मिजोरम की स्ट्रॉबेरी किसान मारी जेडटी लालरिथांगी को रोम में FAO ने किया सम्मानित, 600 से अधिक नामांकनों में चुनी गईं

मिजोरम की किसान मारी जेडटी लालरिथांगी को रोम में FAO के 100 महिला नायकों की सूची में शामिल किया गया। उन्होंने 1,000 स्ट्रॉबेरी पौधों से शुरुआत की और दो

मिजोरम की किसान मारी जेडटी लालरिथांगी को रोम में FAO के 100 महिला नायकों की सूची में शामिल किया गया। उन्होंने 1,000 स्ट्रॉबेरी पौधों से शुरुआत की और दो वर्षों में खेती का विस्तार 10,000 से अधिक पौधों तक किया।

आइजोल: मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले के सांगाउ गांव की 35 वर्षीय किसान मारी जेडटी लालरिथांगी को कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने सम्मानित किया है। उन्हें 15 अक्टूबर को रोम में आयोजित विश्व खाद्य मंच (World Food Forum) के दौरान ‘FAO 100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development’ सूची में शामिल किया गया। 

यह सम्मान वर्ष 2026 में मनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के अवसर पर दिया गया। पहले निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करने वाली लालरिथांगी ने वर्ष 2024 में केवल 1,000 स्ट्रॉबेरी पौधों से खेती शुरू की थी। दो वर्षों के भीतर उनका खेत 10,000 से अधिक पौधों और लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र तक फैल गया। उनकी कहानी ग्रामीण उद्यमिता, नवाचार और कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

600 से अधिक नामांकनों में हुआ चयन

मारी जेडटी लालरिथांगी का चयन 131 देशों से आए 600 से अधिक नामांकनों में से किया गया। इस सूची में भारत की केवल दो महिलाओं को जगह मिली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल करने वाली पहली मिजो महिला हैं।

FAO की यह पहल कृषि-खाद्य व्यवस्था और ग्रामीण विकास में योगदान देने वाली महिलाओं के काम को पहचान देने के उद्देश्य से आयोजित की गई। कृषि क्षेत्र में महिलाएं खेती, खाद्य उत्पादन, प्रसंस्करण और स्थानीय बाजारों तक उत्पाद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उनके काम और उद्यमों को कई बार पर्याप्त पहचान नहीं मिलती।

लालरिथांगी का चयन इस बात को रेखांकित करता है कि छोटे ग्रामीण उद्यम भी नए विचारों, मेहनत और स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

सम्मान मिलने पर उन्होंने ईश्वर के मार्गदर्शन, अपने परिवार के सहयोग और मिजोरम के बागवानी विभाग के समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके मुताबिक, इस यात्रा में परिवार और सरकारी विभाग से मिले सहयोग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षिका से स्ट्रॉबेरी किसान बनने तक का सफर

खेती शुरू करने से पहले लालरिथांगी एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती थीं। उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की, लेकिन आगे चलकर खेती को अपना व्यवसाय बनाने का फैसला किया।

उनका यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। पड़ोसी सियाहा जिले में स्ट्रॉबेरी उगाने वाले किसानों से प्रेरणा लेकर उन्होंने इस फल की खेती की संभावनाओं को समझना शुरू किया। वर्ष 2024 में उन्होंने 1,000 स्ट्रॉबेरी पौधों के साथ अपना काम शुरू किया।

नई फसल की खेती के लिए उन्हें उत्पादन संबंधी जानकारी और व्यावहारिक तकनीकें सीखनी थीं। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन वीडियो और ट्यूटोरियल की मदद ली। वह अपने बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के बाद अक्सर देर रात तक खेती से जुड़ी जानकारी का अध्ययन करती थीं।

धीरे-धीरे उन्होंने फसल उगाने के तरीकों को समझा और अपने अनुभव के आधार पर खेती का विस्तार किया। उनकी यात्रा बताती है कि औपचारिक कृषि प्रशिक्षण के अभाव में भी सही जानकारी, निरंतर सीखने की इच्छा और व्यावहारिक अनुभव किसी नए व्यवसाय की शुरुआत में मददगार हो सकते हैं।

दो साल में 1,000 से बढ़कर 10,000 से अधिक पौधे

लालरिथांगी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उनके स्ट्रॉबेरी फार्म का तेजी से विस्तार है। वर्ष 2024 में 1,000 पौधों से शुरू हुआ उनका उद्यम दो वर्षों के भीतर 10,000 से अधिक पौधों तक पहुंच गया। वर्तमान में वह लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रही हैं।

उनकी मेहनत का आर्थिक परिणाम भी सामने आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती से 10 लाख रुपये से अधिक की कमाई की। यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र में कृषि को आजीविका और उद्यमिता के प्रभावी विकल्प के रूप में स्थापित करने की उनकी क्षमता को दिखाती है।

स्ट्रॉबेरी की खेती में फसल की देखभाल, सही समय पर तुड़ाई और उत्पाद को बाजार तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है। किसानों को मौसम, उत्पादन लागत और बाजार की मांग जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखना पड़ता है। लालरिथांगी ने अपने काम का विस्तार करते हुए उत्पादन के साथ-साथ उत्पादों की विविधता पर भी ध्यान दिया।

उनका उदाहरण यह भी बताता है कि खेती को केवल पारंपरिक आजीविका के रूप में देखने के बजाय व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ बाजार की जरूरतों को समझना और ग्राहकों तक उत्पाद पहुंचाने के नए तरीके अपनाना जरूरी होता है।

