इंस्टाग्राम पर कार्रवाई से भड़के अभिजीत दीपके, सरकार पर सेंसरशिप का आरोप, बोले- सवालों की वजहें नहीं मिटेंगी

इंस्टाग्राम पोस्ट और अकाउंट हटाए जाने पर अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर सेंसरशिप का आरोप लगाया। कहा कि अकाउंट हटाने से लोगों के सवाल खत्म नहीं होंगे।

इंस्टाग्राम पर अकाउंट्स और पोस्ट हटाने की कार्रवाई को लेकर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने से लोगों की समस्याएं खत्म नहीं होंगी, बल्कि सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है।

नई दिल्ली: देश में सोशल मीडिया पोस्ट और अकाउंट्स पर लगाई जा रही पाबंदियों को लेकर विवाद बढ़ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इंस्टाग्राम से पोस्ट हटाने या अकाउंट बंद करने से लोगों की नाराजगी दूर नहीं होगी। उनके मुताबिक, सरकार को सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों की असली वजहों पर ध्यान देना चाहिए।

इंस्टाग्राम अकाउंट बंद करने पर अभिजीत दीपके ने क्या कहा?

अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट और अकाउंट बंद किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हजारों पोस्ट और अकाउंट हटाने से लोगों की आवाज बंद नहीं की जा सकती। दीपके का कहना है कि लोग इंस्टाग्राम पर अपनी परेशानी बताते हैं और सरकार से सवाल पूछते हैं। लेकिन ये परेशानियां सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं हैं। बेरोजगारी और सरकारी कामकाज जैसे मुद्दों पर लोग जवाब चाहते हैं। ऐसे में उनके अकाउंट बंद करने से असली समस्या खत्म नहीं होगी।

उन्होंने इस कार्रवाई को सेंसरशिप बताया। दीपके के मुताबिक, लोगों को बोलने से रोकने के बजाय सरकार को उनकी शिकायतों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की पाबंदियों से लोगों का सरकार पर भरोसा और कम हो सकता है। 

आशुतोष रांका ने भी सरकार पर लगाए आरोप

अभिजीत दीपके से पहले CJP के नेता आशुतोष रांका ने भी इंस्टाग्राम पर हो रही कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने एक्स पर दावा किया कि भारत में हजारों इंस्टाग्राम अकाउंट बंद या प्रतिबंधित किए गए हैं। इसके अलावा लाखों वीडियो भी हटाए गए हैं। रांका ने इस मामले में केंद्र सरकार और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा की आलोचना की। 

उनका आरोप है कि सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों के पोस्ट और वीडियो हटाए जा रहे हैं। हालांकि, रांका ने जितने अकाउंट और वीडियो हटाए जाने की बात कही है, उन आंकड़ों की अलग से पुष्टि नहीं हुई है। 

अखिलेश यादव और आकाश बनर्जी ने भी उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर आकाश बनर्जी भी सोशल मीडिया पर लग रही पाबंदियों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। इनका आरोप है कि सरकार की आलोचना करने वाले पोस्ट की पहुंच कम की जा रही है। कुछ पत्रकारों और स्वतंत्र मीडिया संस्थानों ने भी शिकायत की है कि उनके पोस्ट या अकाउंट भारत में दिखाई नहीं दे रहे हैं।

इन शिकायतों के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की बोलने की आजादी को लेकर चर्चा बढ़ गई है। हालांकि, सभी अकाउंट या पोस्ट पर कार्रवाई की वजह एक जैसी नहीं बताई गई है।

'खुरपेंच' इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी लगी रोक

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इंस्टाग्राम पर 'खुरपेंच' नाम के अकाउंट पर भी 25 अक्टूबर को भारत में पाबंदी लगने की खबर सामने आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय इस अकाउंट के करीब 2.92 लाख फॉलोअर्स थे। अकाउंट खोलने पर एक नोटिस दिखाई देने की बात कही गई, जिसमें भारत के सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 का हवाला दिया गया था। हालांकि, यह साफ नहीं हुआ कि किस पोस्ट या वीडियो की वजह से अकाउंट पर रोक लगाई गई।

अकाउंट चलाने वाले ने भी सवाल उठाया कि पहले उनके कई वीडियो हटाए गए और बाद में पूरा अकाउंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। उनका कहना था कि कार्रवाई से पहले उन्हें इसकी साफ जानकारी नहीं दी गई थी। 

पांच महीने में करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर लगाई गई पाबंदियों से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से जुलाई 2026 के बीच इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश भेजे गए थे। इनमें सबसे ज्यादा करीब एक लाख आदेश इंस्टाग्राम से जुड़े थे। फेसबुक को लगभग 80 हजार और यूट्यूब को करीब 15 हजार आदेश मिले।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ये आदेशों की संख्या है, हटाए गए पोस्ट या बंद किए गए अकाउंट की नहीं। एक ही आदेश में कई वीडियो, पोस्ट या अकाउंट शामिल हो सकते हैं। इन आंकड़ों और हाल में सामने आई शिकायतों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट या अकाउंट को रोकने का फैसला किस आधार पर लिया जाता है और उसकी वजह लोगों को कितनी साफ तरीके से बताई जाती है। 

सरकार और मेटा का क्या है पक्ष?

मेटा का कहना है कि भारत में कंटेंट प्रतिबंधित करने से जुड़ी कार्रवाई स्थानीय कानूनों और वैध कानूनी अनुरोधों के अनुसार की जाती है। दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को मेटा को एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें भ्रामक सामग्री, गलत संदर्भ में पेश किए गए वीडियो और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कंटेंट की जांच मजबूत करने को कहा गया था।

सरकार का कहना है कि ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य गलत जानकारी के प्रसार को रोकना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है। हालांकि, अभिजीत दीपके के ताजा आरोपों पर केंद्र सरकार की कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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