मध्य प्रदेश की राजनीति में नेताओं के कुछ वीडियो चर्चा में हैं। जीतू पटवारी ने मंच से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पूर्व जन्म का जिक्र किया और नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा कार्यकर्ता को जूते पहनाए।
मध्य प्रदेश की राजनीति: इन दिनों नेताओं के बयान और सार्वजनिक कार्यक्रम चर्चा का विषय बने हुए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कटनी में घरेलू सामान दिखाकर सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़वानी के सेंधवा में आदिवासी समाज से बातचीत के दौरान अपने पूर्व जन्म का जिक्र किया। उधर, दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक भाजपा कार्यकर्ता को अपने हाथों से जूते पहनाए। इन घटनाओं के वीडियो भी सामने आए हैं।
जीतू पटवारी ने मंच पर बाल्टी और बल्ब दिखाकर सरकार को घेरा
कटनी जिले के बरही में आयोजित कांग्रेस की जनआक्रोश सभा में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने मंच पर डस्टबिन, फिनाइल की बोतल और बल्ब दिखाकर मध्य प्रदेश सरकार की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
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पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद में एक डस्टबिन की कीमत एक लाख रुपये, फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये दिखाई गई।
उन्होंने दावा किया कि नगरीय प्रशासन विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। पटवारी ने उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) से जुड़े रिश्वत मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
हालांकि, इन खरीद संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित खरीद के दस्तावेज और सरकार का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
बाइक रैली में जीतू पटवारी ने नहीं पहना हेलमेट
बरही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ बाइक रैली में भी शामिल हुए। सामने आए वीडियो में वह बुलेट मोटरसाइकिल चलाते दिखाई दिए।
इस दौरान उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में शामिल कई दूसरे कार्यकर्ता भी बिना हेलमेट नजर आए।
यातायात नियमों के अनुसार, सार्वजनिक सड़क पर दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना जरूरी है। ऐसे में कांग्रेस नेता की रैली का यह दृश्य भी चर्चा में आ गया।
सीएम मोहन यादव ने आदिवासी समाज के बीच किया पूर्व जन्म का जिक्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हाल ही में बड़वानी जिले के सेंधवा पहुंचे थे। वहां उन्होंने मलखंब का प्रदर्शन देखा और एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की बारेली बोली का भी जिक्र हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस बोली को सीखना चाहते हैं।
बातचीत के दौरान उन्होंने अपने पूर्व जन्म को लेकर भी टिप्पणी की। मोहन यादव ने कहा कि उन्हें लगता है कि पिछले जन्म में उनका संबंध बारेला समाज से रहा होगा।
मुख्यमंत्री का यह बयान स्थानीय संस्कृति और आदिवासी समुदाय से जुड़ी बातचीत के दौरान सामने आया था।
नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा कार्यकर्ता को अपने हाथों से पहनाए जूते
दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह भाजपा कार्यकर्ता सुरेंद्र रावत को अपने हाथों से जूते पहनाते दिखाई दे रहे हैं।
गोराघाट निवासी सुरेंद्र रावत ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अपने मतदान केंद्र पर भाजपा की हार के बाद जूते-चप्पल नहीं पहनने का संकल्प लिया था।
उन्होंने तय किया था कि जब तक उनके बूथ पर भाजपा को जीत नहीं मिलेगी, वह नंगे पैर रहेंगे।
वर्ष 2026 के विधानसभा उपचुनाव में संबंधित बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिले। इसके बाद एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें नरोत्तम मिश्रा ने सुरेंद्र रावत को जूते पहनाए, उनके फीते बांधे और गले लगाया।
दिग्विजय सिंह की धार्मिक यात्रा में लगे राजनीतिक नारे
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा भी चर्चा में रही। दशहरे पर उज्जैन से शुरू हुई यह यात्रा अयोध्या तक प्रस्तावित है।
यात्रा के शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह भजन पर नाचते नजर आए। हालांकि, इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ राजनीतिक नारे भी लगाए।
यात्रा को पहले गैरराजनीतिक बताया गया था, लेकिन दिग्विजय सिंह ने लोगों को एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी रैली में शामिल होने का न्योता भी दिया।
शिवराज सिंह चौहान ने विस्थापित ग्रामीणों के साथ बिताया समय
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे। यहां उन्होंने विस्थापन का सामना कर रहे ग्रामीणों से बातचीत की।
शिवराज सिंह चौहान आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ नाचते दिखाई दिए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन भी किया।
उन्होंने गांव छोड़ने के ग्रामीणों के फैसले को वन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति त्याग का उदाहरण बताया।
मध्य प्रदेश के नेताओं के ये अलग-अलग कार्यक्रम राजनीतिक आरोपों, सार्वजनिक व्यवहार और स्थानीय समुदायों के साथ उनके संवाद को लेकर चर्चा में बने हुए हैं।










