नई दिल्ली में दो दिन तक चले ब्रिक्स संसदीय मंच में आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर सहमति बनी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए सभी देशों को एक-दूसरे का साथ देना होगा। बैठक में संयुक्त घोषणा पत्र भी स्वीकार किया गया। अगले साल इस मंच की अध्यक्षता चीन करेगा।
नई दिल्ली: भारत में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक मंगलवार, 27 अक्टूबर को खत्म हो गई। दो दिन तक चले इस सम्मेलन में आतंकवाद, आपसी सहयोग और दुनिया में शांति बनाए रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन कार्यक्रम में कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की परेशानी नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इसलिए इससे निपटने के लिए सभी देशों को साथ काम करना होगा। बैठक के आखिर में सदस्य और भागीदार देशों ने एक संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति जताई।
आतंकवाद पर ब्रिक्स देशों ने क्या कहा?
दिल्ली के संविधान सदन में ब्रिक्स देशों की बैठक के दौरान आतंकवाद का मुद्दा भी उठा। सभी प्रतिनिधियों ने आतंकी घटनाओं की निंदा की। उनका कहना था कि आतंकवाद से निपटने के लिए देशों को आपस में सहयोग बढ़ाना होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बैठक के बाद बताया कि सभी देशों ने एक संयुक्त घोषणा पत्र स्वीकार किया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई है।
बैठक में इस बात पर भी सहमति रही कि आतंकवाद के मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। आतंकी गतिविधियां कहीं भी हों, उन्हें रोकने के लिए देशों को मिलकर कदम उठाने होंगे। हालांकि, घोषणा पत्र में किसी खास देश के खिलाफ नई कार्रवाई का ऐलान नहीं किया गया है।
संयुक्त घोषणा पत्र में और क्या तय हुआ?
दो दिन की बातचीत के बाद सभी देशों ने संयुक्त घोषणा पत्र को मंजूरी दी। इसमें आतंकवाद के अलावा दुनिया में शांति बनाए रखने और देशों के बीच बेहतर रिश्तों पर भी जोर दिया गया। घोषणा पत्र में कहा गया कि हर देश की आजादी और उसके अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। किसी दूसरे देश के अंदरूनी मामलों में दखल देने से बचना चाहिए। अगर दो देशों के बीच कोई विवाद है, तो उसे बातचीत से सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए।
इसके साथ ही अलग-अलग देशों की संसदों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति बनी। ओम बिरला ने कहा कि सिर्फ बैठक में बातें करना काफी नहीं है। जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन पर आगे काम भी होना चाहिए।
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चीन को ओम बिरला ने क्या संदेश दिया?
ब्रिक्स संसदीय मंच की अगली अध्यक्षता चीन को मिली है। मंगलवार को समापन कार्यक्रम में ओम बिरला ने यह जिम्मेदारी चीन को सौंपी और अगले साल के आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में हुई इस बैठक से दुनिया को आपसी भरोसे और मिलकर काम करने का संदेश जाना चाहिए। देशों के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बातचीत बंद कर दी जाए।
ओम बिरला ने जोर दिया कि आपसी मतभेद दूर करने के लिए लगातार बातचीत जरूरी है। इससे देशों के बीच भरोसा बढ़ सकता है और कई समस्याओं का हल भी निकाला जा सकता है।
भारत और चीन के बीच किन मुद्दों पर हुई बात?
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे चीन के संसदीय प्रतिनिधियों से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अलग से मुलाकात की। इस दौरान भारत और चीन के रिश्तों के साथ सीमा पर शांति बनाए रखने को लेकर बातचीत हुई। बिरला ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे के पड़ोसी हैं। ऐसे में दोनों देशों के लिए जरूरी है कि सीमा पर शांति बनी रहे। किसी बात को लेकर मतभेद होने पर बातचीत से रास्ता निकाला जाना चाहिए।
इस मुलाकात में कारोबार, पढ़ाई, स्वास्थ्य और नई तकनीक से जुड़े मुद्दे भी उठे। दोनों देशों की संसदों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी बात हुई। बिरला का मानना है कि सांसदों और संसदीय प्रतिनिधियों की मुलाकातें होती रहें, तो एक-दूसरे के विचार समझने में आसानी होगी।
विकासशील देशों की बात भी सुनी जाए
सम्मेलन में ओम बिरला ने उन देशों का मुद्दा भी उठाया, जिनकी आवाज दुनिया के बड़े फैसलों में अक्सर कम सुनाई देती है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में बड़े और ताकतवर देशों के साथ छोटे देशों की राय को भी जगह मिलनी चाहिए। कई विकासशील देश आर्थिक और दूसरी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उनकी जरूरतें विकसित देशों से अलग हो सकती हैं। इसलिए दुनिया की बड़ी संस्थाओं में उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
बिरला ने ब्रिक्स के बारे में भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यह संगठन किसी देश के विरोध के लिए नहीं बना है। इसके जरिए सदस्य देश उन समस्याओं पर चर्चा करते हैं, जिनका सामना वे कर रहे हैं। साथ ही एक-दूसरे के अनुभव से सीखने और सहयोग करने का मौका मिलता है।








