भागलपुर में पनीर में फॉर्मलिन मिलाने की आशंका, आधा दर्जन दुकानदारों पर कार्रवाई, खाद्य जांच वाहन भी ठप

बिहार के भागलपुर में पनीर में मिलावट और फॉर्मलिन के इस्तेमाल की आशंका है। छह दुकानदारों पर कार्रवाई हुई। चालक के अभाव में खाद्य जांच वाहन भी प्रभावित है।

बिहार के भागलपुर में पनीर और मिठाइयों की शुद्धता को लेकर सवाल उठे हैं। अगस्त से करीब छह दुकानदारों पर कार्रवाई हुई है। वहीं चालक नहीं होने से खाद्य पदार्थों की जांच करने वाला मोबाइल वाहन नियमित रूप से नहीं चल पा रहा है।

भागलपुर: बाजार में मिलने वाला पनीर कितना शुद्ध है, इसे लेकर भागलपुर में चिंता बढ़ गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पनीर में मिलावट का मामला सामने आया है और उसे लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए फॉर्मलिन जैसे रसायनों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। इस बीच जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए आया वाहन चालक नहीं होने के कारण नियमित रूप से नहीं चल पा रहा है। विभाग के अनुसार, अगस्त से अब तक करीब आधा दर्जन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

पनीर को खराब होने से बचाने के लिए रसायन मिलाने की आशंका

भागलपुर के खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार ने बताया कि खाद्य पदार्थों की जांच के दौरान पनीर में मिलावट का मामला सामने आया है। विभाग को आशंका है कि कुछ कारोबारी पनीर को ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए फॉर्मलिन जैसे रसायनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

भागलपुर में पनीर में फॉर्मलिन मिलाने की आशंका, आधा दर्जन दुकानदारों पर कार्रवाई, खाद्य जांच वाहन भी ठप

फॉर्मलिन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक रसायन है। खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल सुरक्षित नहीं माना जाता। हालांकि, भागलपुर में जांचे गए पनीर के नमूनों में इसकी मौजूदगी की अंतिम प्रयोगशाला रिपोर्ट की जानकारी सामने नहीं आई है।

विभाग के अनुसार, संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच कराई जाती है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही संबंधित दुकानदार के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय होती है।

चालक नहीं होने से खड़ा है खाद्य जांच वाहन

करीब छह साल पहले भागलपुर को खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष वाहन उपलब्ध कराया गया था। इस वाहन का नाम 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' है। इसमें छोटी प्रयोगशाला की व्यवस्था है, जिससे बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की शुरुआती जांच की जा सकती है।

लेकिन वाहन के चालक के सेवानिवृत्त होने के बाद इसके नियमित संचालन में परेशानी आ रही है। तकनीशियन की व्यवस्था होने के बावजूद वाहन को जांच के लिए अलग-अलग इलाकों में भेजना मुश्किल हो गया है।

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजहंस कुमार के मुताबिक, सरकार ने संविदा पर नया चालक रखने के लिए विज्ञापन जारी किया है। नियुक्ति होने के बाद वाहन का नियमित संचालन शुरू करने में आसानी होगी।

सप्ताह में दो दिन जांच का निर्देश, लेकिन आ रही परेशानी

खाद्य निरीक्षक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि मुख्यालय से सप्ताह में दो दिन मोबाइल वाहन के जरिए खाद्य पदार्थों की जांच करने का निर्देश मिला है।

वाहन के लिए चालक नहीं मिलने से विभाग को इस काम में दिक्कत हो रही है। फिलहाल उपलब्ध कर्मचारियों और संसाधनों की मदद से जांच जारी रखने की कोशिश की जा रही है।

अशोक कुमार सिन्हा के पास भागलपुर के साथ मुंगेर जिले की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में दोनों जिलों में खाद्य पदार्थों की जांच का काम उन्हें देखना पड़ रहा है।

मिठाई और पनीर की जांच कैसे होती है?

फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स वाहन में खाद्य पदार्थों की शुरुआती जांच करने की सुविधा है। इससे दूध, मिठाई और दूसरे खाद्य पदार्थों में कुछ सामान्य मिलावट की पहचान की जा सकती है।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, मौके पर मिठाई में फफूंद, खराब गंध और उसके खराब होने के दूसरे लक्षण देखे जाते हैं। जिन नमूनों की विस्तृत जांच जरूरी होती है, उन्हें पटना की प्रयोगशाला भेजा जाता है।

प्रयोगशाला में रासायनिक जांच के बाद पता चलता है कि खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। इसी रिपोर्ट के आधार पर विभाग आगे का फैसला करता है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने भी मोबाइल प्रयोगशालाओं की व्यवस्था की है, ताकि बाजारों और दूरदराज के इलाकों में खाद्य पदार्थों की जांच की जा सके।

अगस्त से अब तक छह दुकानदारों पर कार्रवाई

राजहंस कुमार ने बताया कि अगस्त से अब तक भागलपुर जिले में करीब आधा दर्जन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान कुछ जगह खराब और मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए खाद्य पदार्थ बेचने के मामले सामने आए।

खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, जांच में गड़बड़ी साबित होने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

मामले की गंभीरता के आधार पर जुर्माना लगाने, मुकदमा चलाने या खाद्य कारोबार का लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, भागलपुर में जिन छह दुकानदारों पर कार्रवाई हुई, उनके नाम और अलग-अलग मामलों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।

मिठाइयों में मिलावटी रंगों की भी जांच

पनीर के अलावा मिठाइयों में अनधिकृत रंगों के इस्तेमाल की आशंका को लेकर भी खाद्य सुरक्षा विभाग जांच करता है। कुछ खाद्य पदार्थ देखने में अच्छे लग सकते हैं, लेकिन उनकी शुद्धता का पता केवल रंग या बनावट देखकर नहीं लगाया जा सकता।

इसी वजह से विभाग दुकानों से नमूने लेकर उनकी जांच कराता है। नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरने पर दुकानदार से जवाब मांगा जा सकता है और नियमानुसार कार्रवाई होती है।

बिहार में खाद्य सुरक्षा जांच का अभियान दूसरे जिलों में भी चल रहा है। हाल में जारी विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों के दौरान भागलपुर में 18 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया था।

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