विजयादशमी यानी दशहरा हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। जानें भगवान राम और मां दुर्गा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और इस त्योहार का महत्व।
विजयादशमी 2026: दशहरा हिंदू धर्म में आस्था, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। देशभर में इस अवसर पर पूजा-पाठ, रामलीला, रावण दहन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व लोगों को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
विजयादशमी का धार्मिक महत्व क्या है?
विजयादशमी को दशहरा भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा अपनी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है।
![]()
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। रावण ने माता सीता का अपहरण कर उन्हें लंका में बंदी बना लिया था। इसके बाद भगवान राम ने वानर सेना की सहायता से लंका पर चढ़ाई की और रावण को पराजित किया। इस विजय को अन्याय, अहंकार और अधर्म के अंत के रूप में देखा जाता है।
इसी मान्यता के कारण दशहरे पर कई स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इस परंपरा के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य और धर्म की ही होती है।
मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की मान्यता
विजयादशमी का संबंध मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर नामक असुर ने अपनी शक्तियों के बल पर देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए देवी दुर्गा ने उससे युद्ध किया और अंत में उसका वध कर दिया। इस घटना को बुराई के अंत और शक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है।
इसी धार्मिक मान्यता के कारण पश्चिम बंगाल सहित देश के कई हिस्सों में दुर्गा पूजा के समापन पर विजयादशमी मनाई जाती है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें विदाई देते हैं। कई स्थानों पर प्रतिमा विसर्जन और धार्मिक शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं। भक्त मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
विजयादशमी का यह स्वरूप महिलाओं की शक्ति, साहस और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संदेश भी देता है। यह पर्व लोगों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
दशहरा कैसे मनाया जाता है और क्या है इसका संदेश?
दशहरे के अवसर पर देश के कई हिस्सों में रामलीला का आयोजन किया जाता है। इसमें भगवान राम के जीवन और रावण के साथ हुए युद्ध की कहानी को नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। त्योहार के दिन रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा होती है और कई जगहों पर मेले तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कुछ क्षेत्रों में विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा और वाहनों की पूजा करने की परंपरा भी है। लोग अपने कार्यों में सफलता और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। कई समुदायों में इस दिन को नए काम की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।
विजयादशमी का महत्व केवल धार्मिक कथाओं तक सीमित नहीं है। यह त्योहार हमें अपने भीतर मौजूद क्रोध, अहंकार, लालच और द्वेष जैसी बुराइयों को दूर करने की सीख देता है। इसका संदेश है कि व्यक्ति को हमेशा सत्य, सदाचार और न्याय का साथ देना चाहिए। अच्छे विचारों और कर्मों के माध्यम से ही जीवन और समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।








