तमिलनाडु में 634 करोड़ रुपये के कथित नौकरी घोटाले की जांच तेज हो गई है। भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को डीएमके नेता और पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू के तिरुचिरापल्ली स्थित आवास सहित राज्य के 25 ठिकानों पर तलाशी शुरू की। मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई की है।
तिरुचिरापल्ली: तमिलनाडु में सरकारी नौकरियों के बदले पैसे लेने के कथित घोटाले की जांच में गुरुवार, 29 अक्टूबर को बड़ी कार्रवाई हुई। राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के वरिष्ठ नेता के.एन. नेहरू के घर पर छापेमारी की। तिरुचिरापल्ली के थिल्लई नगर स्थित उनके आवास पर सुबह करीब सात बजे तलाशी शुरू हुई। इसी दौरान चेन्नई समेत राज्य के कुल 25 ठिकानों पर भी जांच टीमों ने कार्रवाई की। यह मामला नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग में सरकारी नौकरियों के बदले कथित रूप से पैसे वसूलने से जुड़ा है।
सुबह सात बजे के.एन. नेहरू के घर पहुंची DVAC टीम
गुरुवार सुबह पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में DVAC की टीम तिरुचिरापल्ली के थिल्लई नगर पहुंची। अधिकारियों ने पूर्व मंत्री के आवास पर तलाशी शुरू की और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब तलाशी शुरू हुई, उस समय के.एन. नेहरू घर पर ही मौजूद थे।
कार्रवाई की जानकारी मिलते ही डीएमके के कार्यकर्ता और समर्थक उनके आवास के बाहर जमा होने लगे। इस दौरान स्थानीय पुलिस भी मौके पर मौजूद रही।
जांच एजेंसी ने तिरुचिरापल्ली के अलावा चेन्नई और दूसरे स्थानों पर भी तलाशी ली। अधिकारियों का ध्यान उन दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन पर है, जिनसे कथित भर्ती घोटाले की जानकारी मिल सकती है।
634 करोड़ रुपये के कथित नौकरी घोटाले का मामला
यह मामला तमिलनाडु के नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग (MAWS) से जुड़ा है। के.एन. नेहरू पिछली डीएमके सरकार में इस विभाग के मंत्री थे। आरोप है कि विभाग में सरकारी पदों पर नियुक्तियां दिलाने के बदले उम्मीदवारों से रिश्वत ली गई थी। कथित अनियमितताओं की रकम करीब 634 करोड़ रुपये बताई गई है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और कथित रूप से वसूली गई रकम किन व्यक्तियों या खातों तक पहुंची। हालांकि, अभी आरोपों की जांच चल रही है। किसी व्यक्ति के घर पर तलाशी होने का मतलब यह नहीं है कि उसके खिलाफ अपराध साबित हो गया है।
मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच में आई तेजी
इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अक्टूबर 2025 में भर्ती से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी राज्य पुलिस को दी थी। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा। मद्रास हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले की विस्तृत जांच का रास्ता साफ किया।
अदालत के निर्देश के बाद DVAC ने के.एन. नेहरू और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। हाल ही में हाईकोर्ट ने उस आदेश की समीक्षा करने की मांग वाली नेहरू की याचिका भी खारिज कर दी। इसके बाद जांच एजेंसी की कार्रवाई आगे बढ़ी।
सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे के.एन. नेहरू
मद्रास हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद के.एन. नेहरू ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने हाईकोर्ट के 26 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। यह याचिका उस फैसले से जुड़ी है, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज मामले पर पुनर्विचार की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
कानूनी प्रक्रिया जारी रहने के बीच DVAC ने गुरुवार को राज्यभर में तलाशी अभियान चलाया। अब आगे की कार्रवाई जांच में मिलने वाले दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
सितंबर में भी नेहरू से जुड़े ठिकानों पर हुई थी तलाशी
के.एन. नेहरू से जुड़े ठिकानों पर यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले सितंबर 2026 में भी DVAC ने उनके आवास और अन्य परिसरों में तलाशी ली थी। उस समय जांच नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग में सरकारी ठेके देने से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर केंद्रित थी।
आरोप था कि विभाग में 2021 से 2025 के बीच दिए गए कुछ ठेकों में भ्रष्टाचार हुआ। उस मामले में भी अधिकारियों ने कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की थी। हालांकि, भर्ती घोटाले और ठेकों से जुड़े आरोप अलग-अलग जांच विषय हैं। दोनों मामलों में आरोपों की कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
चेन्नई में नेहरू के भाई के घर भी जांच
गुरुवार की कार्रवाई के दौरान चेन्नई के आरए पुरम इलाके में के.एन. नेहरू के भाई के आवास की भी तलाशी ली गई। जांच अधिकारी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक सभी 25 ठिकानों से जब्त सामग्री का पूरा आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया था।
यह भी स्पष्ट नहीं हुआ था कि गुरुवार की कार्रवाई में किसी नई गिरफ्तारी की गई है या नहीं।फिलहाल DVAC की जांच जारी है। जांच एजेंसी की अगली रिपोर्ट और अदालत की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगा कि कथित घोटाले में किसकी क्या भूमिका रही है।










