हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपनी शुगर जांच रिपोर्ट का उदाहरण देकर सरकारी अस्पतालों की पुरानी मशीनों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 10 से 15 साल पुराने उपकरण बदलने और मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक लैब बनाने के निर्देश दिए हैं।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकारी अस्पताल में हुई जांच रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की बैठक में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। बुधवार को राज्य सचिवालय में समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि एक अस्पताल में उनकी रूटीन जांच हुई थी, जिसमें शुगर का स्तर 177 आया था। उन्होंने कहा कि उन्हें शुगर की बीमारी नहीं है। इस अनुभव के बाद उन्होंने अधिकारियों को पुरानी जांच मशीनें बदलने के निर्देश दिए।
सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जांच के लिए इस्तेमाल हो रही मशीनों की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक सरकारी अस्पताल में सामान्य स्वास्थ्य जांच के दौरान उनकी शुगर रिपोर्ट में स्तर 177 दर्ज किया गया था।
![]()
मुख्यमंत्री के अनुसार, उन्हें पहले कभी डायबिटीज की बीमारी नहीं रही। उन्होंने जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और अधिकारियों से पूछा कि यदि क्षेत्रीय अस्पतालों में ऐसी स्थिति है, तो छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को कैसी सुविधाएं मिल रही होंगी।
बैठक में संबंधित चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिस मशीन से जांच की गई थी, उसे अब बदल दिया गया है। हालांकि, केवल एक शुगर रीडिंग के आधार पर डायबिटीज होने या न होने का फैसला नहीं किया जा सकता।
गलत जांच रिपोर्ट से मरीजों को होती है परेशानी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अस्पतालों की वास्तविक समस्याएं सामने रखने को कहा। उनका कहना था कि व्यवस्था में कमी होने पर उसे छिपाने के बजाय सुधारने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि जांच में गड़बड़ी होने से मरीजों को कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं। गलत रिपोर्ट मिलने पर व्यक्ति अनावश्यक चिंता में पड़ सकता है और दोबारा जांच कराने पर अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ सकता है।
सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि मरीजों को सही और भरोसेमंद जांच सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने अस्पतालों में इस्तेमाल हो रहे उपकरणों की स्थिति की समीक्षा करने पर जोर दिया।
10 से 15 साल पुरानी एक्स-रे, CT स्कैन और MRI मशीनें बदलें
स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल कॉलेजों और क्षेत्रीय अस्पतालों में लगी पुरानी मशीनों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 10 से 15 साल पुराने एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई उपकरणों की सूची तैयार करने को कहा है। इसके बाद इन्हें बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सरकार पहले भी अस्पतालों में आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री ने करीब 300 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद और स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।
मेडिकल कॉलेजों में 30 करोड़ रुपये की आधुनिक लैब
प्रदेश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में जांच सुविधाएं बेहतर करने के लिए ऑटोमेशन लैब स्थापित करने की योजना है। प्रत्येक लैब पर करीब 28 से 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पहले चरण में आईजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज, चंबा, हमीरपुर और नेरचौक में यह सुविधा विकसित की जाएगी।
ऑटोमेशन लैब में जांच की कई प्रक्रियाएं मशीनों की मदद से पूरी होंगी। इससे रिपोर्ट तैयार करने में लगने वाला समय कम हो सकता है और जांच की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी दूर करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में खाली पदों को भरने पर भी जोर दिया। बैठक में बताया गया कि मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग-अलग श्रेणियों में नए पदों को मंजूरी दी है।
इनमें 300 चिकित्सा अधिकारी, 250 मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS), 200 स्टाफ नर्स और 76 ऑपरेशन थिएटर सहायकों के पद शामिल हैं। इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने की बात कही गई है।
सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाना है, ताकि मरीजों को इलाज और जांच के लिए ज्यादा परेशानी न उठानी पड़े।
मेडिकल छात्रों की पढ़ाई पर भी दिए निर्देश
समीक्षा बैठक में मेडिकल कॉलेजों की पढ़ाई से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने एमबीबीएस विद्यार्थियों को 60-60 के छोटे बैच में पढ़ाने के निर्देश दिए।
इससे शिक्षकों को छात्रों पर बेहतर ध्यान देने और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बैठक में प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अस्पतालों की जरूरतों के अनुसार काम करने और सुधार की जिम्मेदारी तय करने को कहा।
सुक्खू ने वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य भी दोहराया। फिलहाल सरकार के सामने पुरानी मशीनों को बदलने, नई लैब स्थापित करने और खाली पदों को भरने का काम है।