स्ट्रॉबेरी वाइन और कैंडी बनाकर बढ़ाया कारोबार

लालरिथांगी ने केवल ताजा स्ट्रॉबेरी बेचने तक अपने कारोबार को सीमित नहीं रखा। उन्होंने स्ट्रॉबेरी से वाइन और कैंडी जैसे उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया। इन उत्पादों को स्थानीय बाजारों में खरीदार मिले।

कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा कर सकता है। ताजे फल की बिक्री के अलावा उनसे दूसरे उत्पाद तैयार करने से कारोबार में विविधता आती है और किसानों को अलग-अलग बाजारों तक पहुंचने का मौका मिल सकता है।

हालांकि, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के कारोबार में गुणवत्ता, सुरक्षित उत्पादन, भंडारण, पैकेजिंग और लागू नियमों का पालन भी जरूरी होता है। इन पहलुओं पर ध्यान देकर छोटे किसान अपने उत्पादों को अधिक व्यवस्थित तरीके से बाजार में उतार सकते हैं।

लालरिथांगी का अनुभव इस दिशा में ग्रामीण उद्यमियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने खेती के साथ उत्पादों में विविधता लाने की कोशिश की, जिससे उनकी व्यावसायिक गतिविधियों का दायरा बढ़ा।

उनकी उपलब्धि यह भी रेखांकित करती है कि कृषि क्षेत्र में नवाचार केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उपज से नए उत्पाद बनाना और बाजार की जरूरतों के अनुसार कारोबार विकसित करना भी नवाचार का हिस्सा है।

परिवार के सहयोग से संभाली खेती और बच्चों की जिम्मेदारी

लालरिथांगी की यात्रा में पारिवारिक सहयोग की भी अहम भूमिका रही है। उनके पति प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। खेती के विस्तार के दौरान उन्हें अपने पति और ससुराल पक्ष से सहयोग मिला।

तीन बच्चों की देखभाल के साथ खेती सीखना और उसे व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाना उनके लिए आसान नहीं रहा होगा। उन्होंने ऑनलाइन माध्यमों से खेती की तकनीकें सीखीं और अपनी घरेलू जिम्मेदारियों के बीच इसके लिए समय निकाला।

उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं के सामने मौजूद उन चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है, जिनमें परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना शामिल है। महिलाओं को जानकारी, प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधन और परिवार का सहयोग मिले तो वे कृषि और दूसरे व्यवसायों में अपनी भूमिका को मजबूत कर सकती हैं।

लालरिथांगी ने सम्मान मिलने पर मिजोरम के बागवानी विभाग के सहयोग का भी उल्लेख किया। कृषि और बागवानी विभाग किसानों को तकनीकी जानकारी, खेती से संबंधित मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मिजोरम में बागवानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम उपलब्धि

मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले के सांगाउ गांव में लालरिथांगी का उद्यम स्थानीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को सामने लाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में खेती के विकल्पों का चयन स्थानीय परिस्थितियों, जलवायु और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर करना जरूरी होता है।

स्ट्रॉबेरी जैसी फसल की व्यावसायिक खेती किसानों को पारंपरिक कृषि गतिविधियों के अलावा नए विकल्प उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, इसकी सफलता के लिए उपयुक्त खेती तकनीक, उत्पादन लागत का प्रबंधन, बाजार तक पहुंच और फसल की गुणवत्ता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

यदि स्थानीय किसानों को सही जानकारी और बाजार से जुड़ने के अवसर मिलें, तो वे अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने की दिशा में काम कर सकते हैं। कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

लालरिथांगी की उपलब्धि किसी एक किसान की सफलता से आगे बढ़कर यह दिखाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन देकर रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

मिजोरम हॉर्टी फेयर 2026 में भी मिल चुका है सम्मान

FAO की अंतरराष्ट्रीय पहचान से पहले लालरिथांगी को मिजोरम हॉर्टी फेयर 2026 में भी सम्मानित किया गया था। इस आयोजन में उन्हें लॉन्गतलाई जिले की सर्वश्रेष्ठ किसान चुना गया था।

स्थानीय स्तर पर मिली इस पहचान के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका चयन उनकी उपलब्धियों को व्यापक पहचान दिलाता है। FAO की सूची में शामिल होने से उनकी कहानी दूसरे किसानों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं, तक पहुंच सकती है।

हालांकि, किसी एक किसान की सफलता को हर क्षेत्र में समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता। खेती के नतीजे स्थानीय मौसम, भूमि, लागत और बाजार जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। फिर भी, लालरिथांगी का अनुभव यह समझने में मदद करता है कि सीखने की निरंतर प्रक्रिया, परिवार का सहयोग और उत्पादों में विविधता कृषि उद्यम को आगे बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।

महिला किसानों की भूमिका को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

मारी जेडटी लालरिथांगी को मिला FAO सम्मान कृषि-खाद्य व्यवस्था और ग्रामीण विकास में महिलाओं के योगदान को पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उनकी यात्रा शिक्षण से खेती तक के बदलाव, सीमित स्तर से उद्यम शुरू करने और धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

1,000 पौधों से शुरू होकर 10,000 से अधिक पौधों तक पहुंचने और स्ट्रॉबेरी से बने उत्पादों को बाजार में उतारने तक का उनका सफर दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी कृषि आधारित उद्यम विकसित किए जा सकते हैं।

उनकी उपलब्धि से मिजोरम की पहचान कृषि और बागवानी के क्षेत्र में भी मजबूत होती है। साथ ही, यह उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर नया काम शुरू करना चाहती हैं।

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