त्योहारी सीजन में दालों के दाम बढ़ने से अमेठी के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बाजार में अरहर 145 रुपये और उड़द 150 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कारोबारियों ने बढ़ती मांग और फसल खराब होने को इसकी वजह बताया है।
अमेठी: त्योहारों पर घर का खर्च पहले ही बढ़ जाता है। अब दालों की महंगाई ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। अमेठी के बाजार में पिछले कुछ दिनों के दौरान अलग-अलग दालों के दाम 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी आमदनी सीमित है। सब्जियों के बाद दाल महंगी होने से लोगों को महीने का राशन खरीदते समय भी बजट देखना पड़ रहा है।
अरहर और उड़द की दाल खरीदना हुआ महंगा
अमेठी के बाजारों में दालों की कीमतें लगातार चर्चा में हैं। अरहर की दाल अब 145 रुपये प्रति किलो मिल रही है, जबकि उड़द की कीमत 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। दूसरी दालों के भाव भी पिछले दिनों के मुकाबले बढ़े हैं।
दुकानदारों के मुताबिक, त्योहारों के चलते बाजार में खरीदारी बढ़ी है। घरों में पकवान बनाने के लिए दालों की जरूरत भी ज्यादा पड़ रही है। दूसरी तरफ बाजार में माल की आवक पहले जैसी नहीं है।
दाम बढ़ने के बाद ग्राहक भी सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। कई परिवार पहले जितना राशन एक साथ खरीदते थे, अब उतना लेने से बच रहे हैं। खासकर रोज दाल बनाने वाले घरों में बढ़ती कीमतों का असर महसूस किया जा रहा है।
बारिश से फसल खराब होने का भी असर
दाल कारोबारी मनोज कुमार और बृजेश कुमार का कहना है कि कीमतें बढ़ने के पीछे मौसम भी एक वजह है। पिछले दिनों हुई बारिश और मौसम में बदलाव से दालों की फसल प्रभावित हुई है।
व्यापारियों के अनुसार, फसल खराब होने के कारण बाजार में पर्याप्त माल नहीं पहुंच पा रहा है। इस बीच त्योहारों की वजह से मांग बढ़ गई है। मांग के मुकाबले आवक कम रहने से दुकानदारों को भी महंगे दाम पर माल खरीदना पड़ रहा है।
हालांकि, जिले में फसल को कितना नुकसान हुआ है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। फिलहाल कारोबारी बाजार में कम आवक और बढ़ी हुई मांग को कीमतों में तेजी का कारण बता रहे हैं।
घर का खर्च चलाने में हो रही परेशानी
दालों के बढ़े हुए दाम से गृहिणियां भी परेशान हैं। अमेठी की रहने वाली उर्मिला देवी का कहना है कि रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान पहले से महंगा है। अब दाल के दाम बढ़ने से महीने का खर्च संभालना और मुश्किल हो गया है।
रोली बरनवाल ने बताया कि त्योहारों के दिनों में घर के लिए कई तरह की खरीदारी करनी पड़ती है। ऐसे समय में राशन महंगा होने से परेशानी बढ़ जाती है। बाजार जाते समय अब जरूरी सामान की कीमत भी पहले देखनी पड़ती है।
गृहिणी उषा मौर्य का कहना है कि सीमित आमदनी में परिवार का खर्च चलाना आसान नहीं रह गया है। त्योहारों की खरीदारी के साथ रोजमर्रा के सामान पर भी ज्यादा पैसे खर्च हो रहे हैं। ऐसे में बचत करना मुश्किल होता जा रहा है।
हर सामान खरीदने से पहले करना पड़ रहा हिसाब
माधुरी यादव के मुताबिक, महंगाई का असर अब सामान्य खरीदारी पर भी दिखाई देने लगा है। बाजार में पहले जिन चीजों को बिना ज्यादा सोचे खरीद लिया जाता था, अब उनकी कीमत पूछकर ही खरीदारी करनी पड़ रही है।
दाल घर के रोजाना के खाने का हिस्सा है। इसलिए इसकी बढ़ी हुई कीमत को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है। परिवारों को सब्जी, तेल, आटा और दूसरी जरूरतों के साथ दाल पर होने वाला खर्च भी जोड़ना पड़ रहा है।
क्या आने वाले दिनों में सस्ती होंगी दालें?
अमेठी के कारोबारियों ने अभी दालों के दाम कम होने का कोई निश्चित समय नहीं बताया है। उनका कहना है कि बाजार में माल की आवक और मांग के हिसाब से कीमतें बदलती हैं।







