राहुल गांधी का आरोप- ऊपर से हो रही वोट चोरी, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

राहुल गांधी ने मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा। विपक्ष 1 नवंबर को दिल्ली में रैली करेगा।

राहुल गांधी ने दिल्ली की जनसुनवाई में आरोप लगाया कि गरीबों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्ष 1 नवंबर को दिल्ली में रैली करेगा।

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर फिर निशाना साधा है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को दिल्ली के त्रिलोकपुरी ब्लॉक-20 में आयोजित ‘वोट अधिकार, जीने का अधिकार’ जनसुनवाई में उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। राहुल ने कहा कि गड़बड़ियां निचले स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे ऊपरी स्तर की भूमिका है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही।

चार बूथों से 416 नाम हटाने का आरोप

जनसुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि केवल चार मतदान केंद्रों की मतदाता सूची से 416 लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए। उन्होंने इसे सामान्य प्रशासनिक गलती मानने से इनकार किया और मामले की जवाबदेही तय करने की मांग की।

राहुल ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूची में गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रही है। उनके मुताबिक, अब आम लोगों को भी समझ आने लगा है कि मतदाता सूची में बदलाव के पीछे क्या हो रहा है। हालांकि, चार बूथों से 416 नाम अवैध रूप से हटाए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह राहुल गांधी और विपक्ष की ओर से लगाया गया आरोप है।

ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल किए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका आरोप था कि चुनाव आयोग इस विवाद को स्पष्ट करने के बजाय जरूरी सवालों से बच रहा है।

राहुल ने कहा कि विपक्षी दल इस मामले में एकजुट हैं। उन्होंने दावा किया कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद नहीं छोड़ते या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें हटाने के लिए कदम नहीं उठाते, तब तक विरोध जारी रहेगा। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है। प्रधानमंत्री अकेले उन्हें सीधे पद से नहीं हटा सकते।

1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ विपक्ष ने अपना आंदोलन तेज करने की तैयारी की है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ जन मार्च और महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। 

राहुल गांधी ने किसानों, मजदूरों, छात्रों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रैली का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करना है। 

क्या दिल्ली पुलिस ने रैली की अनुमति रद्द की?

कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर अनुमति का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रशासन कार्यक्रम की तैयारियों में बाधा डाल रहा है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान में 1 नवंबर के कार्यक्रम के लिए दी गई अनुमति वापस नहीं ली गई है। पलिस के मुताबिक, कांग्रेस को 25 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच मैदान के इस्तेमाल के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया गया है। पुलिस प्रशासन रैली के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर आयोजकों के संपर्क में है। 

30 अक्टूबर को प्रस्तावित है सार्वजनिक महाभियोग का कार्यक्रम

INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर की रैली से पहले 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना भी बनाई है। विपक्ष इसे सार्वजनिक महाभियोग की कार्यवाही के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम में विपक्षी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

यह कार्यक्रम वास्तविक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं है। इसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के आरोपों को सार्वजनिक रूप से सामने रखना है। कांग्रेस ने अपने सांसदों को 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक दिल्ली में उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए हैं। 

SIR को लेकर विपक्ष को क्या आपत्ति है?

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत निर्वाचन आयोग मतदाताओं का विवरण जांचता है और सूची को अद्यतन करता है। इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों और नियमों के अनुसार अपात्र पाए गए नामों से संबंधित सुधार किए जा सकते हैं।

विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि इसका असर खासकर गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों पर पड़ सकता है। वहीं, किसी नाम को जानबूझकर और अवैध तरीके से हटाए जाने का निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

दिल्ली में व्यापारियों ने भी जताई चिंता

1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को लेकर दिल्ली के कुछ व्यापारिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि बड़े प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था से त्योहारी कारोबार प्रभावित हो सकता है। इसी मुद्दे पर राहुल गांधी ने व्यापारियों से कहा कि वे प्रधानमंत्री से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग करें। उन्होंने दावा किया कि ऐसा होने पर विरोध प्रदर्शन तुरंत समाप्त हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस ने फिलहाल रैली स्थगित करने की घोषणा नहीं की है। कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार आयोजित किया जाना है। 

मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक टकराव के बीच अब 30 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली पर नजर रहेगी। चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संबंधित मतदाता रिकॉर्ड की जांच इस विवाद के तथ्य स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

Leave a comment