जाने की खबरें पहले भी सामने आ चुकी हैं।

कॉलेज प्रिंसिपल को 15 अक्टूबर को आया था फोन

कॉलेज के प्रिंसिपल चंद्रशेखर के अनुसार, उन्हें 15 अक्टूबर को सेना की ओर से एक फोन आया था। इसके बाद प्रोजेक्ट से जुड़े दावों की जांच शुरू हुई।

बताया गया कि 27 अक्टूबर को सेना के अधिकारियों ने सर्वेश का रिकॉर्ड भी मांगा। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने छात्र से बातचीत की।

इस घटनाक्रम के दौरान प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों और पहले सामने आई जानकारी पर सवाल उठने लगे।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सेना के नाम से कथित पत्र किसने तैयार किया था और वह सर्वेश तक कैसे पहुंचा। साइबर धोखाधड़ी हुई थी या नहीं, इसकी भी स्वतंत्र जांच से पुष्टि होना बाकी है।

28 अक्टूबर को हॉस्टल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुआ छात्र

इसी बीच बुधवार, 28 अक्टूबर को सर्वेश शर्मा कॉलेज के हॉस्टल की इमारत से नीचे गिर गया।

घटना के बाद उसे तुरंत डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उसके पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। बेहतर उपचार के लिए उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। उपलब्ध खबरों में उसके चंडीगढ़ पहुंचने को लेकर अलग-अलग जानकारी है।

सर्वेश के पिता मजदूरी करते हैं। परिवार के लिए यह घटना चिंता का विषय बनी हुई है।

हॉस्टल के कमरा नंबर 302 तक पहुंची पुलिस

घटना की सूचना मिलने के बाद हमीरपुर पुलिस कॉलेज के हॉस्टल पहुंची। पुलिस ने उस स्थान की जांच की, जहां से छात्र के गिरने की बात सामने आई है।

शुरुआती जानकारी में हॉस्टल के कमरा नंबर 302 और उसकी बालकनी का जिक्र किया गया है।

कुछ रिपोर्टों में सर्वेश के तीसरी मंजिल से गिरने की बात कही गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में दूसरी मंजिल का उल्लेख है।

पुलिस अधीक्षक बलवीर ठाकुर के अनुसार, छात्र के गिरने की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

छात्र को चक्कर आने से संतुलन बिगड़ने की संभावना भी सामने आई है, लेकिन किसी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी घटना की वजह

सर्वेश के हॉस्टल से गिरने और ड्रोन प्रोजेक्ट का दावा फर्जी निकलने की घटनाएं लगभग एक ही समय पर सामने आई हैं। हालांकि, इनके बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में छात्र के गिरने को कथित साइबर फ्रॉड या किसी मानसिक दबाव का नतीजा मानना अभी जल्दबाजी होगी।

फिलहाल पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों की वास्तविकता और छात्र के घायल होने की परिस्थितियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

इस मामले में आगे की जानकारी पुलिस जांच, कॉलेज प्रशासन और डॉक्टरों की आधिकारिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगी।

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