दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की रैली को अभिजीत दिपके की CJP ने समर्थन दिया है। दिपके ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगा है।
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिल गया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली की तैयारी कर रहे हैं।
अभिजीत दिपके ने क्यों मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा?
अभिजीत दिपके ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जनता का भरोसा सबसे जरूरी है। उनके मुताबिक, SIR प्रक्रिया के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार यह भरोसा खो चुके हैं।
दिपके का कहना है कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी हर योग्य नागरिक को वोट देने का अवसर उपलब्ध कराना है। किसी भी पात्र व्यक्ति को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि CJP उन संगठनों के साथ खड़ी रहेगी, जो देश में निष्पक्ष चुनाव और मतदाताओं के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।
SIR को लेकर कांग्रेस और विपक्ष क्यों कर रहे विरोध?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कई महीनों से चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने वोट चोरी के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। विपक्ष की आपत्ति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से भी जुड़ी है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में योग्य मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है।
हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन्हें साबित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने का फैसला किया है। रैली में चुनाव आयोग की जवाबदेही और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई जाएगी।
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रामलीला मैदान में रैली के लिए पुलिस ने क्या शर्तें रखीं?
दिल्ली पुलिस ने विपक्ष की रैली के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया है। हालांकि, आयोजकों को कई नियमों का पालन करना होगा। मैदान के लिए संबंधित प्राधिकरण की अनुमति भी जरूरी है। रैली सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित करने की अनुमति दी गई है। कार्यक्रम का समय बढ़ाने की इजाजत नहीं होगी।
सुरक्षा के लिए मैदान में HD CCTV कैमरे लगाने होंगे। कम से कम पांच मॉनिटर वाला कंट्रोल रूम भी बनाना होगा। आयोजकों को पीने के पानी, शौचालय और भीड़ संभालने के लिए वॉलंटियर्स की व्यवस्था करनी होगी। मैदान में रात गुजारने या वहां से किसी दूसरे स्थान तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं है। पुलिस ने मंच से भड़काऊ भाषण देने और शांति व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगाई है।
30 अक्टूबर को खरगे के घर जुटेंगे विपक्षी नेता
रामलीला मैदान की रैली से पहले INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास, 10 राजाजी मार्ग पर 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे यह कार्यक्रम प्रस्तावित है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इसमें मॉक पार्लियामेंट के जरिए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'पब्लिक इम्पीचमेंट' किया जाएगा।
यह राजनीतिक विरोध का प्रतीकात्मक कार्यक्रम होगा, न कि संवैधानिक महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया। इससे पहले कार्यक्रम के लिए दूसरे स्थानों पर अनुमति नहीं मिलने का दावा कांग्रेस ने किया था। विपक्षी सांसदों को भी 30 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने के लिए कहा गया है।
CJP के समर्थन के बाद अब क्या होगा?
अभिजीत दिपके के ऐलान से साफ है कि CJP भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की मांगों का समर्थन कर रही है। फिलहाल कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का ध्यान 30 अक्टूबर के कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली पर है। इन दोनों आयोजनों में विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों और मांगों को सामने रखेगा। अब देखना होगा कि रैली में विपक्ष आगे की क्या रणनीति घोषित करता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है।










